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Rishikesh News: पहली सुरंग की सहायक सुरंग आज होगी आरपार
Fri, 11 Sep 2026 02:06 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Fri, 11 Sep 2026 02:06 AM IST
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना के पैकेज वन के पहले हिस्से की सहायक सुरंग शुक्रवार को आरपार होगी। पैकेज वन की करीब 10 किमी लंबी सुरंग खोदाई कार्य दो हिस्सों में किया जा रहा है। इस सुरंग में चार ब्रेक थ्रू (दो ब्रेक थ्रू मुख्य टनल व दो ब्रेक थ्रू निकासी टनल में) होने हैं। जिनमें से दो ब्रेक थ्रू हो चुके हैं। तीसरा शुक्रवार को होगा और चौथा ब्रेक थ्रू अगले वर्ष जनवरी माह में होगा।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना की पहली सुरंग ढालवाला से शिवपुरी तक है। जिसकी कुल लंबाई करीब 10 किमी है। इस सुरंग का खोदाई कार्य दो हिस्सों में किया जा रहा है। जिसमें एक हिस्सा ढालवाला से नीरगड्डू है। जिसकी लंबाई करीब पांच किमी है। दूसरा हिस्सा नीरगड्डू से शिवपुरी तक का है। जिसकी लंबाई करीब 5.2 किमी है। आरवीएनएल अधिकारियों ने बताया कि सुरंग की खोदाई का कार्य मई 2021 में शुरू किया गया था। नीरगड्डू से शिवपुरी मुख्य सुरंग का ब्रेक थ्रू (आर-पार) बीते 15 अप्रैल को हो गया था। इस हिस्से की सहायक सुरंग पहले की आर-पार हो चुकी थी। अब शुक्रवार को ढालवाला से नीरगड्डू तक करीब 5.2 किमी हिस्से की सहायक सुरंग का शुक्रवार को ब्रेक थ्रू होगा। इसके लिए आरवीएनएल ने सभी तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। आरवीएनएल के अधिकारियों का कहना है कि अगले वर्ष जनवरी माह में इस हिस्से की मुख्य सुरंग भी आर-पार कर दी जाएगी।
जटिल भूगर्भीय परिस्थितियां बनीं बड़ी चुनौती
जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों के चलते पैकेज वन की करीब 10.847 किलोमीटर लंबी की खोदाई आरवीएनएल के लिए बड़ी चुनौती थी। सुरंग निर्माण के दौरान कमजोर और नाजुक चट्टानों, लगातार भूजल के रिसाव तथा चट्टानों के दबाव जैसी कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सुरंग क्षेत्र का भूगर्भ मुख्य रूप से अत्यधिक दरारयुक्त, खंडित और बिखरी हुई फाइलाइट चट्टानों से बना है। ऐसे भूगर्भ में खुदाई के दौरान चट्टानों के खिसकने और दबाव बढ़ने का खतरा बना रहता है।
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एनएटीएम विधि की सबसे लंबी सुरंग
पैकेज वन (ढालवाला से शिवपुरी) की करीब 10.8547 किमी यह सुरंग न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से बनने वाली यह सबसे लंबी सुरंग है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना में सुरंगों की खोदाई टीबीएम (टनल बोरिंग मशीन) और न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) विधि से की जा रही है। परियोजना की सबसे बड़ी और एकमात्र डबल ट्यूब सुरंग देवप्रयाग (सौड़) से जनासू (14.5 किमी लंबी) की खोदाई टनल बोरिंग मशीन विधि से की गई है। जबकि ढालवाला से शिवपुरी सुरंग की खोदाई न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से की गई है।
मात्र पांच किमी रह गया खोदाई का कार्य
परियोजना में सुरंगों की खोदाई का कार्य मात्र पांच किमी शेष रह गया है। परियोजना की मुख्य और सहायक सुरंगों की कुल लंबाई 213 किमी है। जिसमें से 208 किमी सुरंगों की खोदाई का कार्य पूर्ण हो चुका है। आरवीएनएल के अधिकारियों का कहना है कि 2027 के अंत तक खोदाई का का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।
ट्रैक बिछाने का कार्य तेजी पर
परियोजना में 750 करोड़ की लागत से ट्रैक बिछाया जाएगा। जुलाई 2024 को इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूर्ण हुई थी। भारतीय रेलवे के उपक्रम इरकॉन इंटरनेशनल ट्रैक बिछाने का कार्य कर रहा है। अब तक करीब 2 किमी ट्रैक बिछा दिया गया है। परियोजना में सुरंगों में करीब करीब 155 किलोमीटर फाइनल लाइनिंग का काम भी पूरा हो चुका है।
