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बसपा के दो बार विधायक रहे चौधरी यशवीर ने कांग्रेस छोड़ी
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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की। झबरेड़ा क्षेत्र से दो बार बसपा के विधायक रहे चौधरी यशवीर सिंह एवं उनके बेटे पूर्व नगर पालिका चेयरमैन गौरव चौधरी ने आखिरकार सोमवार को कांग्रेस का दामन भी छोड़ दिया। उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेंस में कई प्रधानों समेत 45 लोगों के साथ कांग्रेस छोड़ने का ऐलान किया। चुनावी दौर में कांग्रेस छोड़ने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अब उनके बसपा में जाने के कयास बढ़ गए हैं। इस बाबत चौधरी यशवीर सिंह ने कहा कि दो-चार दिन में नई पार्टी में शामिल होने की घोषणा करेंगे।
गौरतलब है कि राजनीतिक करियर की शुरुआत करते हुए चौधरी यशवीर सिंह 1995 में पहली बार नगर पंचायत चेयरमैन निर्वाचित हुए थे। राज्य गठन के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में इकबालपुर सीट से बसपा के विधायक चुने गए। इसके बाद 2007 में फिर से बसपा के विधायक चुने गए। इसके अलावा यशवीर सिंह उत्तराखंड विधानसभा की लोक लेखा समिति एवं विधानसभा की आश्वासन समिति के अध्यक्ष भी रहे हैं, लेकिन 2009 में लोकसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी से मतभेदों के चलते उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और पूर्व सीएम हरीश रावत के कहने पर कांग्रेस में शामिल हो गए। हाल ही में संपन्न हुए नगर पंचायत चुनाव में उनके बेटे गौरव चौधरी को शिकस्त मिली। माना जा रहा है कि इसी दौरान कांग्रेस की गुटबाजी के चलते चौधरी परिवार के कांग्रेस से मतभेद शुरू हो गए थे। सोमवार को दिल्ली-हरिद्वार रोड स्थिति आवास पर पत्रकार वार्ता करते हुए पूर्व विधायक चौधरी यशवीर सिंह और उनके बेटे गौरव चौधरी ने कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस में अनुशासनहीनता चरम पर है। पूर्व सीएम हरीश रावत ने गंगा गन्ना यात्रा निकाली थी, जो झबरेड़ा से शुरू होकर हरिद्वार तक सिमट गई। कांग्रेस हाईकमान के लोग ही एक दूसरे के खिलाफ जंग लड़ रहे, जो पार्टी को जिताने के बजाय अपनी राजनीति साधने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राज्य में विपक्ष तक की भूमिका नहीं निभाई। मजदूर, किसान, शिक्षा, बेरोजगारी पर काई काम नहीं किया। इसके चलते निराश होकर पार्टी छोड़नी पड़ रही है। इस दौरान उन्होंने बैठक में मौजूद वर्तमान और पूर्व प्रधानों के अलावा कई अन्य जनप्रतिनिधियों समेत 45 लोगों ने हाथ खड़े कर कांग्रेस छोड़ने का ऐलान किया।
चढ़ा राजनीतिक पारा, शुरू हुआ जोड़तोड़ का गठजोड़
लोकसभा चुनाव के लिए टिकट फाइनल होने से पहले ही क्षेत्र की राजनीति का पारा चढ़ने लगा है। भीतरखाने जोड़तोड़ के जरिये गठजोड़ की राजनीति भी चरम पर पहुंचने लगी है। फिलहाल इसकी शुरुआत कांग्रेस से हुई है। राजनीतिक सूत्रों की माने तो जल्द ही अन्य पार्टियों में भी इसी तरह की उठापठक हो सकती है। जहां एक ओर भाजपा में टिकट को लेकर अंदरूनी राजनीति बढ़ गई है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस में भी उठापठक शुरू हो गई है। ऐसे में लोकसभा चुनाव के दिलचस्प होने के आसार नजर आने लगे हैं।
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गौरतलब है कि राजनीतिक करियर की शुरुआत करते हुए चौधरी यशवीर सिंह 1995 में पहली बार नगर पंचायत चेयरमैन निर्वाचित हुए थे। राज्य गठन के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में इकबालपुर सीट से बसपा के विधायक चुने गए। इसके बाद 2007 में फिर से बसपा के विधायक चुने गए। इसके अलावा यशवीर सिंह उत्तराखंड विधानसभा की लोक लेखा समिति एवं विधानसभा की आश्वासन समिति के अध्यक्ष भी रहे हैं, लेकिन 2009 में लोकसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी से मतभेदों के चलते उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और पूर्व सीएम हरीश रावत के कहने पर कांग्रेस में शामिल हो गए। हाल ही में संपन्न हुए नगर पंचायत चुनाव में उनके बेटे गौरव चौधरी को शिकस्त मिली। माना जा रहा है कि इसी दौरान कांग्रेस की गुटबाजी के चलते चौधरी परिवार के कांग्रेस से मतभेद शुरू हो गए थे। सोमवार को दिल्ली-हरिद्वार रोड स्थिति आवास पर पत्रकार वार्ता करते हुए पूर्व विधायक चौधरी यशवीर सिंह और उनके बेटे गौरव चौधरी ने कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस में अनुशासनहीनता चरम पर है। पूर्व सीएम हरीश रावत ने गंगा गन्ना यात्रा निकाली थी, जो झबरेड़ा से शुरू होकर हरिद्वार तक सिमट गई। कांग्रेस हाईकमान के लोग ही एक दूसरे के खिलाफ जंग लड़ रहे, जो पार्टी को जिताने के बजाय अपनी राजनीति साधने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राज्य में विपक्ष तक की भूमिका नहीं निभाई। मजदूर, किसान, शिक्षा, बेरोजगारी पर काई काम नहीं किया। इसके चलते निराश होकर पार्टी छोड़नी पड़ रही है। इस दौरान उन्होंने बैठक में मौजूद वर्तमान और पूर्व प्रधानों के अलावा कई अन्य जनप्रतिनिधियों समेत 45 लोगों ने हाथ खड़े कर कांग्रेस छोड़ने का ऐलान किया।
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चढ़ा राजनीतिक पारा, शुरू हुआ जोड़तोड़ का गठजोड़
लोकसभा चुनाव के लिए टिकट फाइनल होने से पहले ही क्षेत्र की राजनीति का पारा चढ़ने लगा है। भीतरखाने जोड़तोड़ के जरिये गठजोड़ की राजनीति भी चरम पर पहुंचने लगी है। फिलहाल इसकी शुरुआत कांग्रेस से हुई है। राजनीतिक सूत्रों की माने तो जल्द ही अन्य पार्टियों में भी इसी तरह की उठापठक हो सकती है। जहां एक ओर भाजपा में टिकट को लेकर अंदरूनी राजनीति बढ़ गई है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस में भी उठापठक शुरू हो गई है। ऐसे में लोकसभा चुनाव के दिलचस्प होने के आसार नजर आने लगे हैं।
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