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बाहर से लोग आते गए चंद्रभागा नदी का किनारा घिरता गया

Thu, 25 Jul 2019 01:21 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jul 2019 01:21 AM IST
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Trespassed to the side of the Chandrabhaga river by administrative overlook
चंद्रभागा में बसे लोगों का पक्ष सुनते नगर आयुक्त चतर सिंह चौहान। - फोटो : RISHIKESH
ऋषिकेश। प्रशासनिक अनदेखी के चलते चंद्रभागा नदी जहां एक ओर अतिक्रमण का शिकार हो गई। वहीं दूसरी ओर राजनीतिक आकाओं ने भी अवैध बस्ती बसाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। फिलवक्त चंद्रभागा नदी के किनारे लगभग 350 परिवार झोपड़ी डालकर रह रहे हैं। अब एनजीटी के निर्देश पर इन्हें हटाने के लिए कवायद शुरू की गई है। यह बात बुधवार को नगर निगम कार्यालय में अवैध कब्जेदारी मामले की हुई सुनवाई के दौरान सामने आई।
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दरअसल वर्तमान में चंद्रभागा नदी के किनारे लगभग 350 परिवार झोपड़ी डालकर निवास कर रहे हैं। इससे अतिक्रमण के अलावा यहां बने शौचालय की गंदगी सीधे गंगा में जा रही है। इसका संज्ञान लेते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नगर निगम प्रशासन को इस अवैध बस्ती को हटाने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में बुधवार को नगर आयुक्त चतर सिंह चौहान ने कब्जेदारों को बुलाकर सुनवाई की।
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बुधवार को चंद्रभागा नदी के किनारे बसे लगभग 260 लोग अपना पक्ष रखने करीब 11 बजे नगर निगम कार्यालय पहुंचे थे। हाथों में भाजपा का झंडा लिए लोगों ने मेयर अनिता ममगाईं के समक्ष बेघर न करने की गुहार भी लगाई।
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उधर, अपने कक्ष में सुनवाई कर रहे नगर आयुक्त नारेबाजी से आजिज आकर बिफर पड़े। उन्होंने भीड़ का नेतृत्व कर रहे कुछ पूर्व सभासदों और वर्तमान पार्षदों को बुलाकर हिदायत दी कि अनुशासन में रहकर सुनवाई करने दें। अन्यथा सुनवाई बंद कर दी जाएगी। उन्होंने अनुशासनहीनता भंग करने और सुनवाई में बाधा डालने की रिपोर्ट एनजीटी को भेजने की चेतावनी दी जाएगी। इसके बाद पार्षदों और निगम कर्मचारियों ने भीड़ को समझाना शुरू किया। इसके बावजूद कुछ लोग रुक-रुक नारेबाजी करते रहे।
नगर पालिका की मदद से बन गए शौचालय
नगर आयुक्त ने सुनवाई के दौरान लोगों से उनके पैतृक स्थान, चंद्रभागा किनारे बसने की मियाद, सुविधा और परिवारों की संख्या के बारे में पूछताछ की। कुछ लोगों ने बताया कि पूर्व पालिका प्रशासन की मदद से शौचालय का निर्माण किया गया। उक्त राशि चेक के माध्यम से लोगों को मुहैया कराई गई थी। नगर आयुक्त ने सुनवाई में आए लोगों से पूछा कि पूर्व में जमीन आवंटन के लिए किसी बड़े अधिकारी से फरियाद की। इस पर लोगों ने बताया कि करीब सन 1987 से वे वहां रह रहे हैं। उस दौरान लगभग 10 झुग्गी झोपड़ियां हुआ करती थीं। देखते ही देखते लोग आते गए और पूरी बस्ती स्थापित हो गई।
सियासी शतरंज में बड़ा वोट बैंक तैयार कर दिया गया
चंद्रभाग नदी में अवैध बस्तियों की बुनियाद सियासी पैंतरे के चलते पड़ी। यहां लोगों को धीरे धीरे बसाकर निर्वाचन कार्ड से लेकर आधार कार्ड तक बनवा दिए गए। इसके अलावा बेरोकटोक बिजली कनेक्शन भी दिलवा दिए गए। यहां बस चुके करीब 350 परिवार रह रहे हैं। प्रत्येक परिवार में 4 से दस सदस्य हैं। इस लिहाज से चंद्रभागा में बड़ा वोटबैंक पलने लगा। खास बात ये है कि यहां रहने वाले ज्यादातर लोग बिहार और उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के हैं। सभी ने मूल निवास को छोड़ ऋषिकेश के पते पर पहचान पत्र बनवा रखे हैं। सुनवाई के दौरान लोगों ने बताया कि उनके पैतृक निवास पर घर और कुछ न कुछ जमीन भी है। परिवार के बाकी सदस्य वहां निवास कर रहे हैं।
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चंद्रभागा पुल के नीचे बसी बस्ती से गरीब बस्ती को उजाड़ा नहीं जाएगा। सभी तथ्यों की जांच के बाद भौतिक निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद जो भी न्यायोचित कदम उठाया जाएगा।

-अनिता ममगाईं, मेयर, नगम निगम ऋषिकेश
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चंद्रभागा नदी के तट पर बसे सभी परिवारों का पक्ष सुना गया है। अभी कुछ लोग सुनवाई में नहीं आ पाए हैं। जो लोग नहीं पहुंचे हैं उनके बारे में माना जाएगा कि उन्हें अपने पक्ष में कुछ नहीं कहना है। रिपोर्ट तैयार करने के बाद एनजीटी को भेजी जाएगी। इसके बाद जो भी अग्रिम आदेश होंगे उसका पालन किया जाएगा।
-चतर सिंह चौहान, नगर आयुक्त, ऋषिकेश

सुनवाई के लिए उमड़े चंद्रभागा में रहने वाले लोग।

सुनवाई के लिए उमड़े चंद्रभागा में रहने वाले लोग। - फोटो : RISHIKESH

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