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24 साल पहले खुद मांसाहार छोड़ा, अब योग साधकों को करवा रहे परहेज

Fri, 04 Nov 2016 01:13 AM IST
manoj singh rana
manoj singh rana Updated Fri, 04 Nov 2016 01:13 AM IST
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Meat left himself 24 years ago, is now undergoing a regimen of yoga seekers
करवा रहे परहेज - फोटो : amar ujala

‘हमने कभी नहीं सोचा था कि 24 साल पहले की चारधाम यात्रा हमारे लिए इतनी सुखद होगी। विषम परिस्थितियों में भी भगवान के दर्शन करने के बाद भी भारतीयों के खिले चेहरे देख मन बहुत आनंदित हुआ। सोचा ऐसा क्या है भारतीय संस्कृति में जो लोग इतने खुश हैं, इसी खुुशी को जानने के लिए हर बार तीर्थनगरी ऋषिकेश घूमने आते हैं, हम अब तक 39 बार तीर्थनगरी आ चुके हैं।’ यह कहना है जर्मन दंपति मेनफ्रेट लॉरेंस और उनकी पत्नी क्रिस्टा लॉरेंस का।

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जर्मन दंपति ने बताया कि वर्ष 1972 से योग साधना में लीन होने के कारण वर्ष 1992 में पहली बार योगनगरी ऋषिकेश आए। यहां से वे चारधाम यात्रा पर निकले। बारिश के कारण यात्रा मार्ग जगह-जगह बंद पड़े थे। सड़क अवरुद्ध होने से सैकड़ों लोग अलग-अलग स्थानों फंसे हुए थे। हमें लगा कि मुश्किल में फंस गए हैं, लेकिन अन्य सभी लोगों के चेहरों पर खुशी थी। इस यात्रा ने हमारा हृदय परिवर्तन कर दिया। तब भारतीय संस्कृति से रूबरू होने का पहला अवसर मिला।
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भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत होकर मांसाहारी भोजन त्याग दिया। यही नहीं वह जर्मनी में भी अपने योग साधकों को मांसाहारी भोजन से परहेज करवा रहे हैं। बताया कि अब तक करीब 500 लोगों को मांसाहार से परहेज करवा चुके हैं। उन्होंने बताया कि जर्मनी में 90 फीसदी आबादी मांसाहारी है, यही नहीं जो योग करते हैं, वह भी भोजन में मांसाहार लेते हैं, लेकिन भारत की यात्रा करने के बाद से उन्होंने मांसाहारी भोजन से परहेज कर दिया है। बताया कि इससे सैकड़ों साधकों में जागरुकता आई और उन्होंने अपने भोजन में मांसाहार को दूर कर दिया। उन्होंने कहा कि जो योग साधक विभिन्न यौगकि मुद्राएं करने के बाद भी अपने भोजन में मांसाहार को शामिल करता है, उसके लिए योग सीखना व्यर्थ है। योगसाधक बनने के लिए साधक को मांसाहार का त्याग करना होगा।
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इन क्षेत्रों का किया भ्रमण
जर्मन दंपति ने बताया कि वह उत्तराखंड में चार बार बाबा केदारनाथ, एक बार बदरीनाथ, चार बार गोमुख, एक बार यमुनोत्री धाम के दर्शन कर चुके हैं, यही नहीं वह फूलों की घाटी, नीलकंठ, तुंगनाथ, चौबता, मसूरी समेत कई पर्यटक स्थलों की यात्रा कर चुके हैं। यह यात्राएं उनके लिए अविस्मरणीय हैं।

शास्त्रों की है जानकारी
जर्मन दंपति मेनफ्रेट और क्रिस्टा शास्त्रों की भी जानकारी रखते हैं, वह संगीत वाद्य यंत्र हारमोनिमय के साथ ही गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, भोजनमंत्र को कंठस्थ बोलते हैं। जर्मन दंपति ने मोक्षदायिनी के बारे में कहा कि मां गंगा पतित पावनी के साथ ही आस्था की  देवी है, इस देवी को प्रदूषण मुक्त करना हमारा परम कर्त्तव्य है।


भूले से भी नहीं भुलते गढ़वाली व्यंजन
जर्मन दंपति ने बताया कि उन्हें गढ़वाली व्यंजन बहुत पंसद हैं। उन्हें झंगोरे की खीर, मडवे की रोटी, चौसा, फांडौ के साथ ही चाय पकोड़ी बहुत पंसद है। जिनका वह योगनगरी आने के बाद अपने मित्र मनोज द्विवेदी के घर पर आने के बाद ही लुत्फ उठाती हैं। 

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