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आउटसोर्स कर्मियों ने लगाया उत्पीड़न का आरोप
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श्रम प्रवर्तन अधिकारी से वार्ता करते पार्षद और अन्य।
- फोटो : RISHIKESH
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नगर निगम में आउटसोर्स से कार्यरत कर्मचारियों ने उत्पीड़न आरोप लगा श्रम विभाग से शिकायत की है। कर्मियों का कहना है कि उन्हें न तो निर्धारित वेतन दरों से भुगतान किया जा रहा है और न समय पर अवकाश दिया जा रहा है। इस पर श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों की सुनवाई का आश्वासन दिया है।
मंगलवार को श्रम कार्यालय में भारतीय मजदूर संघ के राम चंद्र खंडूड़ी ने श्रम प्रवर्तन अधिकारी राम छट्ठू को शिकायती पत्र में बताया कि नगर निगम में 16 मई 2017 से 31 मार्च 2019 तक साइनाथ इंटर प्राइजेज ने कार्मिक उपलब्ध कराए थे। इसके लिए प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की गई। उक्त फर्म का अनुबंध समाप्त होने के बाद 15 जुलाई 2019 से मैसर्ज हिमालय इलेक्ट्रिकल्स एंड सिविल इंजीनियरिंग वर्क्स के साथ निगम का समझौता हुआ। मगर, उक्त फर्म ने पूर्व में दिए जा रहे वेतन में कटौती कर दी। उन्होंने बताया कि हिमालय इलेक्ट्रिकल्स एंड सिविल इंजीनियरिंग वर्क्स की ओर से अनुबंध में निर्धारित वेतन दरों के हिसाब से भुगतान नहीं किया जा रहा है।
पार्षद मनीष शर्मा ने कहा कि उक्त मामले में नगर निगम की भूमिका भी संदिग्ध है। पूर्व में आउटसोर्स कर्मचारियों को सैलरी अनुबंध के हिसाब से मिलती थी। मगर, अब सैलरी बढ़ाने के बजाय घटा दी गई। जनप्रतिनिधि रविंद्र बिरला ने अनुबंधकर्ता पर कर्मचारियों को साप्ताहिकअवकाश न देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस मामले में जब कर्मचारियों ने अपनी बात रखनी चाही तो उन्हें धमकाया जाता है।
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‘श्रम विभाग की दरों से किया जा रहा भुगतान’
वहीं, अनुबंधकर्ता राजेश कंडवाल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पूर्व में टेंडर पीडब्ल्यूडी की दरों के हिसाब से किया गया था। जबकि, इस बार के टेंडर में श्रम विभाग की दरों के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा किसी भी कर्मचारी का अवकाश नहीं रोका जा रहा है और न ही धमकाया जा रहा है। इस पर श्रम प्रवर्तन अधिकारी राम छट्ठू ने कहा कि मामले में नगर निगम का पक्ष आना भी महत्वपूर्ण है। लिहाजा, अनुबंधकर्ता राजेश कंडवाल को नगर आयुक्त से वार्ता कर उनका पक्ष रखने को कहा है। उन्होंने कहा कि मामले का निस्तारण नहीं होने पर लेबर कोर्ट को ट्रांसफर किया जाएगा।
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मंगलवार को श्रम कार्यालय में भारतीय मजदूर संघ के राम चंद्र खंडूड़ी ने श्रम प्रवर्तन अधिकारी राम छट्ठू को शिकायती पत्र में बताया कि नगर निगम में 16 मई 2017 से 31 मार्च 2019 तक साइनाथ इंटर प्राइजेज ने कार्मिक उपलब्ध कराए थे। इसके लिए प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की गई। उक्त फर्म का अनुबंध समाप्त होने के बाद 15 जुलाई 2019 से मैसर्ज हिमालय इलेक्ट्रिकल्स एंड सिविल इंजीनियरिंग वर्क्स के साथ निगम का समझौता हुआ। मगर, उक्त फर्म ने पूर्व में दिए जा रहे वेतन में कटौती कर दी। उन्होंने बताया कि हिमालय इलेक्ट्रिकल्स एंड सिविल इंजीनियरिंग वर्क्स की ओर से अनुबंध में निर्धारित वेतन दरों के हिसाब से भुगतान नहीं किया जा रहा है।
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पार्षद मनीष शर्मा ने कहा कि उक्त मामले में नगर निगम की भूमिका भी संदिग्ध है। पूर्व में आउटसोर्स कर्मचारियों को सैलरी अनुबंध के हिसाब से मिलती थी। मगर, अब सैलरी बढ़ाने के बजाय घटा दी गई। जनप्रतिनिधि रविंद्र बिरला ने अनुबंधकर्ता पर कर्मचारियों को साप्ताहिकअवकाश न देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस मामले में जब कर्मचारियों ने अपनी बात रखनी चाही तो उन्हें धमकाया जाता है।
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‘श्रम विभाग की दरों से किया जा रहा भुगतान’
वहीं, अनुबंधकर्ता राजेश कंडवाल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पूर्व में टेंडर पीडब्ल्यूडी की दरों के हिसाब से किया गया था। जबकि, इस बार के टेंडर में श्रम विभाग की दरों के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा किसी भी कर्मचारी का अवकाश नहीं रोका जा रहा है और न ही धमकाया जा रहा है। इस पर श्रम प्रवर्तन अधिकारी राम छट्ठू ने कहा कि मामले में नगर निगम का पक्ष आना भी महत्वपूर्ण है। लिहाजा, अनुबंधकर्ता राजेश कंडवाल को नगर आयुक्त से वार्ता कर उनका पक्ष रखने को कहा है। उन्होंने कहा कि मामले का निस्तारण नहीं होने पर लेबर कोर्ट को ट्रांसफर किया जाएगा।