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इधर सूर्यधार में पानी रोका, उधर भड़के किसान

Thu, 03 Dec 2020 01:12 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 03 Dec 2020 01:12 AM IST
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Water stopped in Suryadhar here, farmers erupted there
सूर्यधार झील। - फोटो : RISHIKESH
ऋषिकेश। सूर्यधार झील के लोकार्पण को तीन दिन भी नहीं हुए, झील का पानी 11 ग्राम सभाओं के लिए जी-का-जंजाल बन गया। इस समय जब गेंहू और गन्ने की फसल को सिंचाई के लिए पानी की सबसे से ज्यादा जरूरत है, ऐसे में सिंचाई विभाग के अधिकारियों को सिंचाई नहर बंद कर झील भरने की लगी है। बुधवार को गुस्साए सैकड़ों किसानों ने भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले मौके पर प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया। इसके बाद पानी नहर में छोड़ा गया। इस दौरान सिंचाई विभाग के ऑपरेटर और काश्तकारों के बीच तीखी झड़प भी हुई।
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बुधवार को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बनैर तले सैकड़ों किसान सूर्यधार बांध परियोजना स्थल पर पहुंचे और नहर बंद करने को लेकर सिंचाई विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे। काश्तकारों का कहना था कि इस समय गेंहू और गन्ने की फसल को सिंचाई की आवश्यकता है। ऐसे में विभागीय अधिकारियों का पानी रोककर झील भरने का निर्णय समझ से परे है। मौके पर मौजूद ऑपरेटर ने बताया कि उन्हें झील को 24 घंटे भरा रखने के आदेश दिए गए हैं। अगर हम पानी छोड़ते है तो झील खाली हो रही है। इससे काश्तकारों का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया। काफी गहमा गहमी के बीच नहर का शटर खोला गया। प्रदर्शन करने वालों में किसान रविंद्र कठैत, मनीष चौहान, रामकिशोर सुयाल, पूर्व प्रधान पंकज यादव, मोहित कर्पवाण, राजपाल कृषाली, राम किशोर सिल्सवाल, मनीष चौहान, राम किशोर, वीर सिंह रावत, यश मोहन, गोपाल, विजय, अनिल, राधेश्याम, जगमोहन, धीरज, जगत, अशोक पूरी, नारायण भट्ट, सुनील सजवाण, राम मोहन शर्मा आदि मौजूद थे।
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कोट:
सूर्यधार बांध परियोजना किसानों को हित में रखकर तैयार की गई है। लेकिन अब ऐसा लग रहा है, ये परियोजना किसानों के लिए ही मुसीबत बनने जा रही है। अभी जब न्याय पंचायत क्षेत्र में 12 सौ से अधिक बीघा भूमि की सिंचाई होनी है, ऐसे में नहर बंद कर झील भरने का निर्णय समझ से परे है। यदि सिंचाई विभाग का यही रवैया रहा तो हम इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे।
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-अनूप चौहान, ब्लाक अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत)
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कोट:
अभी बांध छह माह तक टेस्टिंग पीरियड में है। झील में पानी रोककर देखा जाता है, कहां-कहां नए स्रोत बन रहे हैं, कहीं लीकेज तो नहीं है। ऐसे में कुछ समय के लिए ऐसी दिक्कतें पेश आएंगी। नहर में पहले की तरह इस सीजन में भी 10 सेंटीमीटर पानी छोड़ा जा रहा है, जबकि किसान चाहते हैं कि यह पानी 90 सेंटीमीटर छोड़ा जाए। ऐसे में तो झील चार ही दिन में खाली हो जाएगी। जबकि हम चाहते हैं किसानों को बराबर पानी मिलता रहे।
- होश्यार सिंह गुंसाई, अपर सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग
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