परियोजना के पैकेज वन सुरंग के ढालवाला से नीरगड्डू तक वाले हिस्से की सहायक सुरंग शुक्रवार को आर-पार होगी। पैकेज वन सुरंग में दो ब्रेक थ्रू पहले किए जा चुके हैं। अगले वर्ष जनवरी माह में इस पैकेज का अंतिम ब्रेक थ्रू भी कर लिया जाएगा। 9ओपी मालगुड़ी, उप महाप्रबंधक, सिविल, आरवीएनएल।
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना की पहली सुरंग ढालवाला से शिवपुरी तक है। जिसकी कुल लंबाई करीब 10 किमी है। इस सुरंग का खोदाई कार्य दो हिस्सों में किया जा रहा है। जिसमें एक हिस्सा ढालवाला से नीरगड्डू है। जिसकी लंबाई करीब पांच किमी है। दूसरा हिस्सा नीरगड्डू से शिवपुरी तक का है। जिसकी लंबाई करीब 5.2 किमी है। आरवीएनएल अधिकारियों ने बताया कि सुरंग की खोदाई का कार्य मई 2021 में शुरू किया गया था। नीरगड्डू से शिवपुरी मुख्य सुरंग का ब्रेक थ्रू (आर-पार) बीते 15 अप्रैल को हो गया था। इस हिस्से की सहायक सुरंग पहले की आर-पार हो चुकी थी। अब शुक्रवार को ढालवाला से नीरगड्डू तक करीब 5.2 किमी हिस्से की सहायक सुरंग का शुक्रवार को ब्रेक थ्रू होगा। इसके लिए आरवीएनएल ने सभी तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। आरवीएनएल के अधिकारियों का कहना है कि अगले वर्ष जनवरी माह में इस हिस्से की मुख्य सुरंग भी आर-पार कर दी जाएगी।
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जटिल भूगर्भीय परिस्थितियां बनीं बड़ी चुनौती
जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों के चलते पैकेज वन की करीब 10.847 किलोमीटर लंबी की खोदाई आरवीएनएल के लिए बड़ी चुनौती थी। सुरंग निर्माण के दौरान कमजोर और नाजुक चट्टानों, लगातार भूजल के रिसाव तथा चट्टानों के दबाव जैसी कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सुरंग क्षेत्र का भूगर्भ मुख्य रूप से अत्यधिक दरारयुक्त, खंडित और बिखरी हुई फाइलाइट चट्टानों से बना है। ऐसे भूगर्भ में खुदाई के दौरान चट्टानों के खिसकने और दबाव बढ़ने का खतरा बना रहता है।
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एनएटीएम विधि की सबसे लंबी सुरंग
पैकेज वन (ढालवाला से शिवपुरी) की करीब 10.8547 किमी यह सुरंग न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से बनने वाली यह सबसे लंबी सुरंग है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना में सुरंगों की खोदाई टीबीएम (टनल बोरिंग मशीन) और न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) विधि से की जा रही है। परियोजना की सबसे बड़ी और एकमात्र डबल ट्यूब सुरंग देवप्रयाग (सौड़) से जनासू (14.5 किमी लंबी) की खोदाई टनल बोरिंग मशीन विधि से की गई है। जबकि ढालवाला से शिवपुरी सुरंग की खोदाई न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से की गई है।
मात्र पांच किमी रह गया खोदाई का कार्य
परियोजना में सुरंगों की खोदाई का कार्य मात्र पांच किमी शेष रह गया है। परियोजना की मुख्य और सहायक सुरंगों की कुल लंबाई 213 किमी है। जिसमें से 208 किमी सुरंगों की खोदाई का कार्य पूर्ण हो चुका है। आरवीएनएल के अधिकारियों का कहना है कि 2027 के अंत तक खोदाई का का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।
ट्रैक बिछाने का कार्य तेजी पर
परियोजना में 750 करोड़ की लागत से ट्रैक बिछाया जाएगा। जुलाई 2024 को इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूर्ण हुई थी। भारतीय रेलवे के उपक्रम इरकॉन इंटरनेशनल ट्रैक बिछाने का कार्य कर रहा है। अब तक करीब 2 किमी ट्रैक बिछा दिया गया है। परियोजना में सुरंगों में करीब करीब 155 किलोमीटर फाइनल लाइनिंग का काम भी पूरा हो चुका है।
परियोजना के पैकेज वन सुरंग के ढालवाला से नीरगड्डू तक वाले हिस्से की सहायक सुरंग शुक्रवार को आर-पार होगी। पैकेज वन सुरंग में दो ब्रेक थ्रू पहले किए जा चुके हैं। अगले वर्ष जनवरी माह में इस पैकेज का अंतिम ब्रेक थ्रू भी कर लिया जाएगा। 9ओपी मालगुड़ी, उप महाप्रबंधक, सिविल, आरवीएनएल।