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Rishikesh News: पानी के लिए आंदोलन की तैयारी
Sat, 25 Jan 2025 01:02 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sat, 25 Jan 2025 01:02 AM IST
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विकासखंड यमकेश्वर में करीब दो दर्जन गांवों के ग्रामीण पेयजल किल्लत से जूझ रहे हैं। क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए जल निगम की ओर से बनाई जा रही जुलेडी पंपिंग योजना का निर्माण कार्य डेढ़ वर्ष से बंद है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन निर्माण कार्य पूर्ण किए जाने का सिर्फ आश्वासन देता है। लेकिन कार्य शुरू नहीं किया जा रहा है। अब स्थानीय निवासी आंदोलन का मन बना रहे हैं।
पेयजल निगम कोटद्वार की ओर से बैरागढ़ में अक्तूबर 2022 में करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से जल जीवन मिशन योजना के तहत जुलेडी पंपिंग योजना का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। निर्माण कार्य के तहत डब्ल्यूटीपी (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) बन कर तैयार होने की कगार पर था लेकिन 20 अगस्त 2023 में वह आपदा की भेंट चढ़ गया। तब से अभी तक दोबारा इस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया।
इस योजना से नीलकंठ न्याय पंचायत के करीब दो दर्जन गांवों के 800 परिवारों को पेयजल आपूर्ति होनी थी। इन गांवों में अभी भारी पेयजल किल्लत बनी हुई है। गर्मियों में ग्रामीण पानी के लिए तरस जाते हैं।
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योजना में ये काम हैं शेष
टैंक निर्माण के अलावा इस योजना में आंतरिक पंपिंग स्टेशन निर्माण, पेयजल लाइन निर्माण का कार्य भी अभी आधा- अधूरा है। जबकि आपदा में बहे डब्ल्यूटीपी का कार्य नए सिरे से नए स्थान पर होना है।
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निर्माण एजेंसी को ब्लैक लिस्ट किए जाने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन ने निर्माणदायी एजेंसी को ब्लैक लिस्ट किए जाने की मांग भी की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया है। निर्माण कार्य में भी लापरवाही बरती गई है। पेयजल लाइन के पाइप जमीन की सतह पर पाइप रखे गए हैं। विभागीय अधिकारियों पर भी निर्माण कार्यों का निरीक्षण न किए जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है।
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जुलेडी पंपिंग योजना के प्रति विभाग लापरवाह बना हुआ है। योजना में वित्तीय अनियमितता की भी आशंका है। संबंधित विभाग जानबूझ कर निर्माण कार्य लटका रहा है। जिसका खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। - अनिल असवाल, दिउली
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गर्मियों में ग्रामीण पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस जाते हैं। कई किमी दूर प्राकृतिक स्रोतों से पानी ढोना पड़ता है। विभाग परियोजना निर्माण को जानबूझ लटका रहा है। अब आंदोलन किया जाएगा। - हरदीप कैंतुरा, बस्टोंला
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योजना का निर्माण अन्यत्र स्थान पर किए जाने के लिए शासन को पुन: प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई है। निर्माण कार्य के लिए भूमि भी मिल गई है। 10-15 दिन के भीतर कार्य शुरु कर दिया जाएगा। -मो. मीशम, अधीक्षण अभियंता, जल निगम पौड़ी
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पेयजल निगम कोटद्वार की ओर से बैरागढ़ में अक्तूबर 2022 में करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से जल जीवन मिशन योजना के तहत जुलेडी पंपिंग योजना का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। निर्माण कार्य के तहत डब्ल्यूटीपी (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) बन कर तैयार होने की कगार पर था लेकिन 20 अगस्त 2023 में वह आपदा की भेंट चढ़ गया। तब से अभी तक दोबारा इस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया।
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इस योजना से नीलकंठ न्याय पंचायत के करीब दो दर्जन गांवों के 800 परिवारों को पेयजल आपूर्ति होनी थी। इन गांवों में अभी भारी पेयजल किल्लत बनी हुई है। गर्मियों में ग्रामीण पानी के लिए तरस जाते हैं।
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योजना में ये काम हैं शेष
टैंक निर्माण के अलावा इस योजना में आंतरिक पंपिंग स्टेशन निर्माण, पेयजल लाइन निर्माण का कार्य भी अभी आधा- अधूरा है। जबकि आपदा में बहे डब्ल्यूटीपी का कार्य नए सिरे से नए स्थान पर होना है।
निर्माण एजेंसी को ब्लैक लिस्ट किए जाने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन ने निर्माणदायी एजेंसी को ब्लैक लिस्ट किए जाने की मांग भी की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया है। निर्माण कार्य में भी लापरवाही बरती गई है। पेयजल लाइन के पाइप जमीन की सतह पर पाइप रखे गए हैं। विभागीय अधिकारियों पर भी निर्माण कार्यों का निरीक्षण न किए जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है।
जुलेडी पंपिंग योजना के प्रति विभाग लापरवाह बना हुआ है। योजना में वित्तीय अनियमितता की भी आशंका है। संबंधित विभाग जानबूझ कर निर्माण कार्य लटका रहा है। जिसका खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। - अनिल असवाल, दिउली
गर्मियों में ग्रामीण पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस जाते हैं। कई किमी दूर प्राकृतिक स्रोतों से पानी ढोना पड़ता है। विभाग परियोजना निर्माण को जानबूझ लटका रहा है। अब आंदोलन किया जाएगा। - हरदीप कैंतुरा, बस्टोंला
योजना का निर्माण अन्यत्र स्थान पर किए जाने के लिए शासन को पुन: प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई है। निर्माण कार्य के लिए भूमि भी मिल गई है। 10-15 दिन के भीतर कार्य शुरु कर दिया जाएगा। -मो. मीशम, अधीक्षण अभियंता, जल निगम पौड़ी