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Rishikesh News: गुलदार के हमले से दहशत में पशुपालक
Wed, 16 Sep 2026 07:41 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Wed, 16 Sep 2026 07:41 PM IST
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- आठ माह के घोड़े के बच्चे को बनाया शिकार
यमकेश्वर। विकासखंड के कुकरेतीधार क्षेत्र में गुलदार की दहशत लगातार बढ़ती जा रही है। गुलदार ने ग्रामीण सुभाष चंद्र जोशी के आठ माह के घोड़े के बच्चे पर हमला कर उसे मार डाला। गुलदार उसे झाड़ियों में ले गया, काफी खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चल सका। घटना से ग्रामीणों में दहशत के साथ पशुपालकों में चिंता बढ़ गई है।
सुभाष चंद्र जोशी ने बताया कि गुलदार इससे पहले भी उनके दो खच्चरों और एक गाय को मार चुका है। उनका आरोप है कि कई बार रिपोर्ट और आवेदन देने के बावजूद अब तक किसी भी घटना का मुआवजा नहीं मिला। उन्होंने वन विभाग से मुआवजा दिलाने के साथ गुलदार के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है। वहीं, मंगलवार को गुलदार ने क्षेत्र के तीन अलग-अलग गांवों में तीन गायों को मार डाला। पिलखेड़ी में धनवीर सिंह, पंबा गांव में रमेश चंद और थनूर गांव में पिंकी देवी की गाय गुलदार को भी गुलदार ने मार डाला था डीएफओ लैंसडाउन गौरव वर्मा ने कहा कि गुलदार के हमलों में मारे गए पशुओं का नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। जिन पशुपालकों को मुआवजा नहीं मिला है, वे दोबारा आवश्यक दस्तावेज जमा करा सकते हैं
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यमकेश्वर। विकासखंड के कुकरेतीधार क्षेत्र में गुलदार की दहशत लगातार बढ़ती जा रही है। गुलदार ने ग्रामीण सुभाष चंद्र जोशी के आठ माह के घोड़े के बच्चे पर हमला कर उसे मार डाला। गुलदार उसे झाड़ियों में ले गया, काफी खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चल सका। घटना से ग्रामीणों में दहशत के साथ पशुपालकों में चिंता बढ़ गई है।
सुभाष चंद्र जोशी ने बताया कि गुलदार इससे पहले भी उनके दो खच्चरों और एक गाय को मार चुका है। उनका आरोप है कि कई बार रिपोर्ट और आवेदन देने के बावजूद अब तक किसी भी घटना का मुआवजा नहीं मिला। उन्होंने वन विभाग से मुआवजा दिलाने के साथ गुलदार के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है। वहीं, मंगलवार को गुलदार ने क्षेत्र के तीन अलग-अलग गांवों में तीन गायों को मार डाला। पिलखेड़ी में धनवीर सिंह, पंबा गांव में रमेश चंद और थनूर गांव में पिंकी देवी की गाय गुलदार को भी गुलदार ने मार डाला था डीएफओ लैंसडाउन गौरव वर्मा ने कहा कि गुलदार के हमलों में मारे गए पशुओं का नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। जिन पशुपालकों को मुआवजा नहीं मिला है, वे दोबारा आवश्यक दस्तावेज जमा करा सकते हैं
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