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लापरवाही विभाग की, झेलेगे शिक्षक
Updated Sat, 13 Jan 2018 12:21 AM IST
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रुड़की। शिक्षा विभाग की ओर से डीएलएड के स्टडी सेंटर आवंटित में लापरवाही बरती गई है। शिक्षकों को नजदीक का स्टडी सेंटर न देकर दूरदराज का सेंटर दिया गया है। इससे शिक्षक परेशान तो हैं ही विभाग के खिलाफ रोष भी है। विभागीय अधिकारी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान के अधिकारियों से वार्ता कर राहत दिलाने का दावा कर रहे हैं।
पिछले दिनों राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने प्रदेश में बीटीसी के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों को अप्रशिक्षित मानकर दो साल का डीएलएड और ब्रिज कोर्स अनिवार्य किया था। इसके साथ ही निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी डीएलए करना अनिवार्य किया गया था। डीएलएड और ब्रिज कोर्स कराने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान (एनआईओएस) को दी गई थी। जिलेभर से करीब सात हजार शिक्षकों ने एनआईओएस के वेबसाइट पर डीएलएड के लिए आवेदन किए हैं। जिसके चलते एनआईओएस ने इन शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के लिए 69 स्टडी सेंटर खोले गए हैं। इनका संचालन भी एक जनवरी से कर दिया गया है। एनआईओएस के अधिकारियों ने सेंटरों के आधार पर शिक्षकों की सूची विभाग से मांगी थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते कुछ शिक्षकों की गलत सूची दी गई है। इसमें शिक्षक को नजदीक का स्टडी सेंटर न देकर दूरदराज का सेंटर दे दिया गया है। जिसके चलते कई शिक्षक परेशान हैं। माना जा रहा है कि सभी रिकार्ड एनआईओएस की वेबसाइट पर अपलोड होने के कारण सुधार की अब कोई संभावना नहीं है। ऐसे में डीएलएड प्रशिक्षुओं को दो साल तक परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इससे शिक्षकों में विभाग के प्रति रोष है। इस संबंध में मुख्य शिक्षा अधिकारी रुपेंद्र दत्त शर्मा ने बताया कि इस प्रकार की शिकायतें मिल रही हैं। जिसके चलते डीओ बेसिक और एनआईओएस के अधिकारियों से वार्ता की जा रही है। संभव हुआ तो शिक्षकों के सेंटर बदलवा कर राहत दी जाएगी।
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पिछले दिनों राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने प्रदेश में बीटीसी के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों को अप्रशिक्षित मानकर दो साल का डीएलएड और ब्रिज कोर्स अनिवार्य किया था। इसके साथ ही निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी डीएलए करना अनिवार्य किया गया था। डीएलएड और ब्रिज कोर्स कराने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान (एनआईओएस) को दी गई थी। जिलेभर से करीब सात हजार शिक्षकों ने एनआईओएस के वेबसाइट पर डीएलएड के लिए आवेदन किए हैं। जिसके चलते एनआईओएस ने इन शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के लिए 69 स्टडी सेंटर खोले गए हैं। इनका संचालन भी एक जनवरी से कर दिया गया है। एनआईओएस के अधिकारियों ने सेंटरों के आधार पर शिक्षकों की सूची विभाग से मांगी थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते कुछ शिक्षकों की गलत सूची दी गई है। इसमें शिक्षक को नजदीक का स्टडी सेंटर न देकर दूरदराज का सेंटर दे दिया गया है। जिसके चलते कई शिक्षक परेशान हैं। माना जा रहा है कि सभी रिकार्ड एनआईओएस की वेबसाइट पर अपलोड होने के कारण सुधार की अब कोई संभावना नहीं है। ऐसे में डीएलएड प्रशिक्षुओं को दो साल तक परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इससे शिक्षकों में विभाग के प्रति रोष है। इस संबंध में मुख्य शिक्षा अधिकारी रुपेंद्र दत्त शर्मा ने बताया कि इस प्रकार की शिकायतें मिल रही हैं। जिसके चलते डीओ बेसिक और एनआईओएस के अधिकारियों से वार्ता की जा रही है। संभव हुआ तो शिक्षकों के सेंटर बदलवा कर राहत दी जाएगी।
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