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चारधाम यात्रियों की सुरक्षा परियोजना ठंडे बस्ते में
हेमवती नंदन भ्ाट्ट /अमर उजाला, ऋषिकेश
Updated Fri, 22 Apr 2016 01:06 PM IST
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चारधाम यात्रियों की सुरक्षा परियोजना ठंडे बस्ते में
- फोटो : file photo
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चाराधाम यात्रा के लिए तीर्थनगरी आने वाले यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण चारधाम यात्रा रजिस्ट्रेशन कम ट्रांजिट कैंप परियोजना दो साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई है। आपदा के बाद उत्तराखंड आने वाले पर्यटक और तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा के लिए तत्कालीन राज्य सरकार और पर्यटन विभाग ने दावे तो किया, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
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स्थिति यह है कि प्रोजेक्ट को वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद इसका निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। पर्यटन विभाग परियोजना के लिए भूमि हस्तांतरण में वन विभाग का पेच बता रहा है।
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जून 2013 की जलप्रलय में हुई भारी जन धन हानि के बाद भी राज्य सरकार ने कोई सबक नहीं लिया।
इसके बाद शासन और पर्यटन विभाग ने चारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए चारधाम यात्रा रजिस्ट्रेशन कम ट्रांजिट कैंप परियोजना तैयार करने का दावा किया था। इसके लिए चारधाम यात्रा रजिस्ट्रेशन कम ट्रांजिट कैंप प्रोजेक्ट भी तैयार किया गया।
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संयुक्त यात्रा बस ट्रांजिट कंपाउंड के समीप खाली पड़ी वन भूमि को इसके लिए चिह्नित भी किया गया। वर्ष 2014-15 में प्रस्तावित 12.50 करोड़ की इस योजना में करीब आधा बजट टीएचडीसी को खर्च करना है। राज्य सरकार से 2015-16 में इसकी आधी धनराशि 6.25 करोड़ की वित्तीय मंजूरी भी दी जा चुुकी है। इसके बावजूद योजना का अभी तक कहीं अता पता नहीं है।
क्या थी योजना
देवभूमि उत्तराखंड के प्रवेश द्वार ऋषिकेश में प्रस्तावित चारधाम यात्रा रजिस्ट्रेशन कम ट्रांजिट कैंप परियोजना के तहत एक ही छत के नीचे विभिन्न धामों के यात्रियों का पंजीकरण से लेकर मेडिकल चेकअप, यात्रा की कंट्रोलिंग, मॉनिटरिंग आदि कार्य होने हैं। यात्रियों के फोटोमीट्रिक पंजीकरण के लिए 22 काउंटरों का निर्माण किया जाना है।
साथ ही मेडिकल रिलीफ सेंटर भी बनना है। जिसमें स्वास्थ्य परीक्षण कराने के बाद ही यात्री धामों को रवाना हो सकेंगे। इसी बिल्डिंग में चारो धामों की यात्रा का कंट्रोल रूम का निर्माण होना है। इसमें यात्रा की संपूर्ण मॉनिटरिंग, सुरक्षा, आपदा नियंत्रण कक्ष और यात्री वाहनों और यात्रियों की ट्रेकिंग का अत्याधुनिक सिस्टम स्थापित किया जाना है।
ताकि प्रत्येक धाम को जाने वाले यात्री और वाहनों की पल-पल की लोकेशन की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो सके। लेकिन शासन और पर्यटन विभाग की लेट लतीफी से यात्री सुरक्षा परियोजना ठंडे बस्ते में है।
इनका कहना है
चारधाम यात्रा रजिस्ट्रेशन कम ट्रांजिट कैंप परियोजना में देरी हुई है। इसके लिए वित्तीय मंजूरी भी मिल चुकी है। भूमि का चयन सात महीने पहले कर लिया गया है। वर्तमान में वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही विभाग के नोडल अधिकारी भारत सरकार से भूमि हस्तांतरित हो जाएगी, शीघ्र कार्य प्रारंभ करा दिया जाएगा।
- योगेंद्र कुमार गंगवार, उप निदेशक, पर्यटन विभाग, देहरादून