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Rishikesh News: चंद्रेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव ने चंद्रमा को किया था श्राप मुक्त
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Iचंद्रमा को मस्तक पर धारण करने से नाम पड़ा चंद्रेश्वर महादेवI
महाशिवरात्रि पर्व पर चंद्रेश्वर महादेव मंदिर में भी शिवभक्तों की भीड़ उमड़ती है। सुबह से मंदिर में जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों की लाइन लगती है। मान्यता है कि मंदिर में दर्शन करने से भक्तों को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
चंद्रेश्वर महादेव मंदिर का पौराणिक इतिहास है। पंडित भवानी दत्त ने बताया कि स्कंद पुराण के केदारखंड में वर्णित है कि चंद्रमा को गौतम ऋषि ने कुष्ट रोग होने का श्राप दिया था। श्राप से मुक्ति पाने के लिए चंद्रदेव ने पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा की, लेकिन उन्हें श्राप से मुक्त नहीं मिली। फिर उसके बाद चंद्रदेव यहां आए। श्राप मुक्त होने के लिए उन्होंने यहां रहकर करीब दस दिव्य वर्षों तक तपस्या की। भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें यहां दर्शन दिए और चंद्रदेव को श्राप मुक्त किया।
इसी स्थान पर भगवान शिव ने उन्हें दोबारा अपने मस्तक पर धारण किया। तब से इस स्थान का नाम चंद्रेश्वर महादेव विख्यात हो गया। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां आकर चंद्रेश्वर महादेव के दर्शन कर उनके कोई प्रार्थना करते हैं तो भगवान शिव उनकी मनोकामना पूरी करते हैं। तब से लेकर अब तक यहां शिवभक्तों की भीड़ उमड़ती है।
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महाशिवरात्रि पर्व पर चंद्रेश्वर महादेव मंदिर में भी शिवभक्तों की भीड़ उमड़ती है। सुबह से मंदिर में जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों की लाइन लगती है। मान्यता है कि मंदिर में दर्शन करने से भक्तों को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
चंद्रेश्वर महादेव मंदिर का पौराणिक इतिहास है। पंडित भवानी दत्त ने बताया कि स्कंद पुराण के केदारखंड में वर्णित है कि चंद्रमा को गौतम ऋषि ने कुष्ट रोग होने का श्राप दिया था। श्राप से मुक्ति पाने के लिए चंद्रदेव ने पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा की, लेकिन उन्हें श्राप से मुक्त नहीं मिली। फिर उसके बाद चंद्रदेव यहां आए। श्राप मुक्त होने के लिए उन्होंने यहां रहकर करीब दस दिव्य वर्षों तक तपस्या की। भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें यहां दर्शन दिए और चंद्रदेव को श्राप मुक्त किया।
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इसी स्थान पर भगवान शिव ने उन्हें दोबारा अपने मस्तक पर धारण किया। तब से इस स्थान का नाम चंद्रेश्वर महादेव विख्यात हो गया। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां आकर चंद्रेश्वर महादेव के दर्शन कर उनके कोई प्रार्थना करते हैं तो भगवान शिव उनकी मनोकामना पूरी करते हैं। तब से लेकर अब तक यहां शिवभक्तों की भीड़ उमड़ती है।
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