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Rishikesh News: बैंड की धुन पर थिरके साधक
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अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के छठे दिन की शाम उत्तराखंड के प्रसिद्ध पांडवाज बैंड के नाम रही। जिसकी प्रस्तुति में उत्तराखंड की संस्कृति की झलक देखने को मिली। वहीं योग महोत्सव में देश-विदेश से पहुंचे योग साधक कार्यक्रम की प्रस्तुति का इंतजार करते रहे।
बुधवार को योग महोत्सव की शुरुआत प्रात: कालीन योग सत्र से की गई। सुबह रोजाना की तरह योग के विभिन्न आसन सभी साधकों को सिखाए गए। इसके बाद ध्यान सत्र शुरू किया गया। जिसमें योग गुरु कपिल सांगी ने ध्यान के विभिन्न स्वरूप साधकों को सिखाए।
वहीं महोत्सव में हास्य योगा भी सुर्खियां बटोर रहा है। इसलिए बुधवार को भी हास्य योग का सत्र साधकों के लिए महत्वपूर्ण रहा। इसके अलावा महोत्सव में नाद योग हीलिंग का विशेष सत्र आयोजित किया गया। जिसमें योग गुरु डॉ. नवदीप जोशी ने व्याख्यान दिए। बताया कि मन को स्थिर रखने के लिए ओम का आविष्कार हुआ है और ओम ही वह शक्ति है जो मन को एकाग्रचित करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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दोपहर विश्राम के बाद रोजाना की तरह भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। इसके बाद संध्याकालीन गंगा आरती ने महोत्सव प्रांगण के वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम में पांडवाज बैंड की प्रस्तुति शुरू होते ही योग साधक थिरकने लगे। स्थानीय लोग भी बैंड की प्रस्तुति को देखने के लिए पहुंचने लगे।
पांडवाज बैंड ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी प्रस्तुतियों के कारण ही विशिष्ट पहचान बनाई है। उत्तराखंड के इतिहास, परंपरा और संस्कृति को अपने गीत-संगीत के जरिए प्रस्तुत करने के कारण ही इस बैंड की प्रस्तुति सराही जाती है। ऋषिकेश योग महोत्सव में भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र पांडवाज बैंड की प्रस्तुति रही।
बुधवार को योग महोत्सव की शुरुआत प्रात: कालीन योग सत्र से की गई। सुबह रोजाना की तरह योग के विभिन्न आसन सभी साधकों को सिखाए गए। इसके बाद ध्यान सत्र शुरू किया गया। जिसमें योग गुरु कपिल सांगी ने ध्यान के विभिन्न स्वरूप साधकों को सिखाए।
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वहीं महोत्सव में हास्य योगा भी सुर्खियां बटोर रहा है। इसलिए बुधवार को भी हास्य योग का सत्र साधकों के लिए महत्वपूर्ण रहा। इसके अलावा महोत्सव में नाद योग हीलिंग का विशेष सत्र आयोजित किया गया। जिसमें योग गुरु डॉ. नवदीप जोशी ने व्याख्यान दिए। बताया कि मन को स्थिर रखने के लिए ओम का आविष्कार हुआ है और ओम ही वह शक्ति है जो मन को एकाग्रचित करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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दोपहर विश्राम के बाद रोजाना की तरह भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। इसके बाद संध्याकालीन गंगा आरती ने महोत्सव प्रांगण के वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम में पांडवाज बैंड की प्रस्तुति शुरू होते ही योग साधक थिरकने लगे। स्थानीय लोग भी बैंड की प्रस्तुति को देखने के लिए पहुंचने लगे।
पांडवाज बैंड ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी प्रस्तुतियों के कारण ही विशिष्ट पहचान बनाई है। उत्तराखंड के इतिहास, परंपरा और संस्कृति को अपने गीत-संगीत के जरिए प्रस्तुत करने के कारण ही इस बैंड की प्रस्तुति सराही जाती है। ऋषिकेश योग महोत्सव में भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र पांडवाज बैंड की प्रस्तुति रही।