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दो माह बाद भी साफ्ट लोन की राह देख रहे किसान
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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की। जिले के किसान घोषणा के दो माह बाद भी साफ्ट लोन की राह देख रहे हैं। वहीं साफ्ट लोन मिलने के इंतजार में शुगर मिल भी भुगतान करने से हाथ पीछे खींच रहे हैं। इसके चलते किसानों का करीब 190 करोड़ रुपया फंसा हुआ है। इससे किसानों में रोष है। वहीं बताया जा रहा है कि शुगर मिलों और बैंकों के बीच साफ्ट लोन के एवज में संपत्ति गिरवी रखने को लेकर अड़ंगा लगा हुआ है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आठ जनवरी को झबरेड़ा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए घोषणा की थी कि किसानों को विगत सत्र का भुगतान एक साथ कराया जाएगा। ज्ञात हो कि तीनों शुगर मिलों पर विगत सत्र का किसानों का करीब 190 करोड़ का बकाया है। इसके लिए सरकार ने साफ्ट लोन का शासनादेश जारी किया है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद किसानों ने राहत की सांस ली थी कि अब एक मुश्त पुराना भुगतान हो जाएगा। इसके बाद स्थानीय अधिकारियों के पास करीब 150 करोड़ के साफ्ट लोन का शासनादेश पहुंचा। शासनादेश के बाद गन्ना विभाग के अधिकारियों ने लक्सर और लिब्बरहेड़ी को 33-33 करोड़ व इकबालपुर शुगर मिल को 86 करोड़ के साफ्ट लोन आवंटित किया था। इसके बाद शुगर मिलों ने साफ्ट लोन के लिए बैंकों में आवेदन किया था, लेकिन आज तक बैंकों से साफ्ट लोन के तहत कर्ज नहीं दिया गया है। इस प्रक्रिया को दो माह से अधिक का समय गुजर गया है। इससे किसानों का इंतजार लंबा होता जा रहा है। बताया जा रहा है कि बैंकों और शुगर मिलों के अधिकारियों के बीच में लगातार मीटिंग हो रही है, लेकिन साफ्ट लोन का अड़ंगा संपत्ति गिरवी रखने पर आकर लटक जाता है। क्योंकि बैंक बिना गारंटी के कर्ज देना नहीं चाहते हैं। सहायक गन्ना आयुक्त शैलेंद्र सिंह ने बताया कि साफ्ट लोन को लेकर प्रयास चल रहे हैं।
सरकार के साथ-साथ विभाग भी किसानों की परेशानियां नहीं समझ रहा है। मुख्यमंत्री की घोषणा के दो माह बाद भी किसानों को भुगतान नहीं मिला है। जो चिंता का विषय है।
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-- राकेश अग्रवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान-मजदूर संगठन सोसाइटी
प्रदेश सरकार जुमलेबाजी कर रही है। चुनाव को देखते हुए घोषणा पर घोषणा की जा रही है, लेकिन घोषणा पर अमल नहीं हो रहा है। जिस कारण किसान से लेकर हर वर्ग परेशानियों से घिरा है।
-- विजय शास्त्री, जिलाध्यक्ष, भाकियू टिकैत
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आठ जनवरी को झबरेड़ा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए घोषणा की थी कि किसानों को विगत सत्र का भुगतान एक साथ कराया जाएगा। ज्ञात हो कि तीनों शुगर मिलों पर विगत सत्र का किसानों का करीब 190 करोड़ का बकाया है। इसके लिए सरकार ने साफ्ट लोन का शासनादेश जारी किया है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद किसानों ने राहत की सांस ली थी कि अब एक मुश्त पुराना भुगतान हो जाएगा। इसके बाद स्थानीय अधिकारियों के पास करीब 150 करोड़ के साफ्ट लोन का शासनादेश पहुंचा। शासनादेश के बाद गन्ना विभाग के अधिकारियों ने लक्सर और लिब्बरहेड़ी को 33-33 करोड़ व इकबालपुर शुगर मिल को 86 करोड़ के साफ्ट लोन आवंटित किया था। इसके बाद शुगर मिलों ने साफ्ट लोन के लिए बैंकों में आवेदन किया था, लेकिन आज तक बैंकों से साफ्ट लोन के तहत कर्ज नहीं दिया गया है। इस प्रक्रिया को दो माह से अधिक का समय गुजर गया है। इससे किसानों का इंतजार लंबा होता जा रहा है। बताया जा रहा है कि बैंकों और शुगर मिलों के अधिकारियों के बीच में लगातार मीटिंग हो रही है, लेकिन साफ्ट लोन का अड़ंगा संपत्ति गिरवी रखने पर आकर लटक जाता है। क्योंकि बैंक बिना गारंटी के कर्ज देना नहीं चाहते हैं। सहायक गन्ना आयुक्त शैलेंद्र सिंह ने बताया कि साफ्ट लोन को लेकर प्रयास चल रहे हैं।
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सरकार के साथ-साथ विभाग भी किसानों की परेशानियां नहीं समझ रहा है। मुख्यमंत्री की घोषणा के दो माह बाद भी किसानों को भुगतान नहीं मिला है। जो चिंता का विषय है।
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-- राकेश अग्रवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान-मजदूर संगठन सोसाइटी
प्रदेश सरकार जुमलेबाजी कर रही है। चुनाव को देखते हुए घोषणा पर घोषणा की जा रही है, लेकिन घोषणा पर अमल नहीं हो रहा है। जिस कारण किसान से लेकर हर वर्ग परेशानियों से घिरा है।
-- विजय शास्त्री, जिलाध्यक्ष, भाकियू टिकैत