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Rishikesh News: विश्वविद्यालय के पुर्नमूल्याकंन का प्रस्ताव पारित किया
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श्री देव सुमन विवि की आपातकालीन परीक्षा समिति की सातवीं वर्चुअल बैठक आयोजित
श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके जोशी ने आपातकालीन परीक्षा समिति की सातवीं वर्चुअल बैठक आयोजित की। कुलपति ने परीक्षा समिति एवं परीक्षा नियंत्रक सचिव प्रो. वीपी श्रीवास्तव और अन्य सदस्यों के साथ मिलकर एजेंडा प्रस्तुत किया। जिसमें पुर्नमूल्याकंन का प्रस्ताव पारित किया गया।
शनिवार को आयोजित बैठक में कुलपति प्रो. जोशी ने बताया कि विवि में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पर कुछ छात्र संगठनों की ओर से ज्ञापन दिया गया था। जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पर सवाल उठाए थे। आरोप था कि अधिकतर छात्र-छात्राएं अनुत्तीर्ण दर्शाए गए हैं। कहा विश्वविद्यालय में पुर्नमूल्याकंन का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसी स्थिति को देखते हुए कुलपति ने छात्र हित और विश्वविद्यालय में प्रथम बार पुर्नमूल्याकंन का निर्णय लिया। कुलपति ने बताया कि मूल्यांकन में लापरवाही बरतने पर मूल परीक्षक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
विश्वविद्यालय परीक्षा समिति की ओर से सत्र 2022-23 और आगामी परीक्षाओं के स्नातक, स्नातकोत्तर स्तर पर अंतिम दो सेमेस्टरों में ऐसे छात्र-छात्राएं जिनका बैक हो, उनके लिए विशेष बैक परीक्षाओं का आयोजन कराया जाएगा। उन छात्र-छात्राओं का प्रथम से लेकर चतुर्थ (त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम) और जहां अष्ठम सेमेस्टर अंतिम सेमेस्टर होता है वहां छठवें सेमेस्टर तक किसी प्रकार का कोई बैकलाॅग प्रश्नपत्रों में नहीं होना चाहिए। स्नातकोत्तर स्तर पर जिन छात्र-छात्राओं का द्वितीय सेमेस्टर तक कोई बैकलाॅग न हो, ऐसे छात्र छात्राएं अंतिम दो सेमेस्टरों (तृतीय, चतुर्थ) में यदि बैक आता है, तो ऐसे छात्र-छात्राएं भी विशेष बैक परीक्षा के लिए पात्र होगें। आधारभूत और व्यवसायिक पाठ्यक्रमों के अंतर्गत स्नातकोत्तर सत्र 2018-20, 2019-21 और 2020-22 के ऐसे छात्र-छात्राएं जो अंक सुधार परीक्षा, प्रयोगात्मक परीक्षा, आंतरिक परीक्षा देने से वंचित रह गए हैं, ऐसे छात्रों को भी अंतिम अवसर निर्धारित शुल्क के साथ दिया जाएगा।
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श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके जोशी ने आपातकालीन परीक्षा समिति की सातवीं वर्चुअल बैठक आयोजित की। कुलपति ने परीक्षा समिति एवं परीक्षा नियंत्रक सचिव प्रो. वीपी श्रीवास्तव और अन्य सदस्यों के साथ मिलकर एजेंडा प्रस्तुत किया। जिसमें पुर्नमूल्याकंन का प्रस्ताव पारित किया गया।
शनिवार को आयोजित बैठक में कुलपति प्रो. जोशी ने बताया कि विवि में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पर कुछ छात्र संगठनों की ओर से ज्ञापन दिया गया था। जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पर सवाल उठाए थे। आरोप था कि अधिकतर छात्र-छात्राएं अनुत्तीर्ण दर्शाए गए हैं। कहा विश्वविद्यालय में पुर्नमूल्याकंन का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसी स्थिति को देखते हुए कुलपति ने छात्र हित और विश्वविद्यालय में प्रथम बार पुर्नमूल्याकंन का निर्णय लिया। कुलपति ने बताया कि मूल्यांकन में लापरवाही बरतने पर मूल परीक्षक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
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विश्वविद्यालय परीक्षा समिति की ओर से सत्र 2022-23 और आगामी परीक्षाओं के स्नातक, स्नातकोत्तर स्तर पर अंतिम दो सेमेस्टरों में ऐसे छात्र-छात्राएं जिनका बैक हो, उनके लिए विशेष बैक परीक्षाओं का आयोजन कराया जाएगा। उन छात्र-छात्राओं का प्रथम से लेकर चतुर्थ (त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम) और जहां अष्ठम सेमेस्टर अंतिम सेमेस्टर होता है वहां छठवें सेमेस्टर तक किसी प्रकार का कोई बैकलाॅग प्रश्नपत्रों में नहीं होना चाहिए। स्नातकोत्तर स्तर पर जिन छात्र-छात्राओं का द्वितीय सेमेस्टर तक कोई बैकलाॅग न हो, ऐसे छात्र छात्राएं अंतिम दो सेमेस्टरों (तृतीय, चतुर्थ) में यदि बैक आता है, तो ऐसे छात्र-छात्राएं भी विशेष बैक परीक्षा के लिए पात्र होगें। आधारभूत और व्यवसायिक पाठ्यक्रमों के अंतर्गत स्नातकोत्तर सत्र 2018-20, 2019-21 और 2020-22 के ऐसे छात्र-छात्राएं जो अंक सुधार परीक्षा, प्रयोगात्मक परीक्षा, आंतरिक परीक्षा देने से वंचित रह गए हैं, ऐसे छात्रों को भी अंतिम अवसर निर्धारित शुल्क के साथ दिया जाएगा।
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