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भवन निर्माण में बांस के उपयोग पर अनुसंधान एवं प्रचार आवश्यक: सौरभ एंडले
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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
सीबीआरआई रुड़की में उत्तर पूर्वी क्षेत्र में भवन निर्माण सामग्री के रूप में बांस के उपयोग पर मुख्य अतिथि और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली के संयुक्त सचिव सौरभ एंडले ने दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि बांस अपने आप में एक पुनर्नवीनीकरण अनुकूल सामग्री है। इससे उत्पन्न अपशिष्ट को भी जैव ईंधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने का अनुसंधान कार्य प्रगति पर हैं। क्योंकि बांस उत्तर-पूर्वी क्षेत्र का प्राकृतिक उत्पाद है। इस क्षेत्र में बांस का निर्माण सामग्री के रूप में प्रयोग बहुत ही किफायती होगा।
संस्थान के निदेशक डॉ. एन गोपालकृष्णन ने सीएसआईआर और सीबीआरआई की ओर से बांस को भवन निर्माण में उपयोग करने की दिशा में किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी। संस्थान शीघ्र ही बांस सामग्रियों की जांच के लिए एक परीक्षण सुविधा का निर्माण करेगी तथा बांस के भवन निर्माण सामग्री के रूप में उपयोग के लिए कुछ मानक नियम भी स्थापित करेगी। संस्थान की त्रैमासिक द्विभाषी पत्रिका भवनिका के नवीनतम अंक का विमोचन किया गया। संचालन वैज्ञानिक डॉ. आर धर्मराजु ने किया। तकनीक सत्र में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अजय चौरसिया, एसके नेगी, आशीष पिप्पल, नीलम मंजुनाथ डॉ. आरएन पांडेय, डॉ. सुवीर सिंह, उत्तराखंड बांस और फाइबर विकास बोर्ड में राष्ट्रीय बांस मिशन देहरादून के कार्यक्रम प्रबंधक दिनेश जोशी ने व्याख्यान प्रस्तुत किए।
16 राज्यों से लगभग 60 प्रतिभागी हुए शामिल
कार्यक्रम में उत्तराखंड समेत उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, दिल्ली, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, गुजरात, केरल, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, हरियाणा, असम, ओडिशा आदि 16 राज्यों से लगभग 60 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
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सीबीआरआई रुड़की में उत्तर पूर्वी क्षेत्र में भवन निर्माण सामग्री के रूप में बांस के उपयोग पर मुख्य अतिथि और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली के संयुक्त सचिव सौरभ एंडले ने दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि बांस अपने आप में एक पुनर्नवीनीकरण अनुकूल सामग्री है। इससे उत्पन्न अपशिष्ट को भी जैव ईंधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने का अनुसंधान कार्य प्रगति पर हैं। क्योंकि बांस उत्तर-पूर्वी क्षेत्र का प्राकृतिक उत्पाद है। इस क्षेत्र में बांस का निर्माण सामग्री के रूप में प्रयोग बहुत ही किफायती होगा।
संस्थान के निदेशक डॉ. एन गोपालकृष्णन ने सीएसआईआर और सीबीआरआई की ओर से बांस को भवन निर्माण में उपयोग करने की दिशा में किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी। संस्थान शीघ्र ही बांस सामग्रियों की जांच के लिए एक परीक्षण सुविधा का निर्माण करेगी तथा बांस के भवन निर्माण सामग्री के रूप में उपयोग के लिए कुछ मानक नियम भी स्थापित करेगी। संस्थान की त्रैमासिक द्विभाषी पत्रिका भवनिका के नवीनतम अंक का विमोचन किया गया। संचालन वैज्ञानिक डॉ. आर धर्मराजु ने किया। तकनीक सत्र में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अजय चौरसिया, एसके नेगी, आशीष पिप्पल, नीलम मंजुनाथ डॉ. आरएन पांडेय, डॉ. सुवीर सिंह, उत्तराखंड बांस और फाइबर विकास बोर्ड में राष्ट्रीय बांस मिशन देहरादून के कार्यक्रम प्रबंधक दिनेश जोशी ने व्याख्यान प्रस्तुत किए।
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16 राज्यों से लगभग 60 प्रतिभागी हुए शामिल
कार्यक्रम में उत्तराखंड समेत उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, दिल्ली, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, गुजरात, केरल, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, हरियाणा, असम, ओडिशा आदि 16 राज्यों से लगभग 60 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
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