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Rishikesh News: बुनियादी ढांचे की कमी से पैदल चलना दूभर
Fri, 11 Sep 2026 02:09 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Fri, 11 Sep 2026 02:09 AM IST
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मुनि की रेती और तपोवन क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे पर्यटन के बीच बुनियादी व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। मुख्य सड़कों पर वाहनों का भारी दबाव, संकरे रास्ते और जगह-जगह हुए अतिक्रमण ने स्थिति बिगाड़ दी है। हाल यह है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए सड़कों पर पैदल चलना अत्यंत कठिन और जोखिम भरा हो चुका है।
जानकी सेतु के निर्माण से मुनि की रेती और स्वर्गगाश्रम के बीच आवाजाही भले सुलभ हुई हो, लेकिन प्रभावी यातायात प्रबंधन के अभाव में मुश्किलें बढ़ गई हैं। तपोवन और मुनि की रेती के अंदरूनी मार्गों पर कारों, ई-रिक्शा, दोपहिया वाहनों और टूरिस्ट बसों की अनियंत्रित आवाजाही बनी रहती है। मुख्य मार्गों पर या तो फुटपाथ हैं नहीं, और जहां हैं भी, वहां अवैध रेहड़ी-पटरी व बेतरतीब खड़े वाहनों का कब्जा है। इसके चलते पर्यटकों को जान जोखिम में डालकर सड़क के बीचों-बीच चलना पड़ रहा है। शाम के वक्त गंगा आरती के दौरान जानकी सेतु और प्रमुख घाटों पर भारी भीड़ के कारण पैर रखने तक की जगह नहीं बचती। अधिशासी अधिकारी बद्री प्रसाद भट्ट ने बताया कि क्षेत्र में सुगम यातायात व्यवस्था बनाए रखने और पैदल यात्रियों को राहत देने के लिए अतिक्रमण के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे।
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जानकी सेतु के निर्माण से मुनि की रेती और स्वर्गगाश्रम के बीच आवाजाही भले सुलभ हुई हो, लेकिन प्रभावी यातायात प्रबंधन के अभाव में मुश्किलें बढ़ गई हैं। तपोवन और मुनि की रेती के अंदरूनी मार्गों पर कारों, ई-रिक्शा, दोपहिया वाहनों और टूरिस्ट बसों की अनियंत्रित आवाजाही बनी रहती है। मुख्य मार्गों पर या तो फुटपाथ हैं नहीं, और जहां हैं भी, वहां अवैध रेहड़ी-पटरी व बेतरतीब खड़े वाहनों का कब्जा है। इसके चलते पर्यटकों को जान जोखिम में डालकर सड़क के बीचों-बीच चलना पड़ रहा है। शाम के वक्त गंगा आरती के दौरान जानकी सेतु और प्रमुख घाटों पर भारी भीड़ के कारण पैर रखने तक की जगह नहीं बचती। अधिशासी अधिकारी बद्री प्रसाद भट्ट ने बताया कि क्षेत्र में सुगम यातायात व्यवस्था बनाए रखने और पैदल यात्रियों को राहत देने के लिए अतिक्रमण के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे।
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