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लोकतंत्र के यज्ञ में वोट की आहुति ना देने वाले लोगों को है मलाल
Updated Thu, 22 Nov 2018 12:45 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, खानपुर
नगर निकाय के चुनाव में लोगों ने मतदान करने का अलग ही उत्साह दिखाई दिया। मतदाताओं में वोट डालने को लेकर बेताबी इसी बात से दिख रही थी कि वे सुबह आठ बजे से पहले ही लाइनों में लग गए थे। इन्हीं मतदाताओं के बीच कुछ ऐसे भी चेहरे हैं जिनमें वोट करने का उत्साह तो पूरा था, लेकिन सिस्टम की लापरवाही के चलते लोकतंत्र के यज्ञ में अपने वोट की आहुति देने से रह गए हैं। अब उन्हें अपना मतदान न करने का मलाल रह गया। पांच वर्ष में एक बार मौका आता है कि जनप्रतिनिधियों से पूछे कि आप हमारे शहर का विकास कैसे कराएंगे। मौका मिलता है कि जनता अपनी कसौटी पर खरा उतरने वाले प्रत्याशी को सत्ता में बैठाए, लेकिन प्रशासन की लापरवाही के चलते अनेक मतदाताओं ने पांच साल के लिए अपना ये अधिकार भी खो दिया।
केस-एक
खानपुर ब्लॉक के मोहम्मदपुर गांव निवासी जयवीर सरकारी अध्यापक हैं, वर्ष 2006 में वह गांव से लक्सर में आकर बस गए थे। पहले जब दो बार लक्सर में चुनाव हुए थे तो उनकी ड्यूटी चुनाव में अन्य जगह लगी थी, जिसके चलते वह मतदान कर नहीं पाए थे। इस बार ड्यूटी न लगने पर मन में खुशी थी कि मैं अपने शहर की दिशा व दशा बदलने के लिए मतदान करूंगा, लेकिन जब मतदान केंद्र पहुंचा तो वोटर लिस्ट से नाम ही गायब मिला। जब परिवार के अन्य सदस्यों का नाम पता किया तो उनकी माता शिमला देवी, पत्नी बबीता रानी, भाई राजवीर सिंह, भाभी कौशल देवी का नाम भी वोटर लिस्ट में नहीं मिला। वोट न देने का मलाल अगले पांच साल तक रहेगा। उनका कहना कि वे अपने पैतृक गांव से भी अपनी वोट पहले ही कटवा चुके हैं।
केस-दो
माजरी गांव निवासी सुभाष चौधरी 10 वर्ष पहले गांव से लक्सर में आकर बस गए थे। उन्होंने बताया कि लक्सर में दो बार चुनाव में उन्होंने परिवार सहित मतदान किया, लेकिन इस बार वोटर लिस्ट से उनके परिवार के पांच सदस्यों का नाम गायब मिला। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में उनकी पत्नी मुकेश देवी, बेटा गौरव चौधरी, पुत्रवधू आकांक्षा, बेटा सौरभ है। उनका कहना है कि मतदान न करने की टीस रहेगी। उन्होंने वोट न डाल पाने का जिम्मेदार प्रशासन की लापरवाही को ठहराया।
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नगर निकाय के चुनाव में लोगों ने मतदान करने का अलग ही उत्साह दिखाई दिया। मतदाताओं में वोट डालने को लेकर बेताबी इसी बात से दिख रही थी कि वे सुबह आठ बजे से पहले ही लाइनों में लग गए थे। इन्हीं मतदाताओं के बीच कुछ ऐसे भी चेहरे हैं जिनमें वोट करने का उत्साह तो पूरा था, लेकिन सिस्टम की लापरवाही के चलते लोकतंत्र के यज्ञ में अपने वोट की आहुति देने से रह गए हैं। अब उन्हें अपना मतदान न करने का मलाल रह गया। पांच वर्ष में एक बार मौका आता है कि जनप्रतिनिधियों से पूछे कि आप हमारे शहर का विकास कैसे कराएंगे। मौका मिलता है कि जनता अपनी कसौटी पर खरा उतरने वाले प्रत्याशी को सत्ता में बैठाए, लेकिन प्रशासन की लापरवाही के चलते अनेक मतदाताओं ने पांच साल के लिए अपना ये अधिकार भी खो दिया।
केस-एक
खानपुर ब्लॉक के मोहम्मदपुर गांव निवासी जयवीर सरकारी अध्यापक हैं, वर्ष 2006 में वह गांव से लक्सर में आकर बस गए थे। पहले जब दो बार लक्सर में चुनाव हुए थे तो उनकी ड्यूटी चुनाव में अन्य जगह लगी थी, जिसके चलते वह मतदान कर नहीं पाए थे। इस बार ड्यूटी न लगने पर मन में खुशी थी कि मैं अपने शहर की दिशा व दशा बदलने के लिए मतदान करूंगा, लेकिन जब मतदान केंद्र पहुंचा तो वोटर लिस्ट से नाम ही गायब मिला। जब परिवार के अन्य सदस्यों का नाम पता किया तो उनकी माता शिमला देवी, पत्नी बबीता रानी, भाई राजवीर सिंह, भाभी कौशल देवी का नाम भी वोटर लिस्ट में नहीं मिला। वोट न देने का मलाल अगले पांच साल तक रहेगा। उनका कहना कि वे अपने पैतृक गांव से भी अपनी वोट पहले ही कटवा चुके हैं।
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केस-दो
माजरी गांव निवासी सुभाष चौधरी 10 वर्ष पहले गांव से लक्सर में आकर बस गए थे। उन्होंने बताया कि लक्सर में दो बार चुनाव में उन्होंने परिवार सहित मतदान किया, लेकिन इस बार वोटर लिस्ट से उनके परिवार के पांच सदस्यों का नाम गायब मिला। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में उनकी पत्नी मुकेश देवी, बेटा गौरव चौधरी, पुत्रवधू आकांक्षा, बेटा सौरभ है। उनका कहना है कि मतदान न करने की टीस रहेगी। उन्होंने वोट न डाल पाने का जिम्मेदार प्रशासन की लापरवाही को ठहराया।
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