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भौतिक उपलब्धियां क्षणिक : माता सुदीक्षा
Sun, 19 Jul 2026 07:17 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sun, 19 Jul 2026 07:17 PM IST
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अंग्रेजी माध्यम जोनल स्तरीय समागम सम्पन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। संत निरंकारी मिशन शाखा ऋषिकेश में संत पीपी सिंह के नेतृत्व में अंग्रेजी माध्यम युवा अंग्रेजी जोनल स्तरीय संत समागम सम्पन्न हुआ।
समागम में जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह के दिशा निर्देशन में ऋषिकेश, ज्वालापुर, विकास नगर, चंबा, नरेंद्रनगर, कोटद्वार, भोगपुर, हरिद्वार, देहरादून, हल्दूखाता, ज्वालापुर, नई टिहरी, रायवाला, मसूरी, रुड़की, प्रेम नगर, क्षेत्रों से आए युवाओं और श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग किया।
संत पीपी सिंह ने सत्गुरु माता सुदीक्षा ने कहा कि ऋषिकेश सदियों से आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन और ईश्वर से जुड़ने की प्रेरणा का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी पवित्र स्थान का वास्तविक महत्व तभी सार्थक होता है, जब मनुष्य सत्गुरु की कृपा से निराकार परमात्मा की पहचान कर अपने वास्तविक स्वरूप अर्थात आत्मा का बोध प्राप्त करें।
उन्होंने कहा कि भौतिक उपलब्धियां और सांसारिक सफलता क्षणिक हैं, जबकि परमात्मा से एकत्व का अनुभव जीवन की सबसे बड़ी संपदा है। सिमरन, सतगुरु के मार्गदर्शन तथा सत्य को जीवन में अपनाकर प्रत्येक व्यक्ति इस दिव्य अनुभूति को प्राप्त कर सकता है। मानवता के कल्याण में अपना योगदान दे सकता है। इस अवसर पर सुदीक्षा चौहान, विकास आर्य आदि मौजूद रहे।
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अंग्रेजी माध्यम जोनल स्तरीय समागम सम्पन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। संत निरंकारी मिशन शाखा ऋषिकेश में संत पीपी सिंह के नेतृत्व में अंग्रेजी माध्यम युवा अंग्रेजी जोनल स्तरीय संत समागम सम्पन्न हुआ।
समागम में जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह के दिशा निर्देशन में ऋषिकेश, ज्वालापुर, विकास नगर, चंबा, नरेंद्रनगर, कोटद्वार, भोगपुर, हरिद्वार, देहरादून, हल्दूखाता, ज्वालापुर, नई टिहरी, रायवाला, मसूरी, रुड़की, प्रेम नगर, क्षेत्रों से आए युवाओं और श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग किया।
संत पीपी सिंह ने सत्गुरु माता सुदीक्षा ने कहा कि ऋषिकेश सदियों से आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन और ईश्वर से जुड़ने की प्रेरणा का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी पवित्र स्थान का वास्तविक महत्व तभी सार्थक होता है, जब मनुष्य सत्गुरु की कृपा से निराकार परमात्मा की पहचान कर अपने वास्तविक स्वरूप अर्थात आत्मा का बोध प्राप्त करें।
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उन्होंने कहा कि भौतिक उपलब्धियां और सांसारिक सफलता क्षणिक हैं, जबकि परमात्मा से एकत्व का अनुभव जीवन की सबसे बड़ी संपदा है। सिमरन, सतगुरु के मार्गदर्शन तथा सत्य को जीवन में अपनाकर प्रत्येक व्यक्ति इस दिव्य अनुभूति को प्राप्त कर सकता है। मानवता के कल्याण में अपना योगदान दे सकता है। इस अवसर पर सुदीक्षा चौहान, विकास आर्य आदि मौजूद रहे।
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