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अब हाईवे किनारे जमीन खरीदना होगा और भी महंगा
Updated Sat, 13 Jan 2018 12:17 AM IST
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रुड़की। अब हाईवे किनारे कृषि भूमि को खरीदना महंगा हो जाएगा। कैबिनेट की बैठक में रुड़की व आसपास के क्षेत्रों में सर्किल रेट बढ़ाए जाने की संस्तुति कर दी गई है। एडीएम ललित नारायण मिश्रा की ओर से इसकी पुष्टि की गई है। सूत्रों के अनुसार मुख्य मार्गों के किनारे 200 मीटर तक कृषि भूमि की खरीद पर स्टांप शुल्क 200 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा। हालांकि कैबिनेट के आदेश को रुड़की रजिस्ट्रार कार्यालय में अमल में लाए जाने में अभी 15 दिन का समय लग सकता है। वहीं शहर में कुछ कालोनियों में भी सर्किल रेट में 30 प्रतिशत तक के इजाफे की संभावना जताई जा रही है।
अभी तक रुड़की क्षेत्र में दिल्ली-हरिद्वार हाईवे, दिल्ली देहरादून हाईवे, रुड़की लक्सर मार्ग के किनारे लाखों करोड़ों की बेशकीमती भूमि की खरीदारी पर कृषि भूमि के हिसाब से ही स्टांप शुल्क लिया जा रहा था। लेकिन जिला प्रशासन की ओर से इस बात की तस्दीक की जा रही थी कि लोग मुख्य मार्गों के किनारे कृषि भूमि खरीदने के बाद इसका व्यवसायिक स्तर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में कृषि भूमि को संरक्षण नहीं मिल रहा था। साथ ही व्यवसायिक भवनों की तरह सरकार को राजस्व भी नहीं मिल रहा था। बताया गया है कि पिछले दिनों जिला प्रशासन की ओर से शासन को भेजी रिपोर्ट में भी यह जानकारी दी गई थी कि मुख्य मार्गों के किनारे जिस तरह से कृषि भूमि को व्यवसायिक रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उस हिसाब से सरकार को राजस्व नहीं मिल पा रहा है। इन्हीं रिपोर्ट के आधार पर शुक्रवार को कैबिनेट की ओर से रुड़की और आसपास के क्षेत्रों में कृषि भूमि के सर्किल रेट में बढ़ोत्तरी पर मुहर लगा दी गई है। बताया जा रहा है कि मुख्य मार्गों से 200 मीटर दूरी तक जमीनों के सर्किल रेट में दोगुने से ज्यादा का इजाफा हो सकता है।
हरिद्वार में पहले से ही थे आठ गुना ज्यादा सर्किल रेट
रुड़की रजिस्ट्रार कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार दिल्ली हरिद्वार हाईवे पर रुड़की क्षेत्र में आने वाले शांतरशाह में प्रति हेक्टेयर सर्किल रेट 60 लाख रुपये थे। जबकि हरिद्वार क्षेत्र शुरू होते ही हाईवे किनारे की जमीनों का सर्किल 500 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है। ऐसे में हरिद्वार की तुलना में रुड़की क्षेत्र में सर्किल रेट बढ़ाए जाने की कवायद काफी पहले से चल रही थी।
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नोटबंदी के बाद रियल एस्टेट को लगेगा दूसरा झटका
रुड़की। वैसे तो नोटबंदी के बाद से ही रियल एस्टेट कारोबार में मंदी चल रही थी। अब राज्य सरकार की ओर से सर्किल रेट में बढ़ोत्तरी कर दी गई है। ऐसे में यह नोटबंदी के बाद दूसरा बड़ा झटका कहा जा सकता है। करीब एक साल पहले हुई नोटबंदी के बाद से क्षेत्र में जमीनों का कारोबार बेहद कम हो गया था। जिसके चलते कई नामी गिरामी बिल्डरों के करोड़ों रुपये फंसे रह गए। न कोई जमीन बेचने वाला सामने आ रहा था और न ही कोई खरीदार। इस दौरान उन लोगों को ज्यादा झटका लगा था जिन्होंने करोड़ों की जमीन इस उम्मीद के साथ खरीदी थी कि इन पर फ्लैट बनाकर महंगे दामों में बेच दिया जाएगा। लेकिन नोटबंदी के बाद से न केवल जमीनों का कारोबार ठंडा हो गया बल्कि फ्लैट आदि के खरीदार भी गायब हो गए। नोटबंदी के एक साल बाद भी प्रापर्टी के कारोबार पर वैसा बूम नहीं आया जैसा कि करीब पांच साल पहले देखा गया था। यही नहीं नोटबंदी के बाद से कालेधन पर हुई सख्ती के चलते बैंकों ने भी शिकंजा कस दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि लोग जमीन के एवज में बैंकों में मोटी रकम जमा कराने से कतराने लगे। अब जबकि लोग इस इंतजार में थे कि नोटबंदी के एक साल बाद धीरे-धीरे प्रापर्टी कारोबार पर छाई धुंध छट जाएगी। लेकिन अब शासन की ओर से सर्किल रेट बढ़ाने का फैसला लिया है। इससे प्रापर्टी कारोबार पर एक बार फिर से मंदी की मार पड़ सकती है।
