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Rishikesh News: ऋषिकेश के 18 वार्डों में 135 करोड़ से बिछेगा आधुनिक पेयजल नेटवर्क
Mon, 26 Oct 2026 07:01 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Mon, 26 Oct 2026 07:01 PM IST
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- 105 किमी नई पाइपलाइन बिछेगी, स्काडा सिस्टम से लीकेज का तुरंत चलेगा पता
- नगर निगम क्षेत्र के 14 हजार घरों के करीब 60 हजार लोगों को मिलेगा लाभ
ऋषिकेश। नगर निगम क्षेत्र के 18 वार्डों में पेयजल की बरबादी और बार-बार सड़कों की खोदाई की समस्या से निजात दिलाने के लिए 135 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक पेयजल नेटवर्क विकसित किया जाएगा। जर्मन बैंक केएफडब्ल्यू से वित्त-पोषित इस योजना के तहत चार दशक पुरानी पेयजल लाइनों को बदलकर 105 किमी लंबी नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी। पूरा नेटवर्क सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (स्काड) सिस्टम से लैस होगा जिससे पेयजल लाइनों में लीकेज और तकनीकी खराबी का पता आसानी से लगाया जा सकेगा। उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी (यूयूएसडीए) की ओर से तैयार इस योजना को आगामी 35 वर्षों की आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। योजना के लिए 135 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हो चुका है। इसके क्रियान्वयन के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं और निर्माण एजेंसी के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यूयूएसडीए के अनुसार, कुंभ मेले के बाद योजना का निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। योजना के तहत पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए छह नए नलकूप स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा 1700-1700 किलोलीटर क्षमता की दो और 500 किलोलीटर क्षमता की एक नई पेयजल टंकी का निर्माण किया जाएगा। पुरानी टंकियों की मरम्मत भी योजना में शामिल है। पेयजल लाइनों का व्यास न्यूनतम 100 मिलीमीटर और अधिकतम 450 मिलीमीटर रखा जाएगा, ताकि जरूरत के अनुसार पर्याप्त पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। योजना की प्रमुख विशेषता पेयजल आपूर्ति नेटवर्क का कंप्यूटराइजेशन और सेंसर आधारित निगरानी व्यवस्था है। स्काडा सिस्टम के माध्यम से पाइपलाइन में लीकेज या अन्य तकनीकी खराबी वाले स्थान की पहचान करना आसान होगा। इससे खराबी का पता लगाने के लिए बार-बार सड़कों की खाेदाई करने की जरूरत कम होगी। साथ ही पेयजल की बरबादी रोकने और आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी। योजना के तहत नगर निगम क्षेत्र के करीब 14 हजार घरों को आधुनिक पेयजल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे लगभग 60 हजार लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। योजना में वार्ड एक से 11, वार्ड 13 से 16 और वार्ड 28 को शामिल किया गया है। इसके अलावा वार्ड 14, 17 और 27 के आंशिक हिस्सों में भी काम किया जाएगा। निर्माण एजेंसी के चयन के बाद उसे सर्वे के लिए तीन का समय दिया जाएगा। इस दौरान योजना में पहले से चिह्नित कार्यों के साथ क्षेत्र की अन्य जरूरतों का भी आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर आवश्यक कार्यों को शामिल कर पेयजल नेटवर्क विकसित किया जाएगा। योजना पूरी होने के बाद शहर की पुरानी पेयजल व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और भविष्य की बढ़ती आबादी की जरूरतों के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
उक्त योजना केएफडब्ल्यू से वित्तपोषित है। टेंडर की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। निर्माण एजेंसी हायर कर तीन माह का सर्वे होगा। कुंभ मेले के बाद चिन्हित वार्डों में निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। - जतिन, प्रोजेक्ट मैनेजर, यूयूएसडीए देहरादून।
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- नगर निगम क्षेत्र के 14 हजार घरों के करीब 60 हजार लोगों को मिलेगा लाभ
ऋषिकेश। नगर निगम क्षेत्र के 18 वार्डों में पेयजल की बरबादी और बार-बार सड़कों की खोदाई की समस्या से निजात दिलाने के लिए 135 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक पेयजल नेटवर्क विकसित किया जाएगा। जर्मन बैंक केएफडब्ल्यू से वित्त-पोषित इस योजना के तहत चार दशक पुरानी पेयजल लाइनों को बदलकर 105 किमी लंबी नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी। पूरा नेटवर्क सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (स्काड) सिस्टम से लैस होगा जिससे पेयजल लाइनों में लीकेज और तकनीकी खराबी का पता आसानी से लगाया जा सकेगा। उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी (यूयूएसडीए) की ओर से तैयार इस योजना को आगामी 35 वर्षों की आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। योजना के लिए 135 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हो चुका है। इसके क्रियान्वयन के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं और निर्माण एजेंसी के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यूयूएसडीए के अनुसार, कुंभ मेले के बाद योजना का निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। योजना के तहत पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए छह नए नलकूप स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा 1700-1700 किलोलीटर क्षमता की दो और 500 किलोलीटर क्षमता की एक नई पेयजल टंकी का निर्माण किया जाएगा। पुरानी टंकियों की मरम्मत भी योजना में शामिल है। पेयजल लाइनों का व्यास न्यूनतम 100 मिलीमीटर और अधिकतम 450 मिलीमीटर रखा जाएगा, ताकि जरूरत के अनुसार पर्याप्त पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। योजना की प्रमुख विशेषता पेयजल आपूर्ति नेटवर्क का कंप्यूटराइजेशन और सेंसर आधारित निगरानी व्यवस्था है। स्काडा सिस्टम के माध्यम से पाइपलाइन में लीकेज या अन्य तकनीकी खराबी वाले स्थान की पहचान करना आसान होगा। इससे खराबी का पता लगाने के लिए बार-बार सड़कों की खाेदाई करने की जरूरत कम होगी। साथ ही पेयजल की बरबादी रोकने और आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी। योजना के तहत नगर निगम क्षेत्र के करीब 14 हजार घरों को आधुनिक पेयजल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे लगभग 60 हजार लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। योजना में वार्ड एक से 11, वार्ड 13 से 16 और वार्ड 28 को शामिल किया गया है। इसके अलावा वार्ड 14, 17 और 27 के आंशिक हिस्सों में भी काम किया जाएगा। निर्माण एजेंसी के चयन के बाद उसे सर्वे के लिए तीन का समय दिया जाएगा। इस दौरान योजना में पहले से चिह्नित कार्यों के साथ क्षेत्र की अन्य जरूरतों का भी आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर आवश्यक कार्यों को शामिल कर पेयजल नेटवर्क विकसित किया जाएगा। योजना पूरी होने के बाद शहर की पुरानी पेयजल व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और भविष्य की बढ़ती आबादी की जरूरतों के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
उक्त योजना केएफडब्ल्यू से वित्तपोषित है। टेंडर की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। निर्माण एजेंसी हायर कर तीन माह का सर्वे होगा। कुंभ मेले के बाद चिन्हित वार्डों में निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। - जतिन, प्रोजेक्ट मैनेजर, यूयूएसडीए देहरादून।
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