फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Rishikesh News ›   Now post mortem of dead bodies will be done without dissection, AIIMS Rishikesh has invented a new method

Rishikesh: अब बगैर चीर-फाड़ के होगा शव का पोस्टमार्टम, एम्स ऋषिकेश ने ईजाद की नई विधि

Sun, 20 Apr 2025 12:10 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Updated Sun, 20 Apr 2025 12:10 PM IST
सार

पारंपरिक विधि से पोस्टमार्टम के लिए शव को गले से पेट तक चीरना पड़ता है। साथ ही सिर वाले हिस्से में भी चीर-फाड़ करनी पड़ती है।

विज्ञापन
Now post mortem of dead bodies will be done without dissection, AIIMS Rishikesh has invented a new method
एम्स ऋषिकेश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बगैर चीर-फाड़ के अब शव का पोस्टमार्टम होगा। एम्स ऋषिकेश ने पोस्टमार्टम की नई विधि ईजाद की है। इसमें लेप्रोस्कोपी, एंडोस्कोपी और सीटी स्कैन के संयुक्त सहयोग से बिना चीर-फाड़ के पोस्ट मार्टम किया जा सकेगा। एम्स के विशेषज्ञों का दावा है कि यह विधि पारंपरिक विधि से ज्यादा सटीक है।

विज्ञापन


पारंपरिक विधि से पोस्टमार्टम के लिए शव को गले से पेट तक चीरना पड़ता है। साथ ही सिर वाले हिस्से में भी चीर-फाड़ करनी पड़ती है। पोस्टमार्टम के लिए मृत शरीर की चीर-फाड़ से परिजनों की भावनाएं आहत होती हैं। जिससे कई बार परिजन पोस्टमार्टम के लिए इंकार भी करते हैं।
विज्ञापन


इन सब बातों को देखते हुए एम्स के विशेषज्ञों ने पोस्टमार्टम की एक नई विधि ईजाद की है, जिसे मिनिमली इनवेसिव ऑटोप्सी का नाम दिया गया है। एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के डाॅ. आशीष बताते हैं कि काफी समय से ऐसी कोशिशें चल रही थी कि पोस्टमार्टम के दौरान कम से कम चीर-फाड़ की जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


Haridwar News: धर्म संसद में हेट स्पीच मामले में वसीम रिजवी उर्फ नारायण त्यागी दोषमुक्त, जानें पूरा मामला


कई चिकित्सा संस्थानों में सीटी स्कैन के माध्यम से पोस्टमार्टम किया जा रहा है। लेकिन कुछ मामलों में सीटी स्कैनर के बावजूद भी अंदरूनी जांच, विसरा और बाॅयोप्सी के लिए चीर-फाड़ करनी पड़ती है। ऐसे में विचार आया कि सीटी स्कैन के साथ लेप्रोस्कोपी और एंडोस्कोपी के माध्यम से पोस्टमार्टम कर सकते हैं। जिससे बिना चीर-फाड़ के आंतरिक अंगों का परीक्षण तथा बाॅयोप्सी की जा सकती है। इस विधि की शुरुआत करने के लिए विभागाध्यक्ष डॉ. बिनय बस्तियां और संस्थान की डायरेक्टर प्रोफेसर मीनू सिंह का पूरा सहयोग रहा।



क्या है मिनिमली इनवेसिव ऑटोप्सी
डाॅ. आशिष भूते बताते हैं कि इस तकनीक में सीटी स्कैन करने के बाद शव के आंतरिक अंगों की जांच के लिए मृत शरीर पर कुछ जगहों पर करीब दो-दो सेंटीमीटर के छिद्र किए जाते हैं। इन छेदों से लेप्रोस्कोपिक या एंंडोस्कोपिक दूरबीन डाली जाती है। पेट के अंदर के अंगों का परीक्षण कर सकते हैं। एंडोस्कोपी से अंगों की कैविटी को देखा जा सकता है। यौन संबंधी मामलों में गुप्तांगों के भीतर देखा जा सकता है। पहले इन अंगों के भीतरी भाग को देखने के लिए इन्हें काटना पड़ता था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed