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जागरूकता और टीका से रोका जा सकता है गर्भाशय कैंसर : प्रो. मीनू
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एम्स में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) उन्मूलन सप्ताह पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। महिलाओं को समय-समय पर स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी गई। बताया कि जागरूकता से ही गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से बचा जा सकता है।
एम्स के प्रसूति व स्त्री रोग विभाग और नर्सिंग विभाग की ओर से सर्वाइकल कैंसर पर जनजागरूकता के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। एम्स निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर को समाप्त करने के लिए प्रत्येक महिला को स्वयं जागरूक होना पड़ेगा।
जनजागरूकता और टीकाकरण के माध्यम से इस बीमारी को रोका जा सकता है। इससे बचाव के लिए नियमित स्तर पर इसकी जांच के लिए स्क्रीनिंग करानी जरूरी है। जांच और स्क्रीनिंग के लिए एम्स में आईडब्लूसीसी सेंटर स्थापित है।
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गायनी विभाग की ऑन्कोलॉजिस्ट प्रो. शालिनी राजाराम ने कहा कि एचपीवी वैक्सीन से इसे रोका जा सकता है। किसी महिला में इस बीमारी के लक्षण हों या न हों, तब भी उन्हें प्रत्येक पांच वर्ष में स्क्रीनिंग करवानी चाहिए।
कार्यक्रम में नर्सिंग ऑफिसर्स और रेजिडेंट डॉक्टरों की टीम ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर इस बीमारी के प्रति महिलाओं को जागरूक किया। साथ ही इस विषय पर पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
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हर दिन होती है जांच
एम्स ऋषिकेश की गायनी ओपीडी और आईडब्लूसीसी सेंटर में प्रत्येक दिन गर्भाशय कैंसर की जांच की जाती है। स्त्री रोग ऑन्कोलॉजिस्ट डाॅ. शालिनी राजाराम ने बताया कि अभी तक 1800 से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
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लक्षण
- माहवारी और रजोनिवृत्ति के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होना
- शारीरिक संबंध बनाने के बाद रक्तस्राव होना
- योनि से लगातार बदबूदार पानी आना
- भूख में कमी, बेवजह थकान लगना आदि
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बचाव व एहतियात
- गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाव के लिए दो टीके लगाए जाते हैं। यह टीके नौ से 14 साल तक की लड़कियों को लगाए जाते हैं। पहला टीका लगाने के छह माह बाद दूसरा टीका लगाया जाता है। टीका बाजार में उपलब्ध है। अब सरकार टीकाकरण अभियान चलाए जाने पर भी विचार कर रही है। इसका उपचार सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमो रेडिएशन व कीमोथेरेपी से होता है।
एम्स के प्रसूति व स्त्री रोग विभाग और नर्सिंग विभाग की ओर से सर्वाइकल कैंसर पर जनजागरूकता के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। एम्स निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर को समाप्त करने के लिए प्रत्येक महिला को स्वयं जागरूक होना पड़ेगा।
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जनजागरूकता और टीकाकरण के माध्यम से इस बीमारी को रोका जा सकता है। इससे बचाव के लिए नियमित स्तर पर इसकी जांच के लिए स्क्रीनिंग करानी जरूरी है। जांच और स्क्रीनिंग के लिए एम्स में आईडब्लूसीसी सेंटर स्थापित है।
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गायनी विभाग की ऑन्कोलॉजिस्ट प्रो. शालिनी राजाराम ने कहा कि एचपीवी वैक्सीन से इसे रोका जा सकता है। किसी महिला में इस बीमारी के लक्षण हों या न हों, तब भी उन्हें प्रत्येक पांच वर्ष में स्क्रीनिंग करवानी चाहिए।
कार्यक्रम में नर्सिंग ऑफिसर्स और रेजिडेंट डॉक्टरों की टीम ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर इस बीमारी के प्रति महिलाओं को जागरूक किया। साथ ही इस विषय पर पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
हर दिन होती है जांच
एम्स ऋषिकेश की गायनी ओपीडी और आईडब्लूसीसी सेंटर में प्रत्येक दिन गर्भाशय कैंसर की जांच की जाती है। स्त्री रोग ऑन्कोलॉजिस्ट डाॅ. शालिनी राजाराम ने बताया कि अभी तक 1800 से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
लक्षण
- माहवारी और रजोनिवृत्ति के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होना
- शारीरिक संबंध बनाने के बाद रक्तस्राव होना
- योनि से लगातार बदबूदार पानी आना
- भूख में कमी, बेवजह थकान लगना आदि
बचाव व एहतियात
- गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाव के लिए दो टीके लगाए जाते हैं। यह टीके नौ से 14 साल तक की लड़कियों को लगाए जाते हैं। पहला टीका लगाने के छह माह बाद दूसरा टीका लगाया जाता है। टीका बाजार में उपलब्ध है। अब सरकार टीकाकरण अभियान चलाए जाने पर भी विचार कर रही है। इसका उपचार सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमो रेडिएशन व कीमोथेरेपी से होता है।