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उधार के ब्रिज में हवाई दावा
ब्यूरो, अमर उजाला/ऋषिकेश
Updated Tue, 29 Dec 2015 02:06 AM IST
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विकास कार्यों को लेकर सरकार के रवैये का अंदाजा तीर्थनगरी में गंगा पर निर्माणाधीन थ्रीलेन ब्रिज परियोजना से सहज ही लगाया जा सकता है। तीन साल पहले स्वीकृत ब्रिज के लिए सरकार अभी तक महज 30 फीसदी धन का ही आवंटन कर सकी है। जबकि निर्माण एजेंसी पुल का कार्य लगभग 55 फीसदी पूरा कर चुकी है।
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ठेकेदार के करीब आठ करोड़ के नीचे दबी सरकार उसे नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं कर रही। लिहाजा धन के अभाव में निर्माण एजेंसी सरकार से ब्रिज परियोजना को जून 2016 तक एक्सटेंशन देने की मांग कर रही है। लेकिन सरकार के मुखिया पुल का कार्य मार्च तक पूरा होने का हवाई दावा कर रहे हैं।
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दो दिन पहले तीर्थनगरी आए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तीर्थनगरी में निर्माणाधीन थ्रीलेन पुल का कार्य मार्च 2016 तक पूरा कराने का दावा किया था। जबकि, धरातलीय हकीकत इससे जुदा है। जिस पुल को सरकार निर्माण एजेंसी से उधार में बनवा रही है, नोटिस केे बावजूद ठेकेदार को न तो ठोस जवाब मिल रहा है और न ही अवशेष धनराशि का भुगतान किया जा रहा है।
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ऐसे में करोड़ों की इस परियोजना के बाबत मुख्यमंत्री का दावा हवाई प्रतीत होता है। परियोजना की हकीकत यह है कि जनवरी 2013 में राज्य सेक्टर से स्वीकृत करीब 36 करोड़ के थ्रीलेन झूला पुल के लिए सरकार तीन साल बाद भी महज तीस प्रतिशत, यानी 13 करोड़ का धनावंटन कर पाई है।
जबकि ब्रिज साइट पर कांट्रैक्टर ने परियोजना का करीब 55 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया। सीधे तौर पर कहा जाए तो निर्माण एजेंसी लगभग 21 करोड़ का कार्य पूरा करा चुकी है। लिहाजा उसका सरकार और लोक निर्माण विभाग पर करीब आठ करोड़ का बकाया है।
एजेंसी बकाया भुगतान के लिए विभाग को दो नोटिस जारी कर चुकी है, मगर उसे भुगतान नहीं हो पा रहा। विभागीय सूत्रों की मानें तो अब निर्माण एजेंसी परियोजना पर और धन लगाने की स्थिति में नहीं है। लिहाजा उसने ब्रिज निर्माण कार्य पूर्ण कराने की अवधि मार्च की बजाए जून 2016 करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है।
लेकिन इसके उलट योजना के निर्माण में लेटलतीफी के चलते तीर्थ क्षेत्र में आने वाले सैलानियों की दिक्कतों के दृष्टिगत बजट देकर ब्रिज पूरा कराने की बजाए सरकार के मुखिया तकनीकी दिक्कतों को नजरअंदाज करते हुए हवाई दावा कर गए।
तारीखों में जानकी सेतु
जनवरी - 2013 में थ्रीलेन ब्रिज को मंजूरी
मार्च - 2013 में ब्रिज साइट पर परियोजना का उद्घाटन
जून - 2013 में ब्रिज के लिए चयनित साइट बही
फरवरी - 2014 ब्रिज की नई साइट पर शिलान्यास
मई-जून - 14 निर्माण कार्य प्रारंभ
अर्द्धकुंभ में जूझेंगे श्रद्धालु
ब्रिज परियोजना को लेकर सरकार और लोक निर्माण विभाग की शुरू से चली आ रही हीलाहवाली आसन्न अर्द्धकुंभ मेला 2016 में तीर्थनगरी के दर्शन और गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं पर भारी पड़ेगी।
सरकार ने न तो ब्रिज को निर्धारित डेड लाइन अगस्त 2015 तक पूरा कराया और न ही कुंभ विकास कार्यों के तहत मुनिकीरेती में बनने वाले अस्थायी पांटून पुलों को ही मंजूरी दी। ऐसे में श्रद्धालुओं को स्वर्गाश्रम जाने-आने के लिए लगभग चार किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।