{"_id":"5aaeb2294f1c1bab758b61fc","slug":"141521398313-roorkee-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"परमिट 14 सीट का, सवारियां 32","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परमिट 14 सीट का, सवारियां 32
Updated Mon, 19 Mar 2018 12:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रुड़की। धनौरी-कलियर मार्ग पर संचालित होने वाली मेटाडोर में जमकर ओवरलोडिंग की जा रही है। कुछ वाहनों के कागज आधे-अधूरे हैं। इसके साथ-साथ बाहरी प्रदेशों की मेटाडोर भी धड़ल्ले से मार्ग पर दौड़ रहे हैं। जबकि परिवहन विभाग के अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी चुप्पी साधे हुए हैं।
इस मार्ग पर 14 सीटर मेटाडोर पास है। जबकि मेटाडोर में 32-32 सवारियां बिठाई जा रही हैं। सवारियों को ठूंस ठूंस कर भरा जा रहा है। बताया जा रहा है कि अधिकतर मेटाडोर के कागजात भी पूरे नहीं हैं। कई मेटाडोर पर रिफ्लेक्टर तक नहीं लगाए गए हैं। बैक लाइट और इंडीकेटर भी एक-दो मेटाडोर में नजर आ रहे हैं। बाहरी प्रदेशों से खरीद कर लायी गई मेटाडोर सालों से इस मार्ग पर हरियाणा, पंजाब और यूपी के नंबरों से संचालित हो रही हैं। जबकि नियमानुसार 11 महीने बाद वाहन को उत्तराखंड के नंबर पर पंजीकृत करना होता है।
एआरटीओ को देख मेटाडोर गायब
एआरटीओ प्रवर्तन की ओर से जब रुड़की-धनौरी मार्ग पर वाहनों की जांच की जाती है तो संबंधित मेटाडोर चालक दूसरे चालकों को रूट पर चेंकिंग होने की सूचना दे देते हैं। सूचना पर मेटाडोर संचालक अपने वाहनों को सड़क से हटाकर साइड में खड़ा कर देते हैं। ऐसे में दो-तीन मेटाडोर के कागज ही चेक हो पाते हैं। बाकी मेटाडोर कार्रवाई से बच जाते हैं। इसके अलावा मंगलौर-रुड़की के बीच संचालित होने वाली मेटाडोरों में भी ओवरलोडिंग हो रही है। यहां भी मेेटाडोर में 30-32 सवारियां बिठाई जा रही हैैं। इस रूट पर भी बाहरी प्रदेशों की मेटाडोर संचालित हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस मार्ग पर 14 सीटर मेटाडोर पास है। जबकि मेटाडोर में 32-32 सवारियां बिठाई जा रही हैं। सवारियों को ठूंस ठूंस कर भरा जा रहा है। बताया जा रहा है कि अधिकतर मेटाडोर के कागजात भी पूरे नहीं हैं। कई मेटाडोर पर रिफ्लेक्टर तक नहीं लगाए गए हैं। बैक लाइट और इंडीकेटर भी एक-दो मेटाडोर में नजर आ रहे हैं। बाहरी प्रदेशों से खरीद कर लायी गई मेटाडोर सालों से इस मार्ग पर हरियाणा, पंजाब और यूपी के नंबरों से संचालित हो रही हैं। जबकि नियमानुसार 11 महीने बाद वाहन को उत्तराखंड के नंबर पर पंजीकृत करना होता है।
विज्ञापन
एआरटीओ को देख मेटाडोर गायब
एआरटीओ प्रवर्तन की ओर से जब रुड़की-धनौरी मार्ग पर वाहनों की जांच की जाती है तो संबंधित मेटाडोर चालक दूसरे चालकों को रूट पर चेंकिंग होने की सूचना दे देते हैं। सूचना पर मेटाडोर संचालक अपने वाहनों को सड़क से हटाकर साइड में खड़ा कर देते हैं। ऐसे में दो-तीन मेटाडोर के कागज ही चेक हो पाते हैं। बाकी मेटाडोर कार्रवाई से बच जाते हैं। इसके अलावा मंगलौर-रुड़की के बीच संचालित होने वाली मेटाडोरों में भी ओवरलोडिंग हो रही है। यहां भी मेेटाडोर में 30-32 सवारियां बिठाई जा रही हैैं। इस रूट पर भी बाहरी प्रदेशों की मेटाडोर संचालित हो रहे हैं।
विज्ञापन