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इस रेल लाइन से चीन सीमा तक पहुंच सकेगी भारतीय सेना
अरुणेश पठानिया
Updated Thu, 19 Sep 2013 12:37 AM IST
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन न सिर्फ आमजन के लिए बल्कि सैन्य दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण है। इस रेलवे लाइन के शुरू होने पर चीन सीमा तक भारतीय सेना और अर्द्धसैनिक बलों की पहुंच आसान हो जाएगी।
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यही नहीं परियोजना के दूसरे चरण में माणा तक रेलवे लाइन पहुंचाने का फायदा तो पूरी तरह सैन्य बलों को ही मिलेगा। सेना के प्रस्तावित माउंटेन स्ट्राइक कोर के तहत राज्य में सैन्य बल व ढांचा बढ़ाने की तैयारी है।
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उत्तराखंड की चीन से सटी साढे़ तीन सौ किलोमीटर लंबी सीमा अब भी सड़क मार्गों से नहीं जुड़ पाई है।
गढ़वाल में ऋषिकेश तक और कुमाऊं में काठगोदाम तक भारी उपकरणों व रसद को रेल मार्ग से पहुंचाया जाता है, लेकिन उससे आगे सड़क मार्ग की बदहाल स्थिति सेना की आवाजाही में बाधक है।
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सेना चीन सीमा पर अपनी तैनाती बढ़ाने के लिए माउंट कोर स्थापित करने की तैयारी में है। इसके तहत उत्तराखंड में सैन्य बलों की संख्या बढ़ाई जानी है। प्रस्तावित योजना के तहत सेना को उत्तराखंड में मजबूत ढांचा विकसित करना है जिसमें सबसे बड़ी बाधा यातायात के कमजोर साधन है।
मौजूदा स्थिति में सेना के लिए ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन से सर्वाधिक उम्मीद है। यह परियोजना संवेदनशील सीमांत जनपदों से होकर गुजरेगी, जिससे सेना को सर्वाधिक फायदा मिलेगा।
रेलवे लाइन की स्थिति
कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के सामरिक महत्व को देखते हुए उसका सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है, जल्द ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।
सड़क की स्थिति
सीमा तक सड़कों का जाल बिछाने की प्रस्तावित योजनाएं निर्धारित समय सीमा से पीछे है। 45 सड़क राज्य में प्रस्तावित हैं, लेकिन भूमि हस्तांतरण, पेड़ों के कटान, वन विभाग की एनओसी सहित कई समस्याएं परियोजनाओं के आड़े आ रही हैं।
सड़क परियोजनाओं के लिए राहत की बात यह है कि अब रक्षा मंत्रालय ने एनओसी की नई व्यवस्था बनाने के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा है।
सामरिक महत्व
- सैनिकों और रसद को अग्रिम मोर्चों तक पहुंचाने में रेल मार्ग सबसे सुरक्षित है। इसी के तहत जम्मू-कश्मीर में नए रेल मार्ग बनाए जा रहे हैं। उत्तराखंड में कर्णप्रयाग से माणा तक रेलवे मार्ग बनने से सेना व अर्द्ध सैनिक बलों को सर्वाधिक फायदा मिलेगा।
- रेल मार्ग तोपखाने और आर्म्ड की आवाजाही में मददगार रहेगी। सेना की राज्य में बड़े हथियारों को स्थापित करने की योजना है, जिसके लिए फील्ड फायरिंग रेंज स्थापित करने के लिए भूमि चिन्हीकरण प्रस्ताव विचाराधीन है।