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मुरीदों के बिस्तरों की धुनों पर किया लंगर तकसीम

Sat, 17 Nov 2018 12:32 AM IST
Updated Sat, 17 Nov 2018 12:32 AM IST
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मुरीदों के बिस्तरों की धुनों पर किया लंगर तकसीम
ब्यूरो/अमर उजाला, पिरान कलियर
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साबिर पाक के सालाना उर्स में इस्लामी कैलेंडर की पहली तारीख को लंगर में इजाफा हो जाता है। सात रबीउल अव्वल शुक्रवार को सूफिया ए किराम और उनके मुरीदीन के बिस्तरों पर लंगर बांटा गया। यह बड़े लंगर के रूप में जाना जाता है।
साबिर पाक के लंगर खाने से सज्जादा नशीन शाह मन्सूर एजाज साबरी और शाह अली मंजर एजाज साबरी की सरपरस्ती में शुक्रवार को शाह सुहैल ने खादिम मोज्जन अब्दुस्लाम और फकीरों उज्जाम को साथ लेकर सूफिया-ए-किराम और उनके मुरीदों के बिस्तरों की धुनों पर तकसीम (बांटा) किया गया। ये लंगर बांटने का सिलसिला 12 रबीउल अव्वल तक चलेगा। उर्स के दौरान 12 रबीउल अव्वल को सिर्फ एक वक्त दोपहर को लंगर बांटा जाता है। 12 रबीउल अव्वल को शाम को बंटने वाला लंगर मस्त लंगर कहलाता है। पंजाब से आने वाले जायरीन भी उर्स में अपने डेरों पर लंगर बांटते हैं।
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लंगर इंचार्ज राव शारिक ने बताया कि उर्स की मुख्य रस्मों के दौरान करीब ढाई से तीन क्विंटल दाल और 25 से 30 क्विंटल आटा प्रतिदिन लगता है। इस मौके पर शाह सुहैल, शाह कासिफ, एजाज, खादिम, शाह यावर अली, शाह गाजी, डॉक्टर ईनाम साबिर आदि मौजूद रहे।
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बाबाओं ने लंगर खाने से किया इनकार, दिया धरना
पिरान कलियर। कस्बे में लंगर तकसीम के दौरान दरगाह के आसपास चारो अखाड़ों के बाबाओें ने लंगर का खाना लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद सभी मस्त मलंग बाबाओें ने दरगाह कार्यालय पर धरने पर बैठ गए और दरगाह प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

बानवा चौक के सरपरस्त सरवर बाबा ने बताया की कुछ समय पूर्व दरगाह प्रशासन लंगर का खाना बांटने पर प्रतिबंध लगा दिया था। लंगर खाने में बैठकर खाना खिलाने की व्यवस्था की गई। लेकिन दरगाह प्रशासन ने चारों अखाड़ों जलाली चौक, बानवा चौक, रफाई चौक, मदार चौक पर मौजूद मलंगों का भी खाना बंदकर दिया था। कहा कि दरगाह प्रशासन के इसी गलत फैसले के विरोध में लंगर का खाना नही लेंगे। उनका कहना है कि दरगाह प्रशसन सभी अखाड़ों को आश्वासन दे कि उर्स के बाद भी चारो अखाड़ों को खाना बदस्तूर मिलेगा। इस दौरान मासूम अली, इकबाल बाबा, रेहम अली, वसीम साईं, मुहर्रम अली, शेर अली, खेर अली, गुलशेर मोहम्मद आदि मौजूद रहे।
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