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Roorkee News: रिकॉर्ड में 480 छात्र लेकिन कक्षाओं में कम
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राजकीय प्राथमिक विद्यालय महमूदपुर में छात्रों की उपस्थिति विद्यालय के रिकॉर्ड में भले ही 480 छात्रों का नामांकन दर्ज हो लेकिन हकीकत में रोजाना इतने बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। कक्षाओं में सीटें खाली रह जा रही हैं।
जानकारी के अनुसार कई छात्र अनियमित रूप से विद्यालय आते हैं जबकि कुछ बच्चे लंबे समय से स्कूल से दूर हैंं। कहा कि इसके पीछे कई कारण हैं जिनमें अभिभावकों की लापरवाही, बच्चों का घरेलू कार्यों में लगना और शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी बताई गई है। लोगों का कहना है कि सरकार की ओर से नामांकन बढ़ाने पर जोर दिया जाता है लेकिन बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
यही वजह है कि कागजों में तो संख्या पूरी दिखाई देती है लेकिन कक्षाओं में बच्चों की संख्या कम रहती है। कहा कि शिक्षा विभाग के लिए यह स्थिति चुनौती बनती जा रही है। हालात यह है कि कुछ स्कूलों में छात्रों की संख्या घटने से वह स्कूल बंद तक हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसका सीधा असर शिक्षा के स्तर पर पड़ेगा। कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से विशेष अभियान चलाया जाए ताकि शिक्षा का वास्तविक लाभ बच्चों तक पहुंच सके।
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जानकारी के अनुसार कई छात्र अनियमित रूप से विद्यालय आते हैं जबकि कुछ बच्चे लंबे समय से स्कूल से दूर हैंं। कहा कि इसके पीछे कई कारण हैं जिनमें अभिभावकों की लापरवाही, बच्चों का घरेलू कार्यों में लगना और शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी बताई गई है। लोगों का कहना है कि सरकार की ओर से नामांकन बढ़ाने पर जोर दिया जाता है लेकिन बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
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यही वजह है कि कागजों में तो संख्या पूरी दिखाई देती है लेकिन कक्षाओं में बच्चों की संख्या कम रहती है। कहा कि शिक्षा विभाग के लिए यह स्थिति चुनौती बनती जा रही है। हालात यह है कि कुछ स्कूलों में छात्रों की संख्या घटने से वह स्कूल बंद तक हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसका सीधा असर शिक्षा के स्तर पर पड़ेगा। कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से विशेष अभियान चलाया जाए ताकि शिक्षा का वास्तविक लाभ बच्चों तक पहुंच सके।
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