ऋषिकेश। दून ई-रिक्शा एसोसिएशन और केजी ई-रिक्शा यूनियन ने प्रशासन से मुख्य मार्ग और राष्ट्रीय राजमार्ग पर ई-रिक्शा के संचालन की मांग की है। संचालन की अनुमति न मिलने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है। उधर उत्तराखंड विक्रम टैंपों महासंघ समेत विभिन्न यूनियनों ने क्षेत्रीय संभागीय परिवहन अधिकारी से मुख्य मार्ग और हाइवे में ई-रिक्शा के संचालन पर रोक लगाने की मांग कर चुके हैं। ऑटो विक्रम संचालकों ने भी मांग पूरी न होने पर आंदोलन को लेकर चेताया था।
योगनगरी में 1200 ऑटो और विक्रम का संचालन होता है। वहीं ई-रिक्शा की संख्या भी 600 के करीब हो चुकी है। बुधवार को दून ई रिक्शा एसोसिएशन और केजी ई-रिक्शा यूनियन के पदाधिकारी जिला पंचायत सदस्य संजय चौहान के नेतृत्व में तहसील परिसर पहुुंचे। यहां ई-रिक्शा संचालकों ने ऑटों विक्रम संचालकों पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए विरोध जाहिर किया। इसके बाद ई रिक्शा संचालकों ने एसडीएम अपूर्वा सिंह को 11 सूत्री मांग पत्र सौंपा। ई-रिक्शा संचालकों ने एसडीएम को बताया कि क्षेत्रीय संभागीय परिवहन कार्यालय में पंजीकृत है। उन्होंने बताया वे टैक्स जमा करते हैं। सभी वाहनों का इंश्योरेंस भी कर रखा है। उन्होंने कों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों और लिंक रोड पर ई-रिक्शा के संचालन से वे बैंक के किश्त भी नहीं निकाल पा रहे हैं। यूूनियन के पदाधिकारी ने बताया कि ई-रिक्शा संचालकों के लिए रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। उन्होंने एसडीएम से शहर के बीच से होकर जाने वाले हाईवे पर भी ई-रिक्शा के संचालन की मांग की। एसडीएम अपूर्वा सिंह ने यूनियन के पदाधिकारियों से ऑटो विक्रम यूनियन और ई-रिक्शा यूनियन सीओ ट्रैफिक के मध्यस्था में वार्ता कर मामले को सुलझा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ई रिक्शा, ऑटो और विक्रम का रूट निर्धारित हो जाएगा तो किसी तरह के विवाद की स्थित पैदा नहीं होगी। इस दौरान दून ई-रिक्शा एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास शर्मा, केजी ई-रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष मनीष कोली, उपाध्यक्ष अनिल कुमार, महासचिव सतेश यादव, कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र पाल, पार्षद राजेंद्र सिंह बिष्ट मौजूद रहे।