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यौगिक जीवन पद्धति एक संपूर्ण एवं सर्वोच्च जीवन पद्धति है
सार
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के तत्वावधान में इंटिग्रेटिव बैलेंस साइंस एंड प्रेक्टिसिस विषय पर कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।यौगिक जीवन पद्धति एक संपूर्ण एवं सर्वोच्च जीवन पद्धति है।संस्थान की डीन रिसर्च व सीएफएम विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सेना, डॉ. गौरी मित्तल ने व्याख्यान दिया।
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विस्तार
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के तत्वावधान में इंटिग्रेटिव बैलेंस साइंस एंड प्रेक्टिसिस विषय पर कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। जिसमें भारतीय प्राचीन सनातन पद्धतियों को अपनाने से लोगों में होने वाली बीमारियों पर सद्प्रभावों पर चर्चा की गई।
सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग प्राचीन सनातन पद्धतियों को इस विषय की जानकारी अपने रोगियों को भी साझा कर सकते हैं। यौगिक जीवन पद्धति एक संपूर्ण एवं सर्वोच्च जीवन पद्धति है। जीवन में अनुशासित दिनचर्या, आहार, विचार, आचार, व्यवहार आवश्यक है, इन सब बिंदुओं को योग पद्धति में विस्तृत वर्णन मिलता है।
कॉन्फ्रेंस में संस्थान के चिकित्सक, फैकल्टी, रेजिडेंट्स और एमबीबीएस के छात्रों ने प्रतिभाग किया। छात्रों को सनातन पद्धतियों से लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले अच्छे व बीमारियों पर वैज्ञानिक रूप से देखे गए प्रभावों व बदलावों के बारे में जागरूक किया गया। प्राचीन समय में लोग अपने सही खानपान, रहन-सहन, सुव्यवस्थित दिनचर्या व योग, प्राणायाम आदि से बीमारियों की जद में नहीं आते थे, मगर वर्तमान में जंक फूड, गलत खानपान, अनियमित दिनचर्या, ऑयली व प्रोसेस फूड के अत्यधिक व नियमित सेवन से बीमारियां बढ़ गई हैं।
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इस मौके पर श्रीरामकृष्ण मिशन अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. स्वामी दयाधीपानंदा ने सभी प्रतिभागियों को लाइव योगा, प्राणायाम व मेडिटेशन का अभ्यास कराया। एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह के नेतृत्व में संस्थान के करीब तीन सौ चिकित्सक और छात्र छात्राओं ने भी योगाभ्यास व ध्यान किया।
साइंटिफिक सत्र में मुख्य वक्ता यूएस में इंटरवेंशन कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुशील शर्मा ने शोध आधारित इंटिग्रेटिव वेलनैस पर व्याख्यान दिया। संस्थान की डीन रिसर्च व सीएफएम विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सेना, डॉ. गौरी मित्तल ने व्याख्यान दिया।
इस मौके पर समिति के अध्यक्ष डॉ. वरुण कुमार, डॉ. विनोद, डीन प्रो.जया चतुर्वेदी, एमएस प्रो. संजीव कुमार मित्तल, प्रो. प्रशांत पाटिल, प्रो. पुनीत धर, प्रो. नीलोत्पल चौधरी आदि शामिल थे।
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सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग प्राचीन सनातन पद्धतियों को इस विषय की जानकारी अपने रोगियों को भी साझा कर सकते हैं। यौगिक जीवन पद्धति एक संपूर्ण एवं सर्वोच्च जीवन पद्धति है। जीवन में अनुशासित दिनचर्या, आहार, विचार, आचार, व्यवहार आवश्यक है, इन सब बिंदुओं को योग पद्धति में विस्तृत वर्णन मिलता है।
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कॉन्फ्रेंस में संस्थान के चिकित्सक, फैकल्टी, रेजिडेंट्स और एमबीबीएस के छात्रों ने प्रतिभाग किया। छात्रों को सनातन पद्धतियों से लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले अच्छे व बीमारियों पर वैज्ञानिक रूप से देखे गए प्रभावों व बदलावों के बारे में जागरूक किया गया। प्राचीन समय में लोग अपने सही खानपान, रहन-सहन, सुव्यवस्थित दिनचर्या व योग, प्राणायाम आदि से बीमारियों की जद में नहीं आते थे, मगर वर्तमान में जंक फूड, गलत खानपान, अनियमित दिनचर्या, ऑयली व प्रोसेस फूड के अत्यधिक व नियमित सेवन से बीमारियां बढ़ गई हैं।
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इस मौके पर श्रीरामकृष्ण मिशन अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. स्वामी दयाधीपानंदा ने सभी प्रतिभागियों को लाइव योगा, प्राणायाम व मेडिटेशन का अभ्यास कराया। एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह के नेतृत्व में संस्थान के करीब तीन सौ चिकित्सक और छात्र छात्राओं ने भी योगाभ्यास व ध्यान किया।
साइंटिफिक सत्र में मुख्य वक्ता यूएस में इंटरवेंशन कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुशील शर्मा ने शोध आधारित इंटिग्रेटिव वेलनैस पर व्याख्यान दिया। संस्थान की डीन रिसर्च व सीएफएम विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सेना, डॉ. गौरी मित्तल ने व्याख्यान दिया।
इस मौके पर समिति के अध्यक्ष डॉ. वरुण कुमार, डॉ. विनोद, डीन प्रो.जया चतुर्वेदी, एमएस प्रो. संजीव कुमार मित्तल, प्रो. प्रशांत पाटिल, प्रो. पुनीत धर, प्रो. नीलोत्पल चौधरी आदि शामिल थे।