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वीवीपैट मशीनों में बंद हुई प्रत्याशियों की किस्मत
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मतदान की प्रक्रिया सपन्न होने के साथ अब विधानसभा प्रत्याशियों की किस्मत वीवीपैट मशीनों में बंद हो गई है। 10 मार्च में मतों की गिनती होने के बाद प्रत्याशियों को जनता का फैसला सुनाया जाएगा। हालांकि प्रत्याशी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के मतों का गुणा भाग कर पूर्वानुमान लगाने का प्रयास कर रहे हैं।
सोमवार को प्रत्याशी दिनभर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के मतदान केेंद्रों के फेरे लगाते रहे। मतदान केंद्रों में मतदान का प्रक्रिया पूरी होने तक प्रत्याशियों के एजेंट मुस्तैदी के साथ डटे रहे। वहीं मतदान केंद्रों के बाहर प्रत्याशियों के कांउटरों पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने मोर्चा संभाले रखा। शाम को मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्याशियों के कार्यालयों और आवासों पर बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ। प्रत्याशियों ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से फीडबैक लेकर उनके पक्ष में हुए मतदान का पूर्वानुमान गणित लगाने कोशिश की। कुछ प्रत्याशियों को उनके प्रति उम्मीद के मुताबिक मतदाताओं के रुझान में कमी चलते निराश भी हुई। बड़े राजनीतिक दलों के कैडर वोटर के भरोसे जीत के समीकरणों को भी टटोला। हालांकि 10 मार्च को जनादेश के बाद ही कौन जीता और किसके हिस्से हार आयी, इसका पता चल पाएगा।
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सोमवार को प्रत्याशी दिनभर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के मतदान केेंद्रों के फेरे लगाते रहे। मतदान केंद्रों में मतदान का प्रक्रिया पूरी होने तक प्रत्याशियों के एजेंट मुस्तैदी के साथ डटे रहे। वहीं मतदान केंद्रों के बाहर प्रत्याशियों के कांउटरों पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने मोर्चा संभाले रखा। शाम को मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्याशियों के कार्यालयों और आवासों पर बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ। प्रत्याशियों ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से फीडबैक लेकर उनके पक्ष में हुए मतदान का पूर्वानुमान गणित लगाने कोशिश की। कुछ प्रत्याशियों को उनके प्रति उम्मीद के मुताबिक मतदाताओं के रुझान में कमी चलते निराश भी हुई। बड़े राजनीतिक दलों के कैडर वोटर के भरोसे जीत के समीकरणों को भी टटोला। हालांकि 10 मार्च को जनादेश के बाद ही कौन जीता और किसके हिस्से हार आयी, इसका पता चल पाएगा।
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