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सीईओ ने रोका जिले के सभी उप शिक्षाधिकारियों का वेतन
Updated Wed, 31 Oct 2018 12:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
मुख्य शिक्षाधिकारी ने जिले के सभी छह उप शिक्षाधिकारियों के अक्तूबर के वेतन पर रोक लगा दी है। साथ ही स्पष्ट का दिया है कि उप शिक्षाधिकारियों को अगले आदेशों तक वेतन जारी नहीं किया जाएगा। मुख्य शिक्षाधिकारी ने ये कार्रवाई उप शिक्षाधिकारियों को किताबों के नाम से दिए गए 88 लाख रुपये का पूरा हिसाब नहीं दिए जाने पर की है। जबकि किताबों का पूरा हिसाब दिए जाने को लेकर मुख्य शिक्षाधिकारी की ओर से पत्र भी भेजे गए।
इस वर्ष शिक्षा विभाग ने डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) योजना लागू की थी। इस योजना के तहत किताबों आदि का पैसा सीधा बच्चों के खातों में भेजा जाना था। वैसे तो बच्चों के खाते खुलवाने को लेकर लंबे समय से जद्दोजहद चल रही है, लेकिन अभी तक सभी बच्चों के खाते नहीं खुल पाए हैं। इसी बीच विभाग की ओर से किताबों का पैसा जिले को जारी कर दिया गया था। इसपर मुख्य शिक्षा अधिकारी ने 88 लाख रुपये जिले के सभी उप शिक्षाधिकारियों को जारी कर दिए थेे। साथ ही उन्हें किताबों का पैसा बच्चों के खाते में ट्रांसफर करने के निर्देश जारी किए थे। मगर अधिकतर बच्चों के खाते न खुलने के कारण यह पैसा उन तक नहीं पहुंचा पाया। इसी बीच मुख्य शिक्षा अधिकारी ने सभी उप शिक्षाधिकारियों से किताबों के पैसे का हिसाब मांगा। उस दौरान उप शिक्षाधिकारियों ने विभाग को आधी-अधूरी सूचना भेज दी। अधूरी जानकारी मिलने पर मुख्य शिक्षाधिकारी रुपेंद्र दत्त शर्मा ने दोबारा पत्र भेजकर उनसे 88 लाख रुपये का हिसाब मांगा। इस बार भी पूरी जानकारी नहीं मिलने पर मुख्य शिक्षाधिकारी ने सभी छह उपशिक्षा अधिकारियों के अक्तूबर के वेतन पर रोक लगा दी है। साथ ही अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अगले आदेशों तक वेतन जारी नहीं किया जाए। अब ऐसे में जहां एक ओर उप शिक्षाधिकारियों का हिसाब देना भारी पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर ये भी चिंता सताने लगी है कि दीपावली का त्योहार बिना वेतन कैसे मनेगा।
सभी उप शिक्षाधिकारियों को बच्चों को दी जाने वाली किताबों के लिए करीब 88 लाख रुपये भेजे थे। इसके बाद बच्चों के खातों में पैसा भेजने को लेकर उनसे सूचना मांगी गई थी, लेकिन उप शिक्षाधिकारियों ने इसकी आधी-अधूरी जानकारी दी गई। इसके चलते सभी उप शिक्षाधिकारियों के अक्तूबर के वेतन पर अगले आदेशों तक रोक लगाई है।
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- रुपेंद्र दत्त शर्मा, मुख्य शिक्षाधिकारी, हरिद्वार
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मुख्य शिक्षाधिकारी ने जिले के सभी छह उप शिक्षाधिकारियों के अक्तूबर के वेतन पर रोक लगा दी है। साथ ही स्पष्ट का दिया है कि उप शिक्षाधिकारियों को अगले आदेशों तक वेतन जारी नहीं किया जाएगा। मुख्य शिक्षाधिकारी ने ये कार्रवाई उप शिक्षाधिकारियों को किताबों के नाम से दिए गए 88 लाख रुपये का पूरा हिसाब नहीं दिए जाने पर की है। जबकि किताबों का पूरा हिसाब दिए जाने को लेकर मुख्य शिक्षाधिकारी की ओर से पत्र भी भेजे गए।
इस वर्ष शिक्षा विभाग ने डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) योजना लागू की थी। इस योजना के तहत किताबों आदि का पैसा सीधा बच्चों के खातों में भेजा जाना था। वैसे तो बच्चों के खाते खुलवाने को लेकर लंबे समय से जद्दोजहद चल रही है, लेकिन अभी तक सभी बच्चों के खाते नहीं खुल पाए हैं। इसी बीच विभाग की ओर से किताबों का पैसा जिले को जारी कर दिया गया था। इसपर मुख्य शिक्षा अधिकारी ने 88 लाख रुपये जिले के सभी उप शिक्षाधिकारियों को जारी कर दिए थेे। साथ ही उन्हें किताबों का पैसा बच्चों के खाते में ट्रांसफर करने के निर्देश जारी किए थे। मगर अधिकतर बच्चों के खाते न खुलने के कारण यह पैसा उन तक नहीं पहुंचा पाया। इसी बीच मुख्य शिक्षा अधिकारी ने सभी उप शिक्षाधिकारियों से किताबों के पैसे का हिसाब मांगा। उस दौरान उप शिक्षाधिकारियों ने विभाग को आधी-अधूरी सूचना भेज दी। अधूरी जानकारी मिलने पर मुख्य शिक्षाधिकारी रुपेंद्र दत्त शर्मा ने दोबारा पत्र भेजकर उनसे 88 लाख रुपये का हिसाब मांगा। इस बार भी पूरी जानकारी नहीं मिलने पर मुख्य शिक्षाधिकारी ने सभी छह उपशिक्षा अधिकारियों के अक्तूबर के वेतन पर रोक लगा दी है। साथ ही अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अगले आदेशों तक वेतन जारी नहीं किया जाए। अब ऐसे में जहां एक ओर उप शिक्षाधिकारियों का हिसाब देना भारी पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर ये भी चिंता सताने लगी है कि दीपावली का त्योहार बिना वेतन कैसे मनेगा।
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सभी उप शिक्षाधिकारियों को बच्चों को दी जाने वाली किताबों के लिए करीब 88 लाख रुपये भेजे थे। इसके बाद बच्चों के खातों में पैसा भेजने को लेकर उनसे सूचना मांगी गई थी, लेकिन उप शिक्षाधिकारियों ने इसकी आधी-अधूरी जानकारी दी गई। इसके चलते सभी उप शिक्षाधिकारियों के अक्तूबर के वेतन पर अगले आदेशों तक रोक लगाई है।
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- रुपेंद्र दत्त शर्मा, मुख्य शिक्षाधिकारी, हरिद्वार