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ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने चीनी मिल को लौटाया 21.5 करोड़ का चेक
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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
महज 17 दिन का भुगतान जारी करने पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने शुगर मिल की ओर से जारी 21.5 करोड़ का चेक लौटाने के आदेश दिए हैं। उन्होंने शुगर मिल को कम से कम एक महीने का भुगतान जारी करने के लिए चार दिन का समय दिया है। बता दें कि पिछले दिनों गन्ना मंत्री के साथ हुई वार्ता में शुगर मिलों को वर्तमान पेराई सत्र का 45 दिन का भुगतान करने के निर्देश दिए गए थे। वहीं, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने सहायक गन्ना आयुक्त को लिब्बरहेड़ी शुगर मिल में चीनी के स्टॉक के सत्यापन के भी आदेश दिए हैं।
पिछले दिनों देहरादून में गन्ना मंत्री प्रकाश की अध्यक्षता में गन्ना किसानों, गन्ना विभाग के अधिकारियों और शुगर मिलों के अधिकारियों के बीच वार्ता हुई थी। गन्ना मंत्री ने लिब्बरहेड़ी शुगर मिल को आदेशित किया था कि 15 जनवरी से पहले वर्तमान पेराई सत्र के 45 दिन का भुगतान करें। शनिवार को लिब्बरहेड़ी शुगर मिल ने 14 नवंबर से 30 नवंबर तक का 21 करोड़ 51 लाख का चेक समिति को जारी किया। इसकी सूचना ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल को मिली तो उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए सहायक गन्ना आयुक्त को चेक लौटाने के आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि जब जब 45 दिन का भुगतान करने के आदेश दिए थे, तो 17 दिन का भुगतान करने का क्या मतलब। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि शुगर मिल के अधिकारियों का कहना था कि चीनी के रेट बेहद कम हैं। वहीं, चीनी का उठान भी नहीं हो पा रहा है। लिहाजा वे 45 दिन का भुगतान करने में असमर्थ हैं। इस पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने मिल को कम से कम एक महीने का एकमुश्त भुगतान चार दिन में अदा करने को कहा है। साथ ही चीनी मिल की ओर से चीनी की बिक्री नहीं होने की जानकारी दिए जाने के बाद सहायक गन्ना आयुक्त शैलेंद्र सिंह को चीनी का स्टॉक चेक कर रिपोर्ट देने के लिए आदेशित किया गया है।
पहली बार चीनी मिल के खिलाफ दिखाया कड़ा रुख
भुगतान को लेकर शुगर मिलों के खिलाफ ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने पहली बार इतना कड़ा रुख अपनाया है। हालांकि, इससे पहले भी किसान संगठनों की ओर से किए गए प्रदर्शनों के बाद उन्होंने ने बैठक लेकर शुगर मिलों को भुगतान करने के लिए बाध्य किया था, लेकिन स्थिति में ज्यादा सुधार देखने को नहीं मिला। अब ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने शुगर मिल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है, जिससे शुगर मिल पर भुगतान का दबाव बढ़ेगा। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने बताया कि शुगर मिलों पर भुगतान के लिए दबाव बनाया जा रहा है। यदि वादे के अनुरूप भुगतान जारी नहीं होता है तो और कड़े कदम उठाए जाएंगे।
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पिछले सत्र का बकाया है 46 करोड़
लिब्बरहेड़ी शुगर मिल पर पिछले पेराई सत्र का 46 करोड़ का भुगतान बकाया है। भुगतान करने के लिए शुगर मिल की ओर से सॉफ्ट लोन के लिए आवेदन किया गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही सॉफ्ट लोन पास होने के बाद यह भुगतान जारी किया जाएगा।
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महज 17 दिन का भुगतान जारी करने पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने शुगर मिल की ओर से जारी 21.5 करोड़ का चेक लौटाने के आदेश दिए हैं। उन्होंने शुगर मिल को कम से कम एक महीने का भुगतान जारी करने के लिए चार दिन का समय दिया है। बता दें कि पिछले दिनों गन्ना मंत्री के साथ हुई वार्ता में शुगर मिलों को वर्तमान पेराई सत्र का 45 दिन का भुगतान करने के निर्देश दिए गए थे। वहीं, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने सहायक गन्ना आयुक्त को लिब्बरहेड़ी शुगर मिल में चीनी के स्टॉक के सत्यापन के भी आदेश दिए हैं।
पिछले दिनों देहरादून में गन्ना मंत्री प्रकाश की अध्यक्षता में गन्ना किसानों, गन्ना विभाग के अधिकारियों और शुगर मिलों के अधिकारियों के बीच वार्ता हुई थी। गन्ना मंत्री ने लिब्बरहेड़ी शुगर मिल को आदेशित किया था कि 15 जनवरी से पहले वर्तमान पेराई सत्र के 45 दिन का भुगतान करें। शनिवार को लिब्बरहेड़ी शुगर मिल ने 14 नवंबर से 30 नवंबर तक का 21 करोड़ 51 लाख का चेक समिति को जारी किया। इसकी सूचना ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल को मिली तो उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए सहायक गन्ना आयुक्त को चेक लौटाने के आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि जब जब 45 दिन का भुगतान करने के आदेश दिए थे, तो 17 दिन का भुगतान करने का क्या मतलब। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि शुगर मिल के अधिकारियों का कहना था कि चीनी के रेट बेहद कम हैं। वहीं, चीनी का उठान भी नहीं हो पा रहा है। लिहाजा वे 45 दिन का भुगतान करने में असमर्थ हैं। इस पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने मिल को कम से कम एक महीने का एकमुश्त भुगतान चार दिन में अदा करने को कहा है। साथ ही चीनी मिल की ओर से चीनी की बिक्री नहीं होने की जानकारी दिए जाने के बाद सहायक गन्ना आयुक्त शैलेंद्र सिंह को चीनी का स्टॉक चेक कर रिपोर्ट देने के लिए आदेशित किया गया है।
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पहली बार चीनी मिल के खिलाफ दिखाया कड़ा रुख
भुगतान को लेकर शुगर मिलों के खिलाफ ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने पहली बार इतना कड़ा रुख अपनाया है। हालांकि, इससे पहले भी किसान संगठनों की ओर से किए गए प्रदर्शनों के बाद उन्होंने ने बैठक लेकर शुगर मिलों को भुगतान करने के लिए बाध्य किया था, लेकिन स्थिति में ज्यादा सुधार देखने को नहीं मिला। अब ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने शुगर मिल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है, जिससे शुगर मिल पर भुगतान का दबाव बढ़ेगा। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल ने बताया कि शुगर मिलों पर भुगतान के लिए दबाव बनाया जा रहा है। यदि वादे के अनुरूप भुगतान जारी नहीं होता है तो और कड़े कदम उठाए जाएंगे।
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पिछले सत्र का बकाया है 46 करोड़
लिब्बरहेड़ी शुगर मिल पर पिछले पेराई सत्र का 46 करोड़ का भुगतान बकाया है। भुगतान करने के लिए शुगर मिल की ओर से सॉफ्ट लोन के लिए आवेदन किया गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही सॉफ्ट लोन पास होने के बाद यह भुगतान जारी किया जाएगा।