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अभी तक रुड़की क्षेत्र में दिल्ली-हरिद्वार हाईवे, दिल्ली देहरादून हाईवे, रुड़की लक्सर मार्ग के किनारे लाखों करोड़ों की बेशकीमती भूमि की खरीदारी पर कृषि भूमि के हिसाब से ही स्टांप शुल्क लिया जा रहा था। लेकिन जिला प्रशासन की ओर से इस बात की तस्दीक की जा रही थी कि लोग मुख्य मार्गों के किनारे कृषि भूमि खरीदने के बाद इसका व्यवसायिक स्तर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में कृषि भूमि को संरक्षण नहीं मिल रहा था। साथ ही व्यवसायिक भवनों की तरह सरकार को राजस्व भी नहीं मिल रहा था। बताया गया है कि पिछले दिनों जिला प्रशासन की ओर से शासन को भेजी रिपोर्ट में भी यह जानकारी दी गई थी कि मुख्य मार्गों के किनारे जिस तरह से कृषि भूमि को व्यवसायिक रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उस हिसाब से सरकार को राजस्व नहीं मिल पा रहा है। इन्हीं रिपोर्ट के आधार पर शुक्रवार को कैबिनेट की ओर से रुड़की और आसपास के क्षेत्रों में कृषि भूमि के सर्किल रेट में बढ़ोत्तरी पर मुहर लगा दी गई है। बताया जा रहा है कि मुख्य मार्गों से 200 मीटर दूरी तक जमीनों के सर्किल रेट में दोगुने से ज्यादा का इजाफा हो सकता है।
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हरिद्वार में पहले से ही थे आठ गुना ज्यादा सर्किल रेट
रुड़की रजिस्ट्रार कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार दिल्ली हरिद्वार हाईवे पर रुड़की क्षेत्र में आने वाले शांतरशाह में प्रति हेक्टेयर सर्किल रेट 60 लाख रुपये थे। जबकि हरिद्वार क्षेत्र शुरू होते ही हाईवे किनारे की जमीनों का सर्किल 500 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है। ऐसे में हरिद्वार की तुलना में रुड़की क्षेत्र में सर्किल रेट बढ़ाए जाने की कवायद काफी पहले से चल रही थी।
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नोटबंदी के बाद रियल एस्टेट को लगेगा दूसरा झटका
रुड़की। वैसे तो नोटबंदी के बाद से ही रियल एस्टेट कारोबार में मंदी चल रही थी। अब राज्य सरकार की ओर से सर्किल रेट में बढ़ोत्तरी कर दी गई है। ऐसे में यह नोटबंदी के बाद दूसरा बड़ा झटका कहा जा सकता है। करीब एक साल पहले हुई नोटबंदी के बाद से क्षेत्र में जमीनों का कारोबार बेहद कम हो गया था। जिसके चलते कई नामी गिरामी बिल्डरों के करोड़ों रुपये फंसे रह गए। न कोई जमीन बेचने वाला सामने आ रहा था और न ही कोई खरीदार। इस दौरान उन लोगों को ज्यादा झटका लगा था जिन्होंने करोड़ों की जमीन इस उम्मीद के साथ खरीदी थी कि इन पर फ्लैट बनाकर महंगे दामों में बेच दिया जाएगा। लेकिन नोटबंदी के बाद से न केवल जमीनों का कारोबार ठंडा हो गया बल्कि फ्लैट आदि के खरीदार भी गायब हो गए। नोटबंदी के एक साल बाद भी प्रापर्टी के कारोबार पर वैसा बूम नहीं आया जैसा कि करीब पांच साल पहले देखा गया था। यही नहीं नोटबंदी के बाद से कालेधन पर हुई सख्ती के चलते बैंकों ने भी शिकंजा कस दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि लोग जमीन के एवज में बैंकों में मोटी रकम जमा कराने से कतराने लगे। अब जबकि लोग इस इंतजार में थे कि नोटबंदी के एक साल बाद धीरे-धीरे प्रापर्टी कारोबार पर छाई धुंध छट जाएगी। लेकिन अब शासन की ओर से सर्किल रेट बढ़ाने का फैसला लिया है। इससे प्रापर्टी कारोबार पर एक बार फिर से मंदी की मार पड़ सकती है।