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Rishikesh News: हिमालयन अस्पताल ने बंद की गोल्डन कार्ड कैशलेस व्यवस्था
Wed, 19 Feb 2025 01:10 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Wed, 19 Feb 2025 01:10 AM IST
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शासन से गोल्डन कार्ड धारकों के उपचार पर व्यय राशि का भुगतान न होने पर हिमालयन अस्पताल ने गोल्डन कार्ड धारकों के लिए कैशलेस व्यवस्था बंद कर दी है। इसकी वजह से मरीजों व उनके तीमारदारों की परेशानी बढ़ गई है। कहा जा रहा है कि शासन स्तर से करोड़ों रुपये का भुगतान नहीं होने से व्यवस्था बंद की गई है।
हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में प्रतिदिन 2000 से अधिक मरीज ओपीडी के लिए आते हैं। जिनमें से कई मरीजों को भर्ती भी किया जाता है। इन मरीजों में गोल्डन कार्ड धारक मरीजों की संख्या काफी होती है। नियमानुसार गोल्डन कार्ड धारक मरीजों का पांच लाख रुपये तक के उपचार के खर्चे का भुगतान शासन की ओर से किया जाता है। लेकिन पिछले काफी समय से शासन ने हिमालयन अस्पताल का गोल्डन कार्ड धारकों के उपचार में व्यय राशि का भुगतान नहीं किया है। अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार यह राशि करीब 30 से 40 करोड़ रुपये की है। इतनी बड़ी राशि का भुगतान न होने पर अस्पताल प्रबंधन ने अब गोल्डन कार्ड धारकों के लिए कैशलेस व्यवस्था बंद कर दी है।
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कीमोथेरेपी करने से किया इंकार
पौड़ी जनपद से भुवनेश्वरी देवी यहां कीमोथेरेपी के लिए आई थी। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने गोल्डन कार्ड कैशलेस के तहत कीमोथेरेपी किए जाने से इंकार कर दिया। उनके साथ आए तीमारदारों ने बताया कि एक कीमोथेरेपी पर 90 हजार रुपये से अधिक खर्चा आ रहा है। गोल्डन कार्ड कैशलेस सुविधा बंद होने से उन्हें दिक्कतें आ रही हैं।
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क्या है गोल्डन कार्ड सुविधा
आयुष्मान भारत योजना के तहत जारी होने वाला डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड है। इसे आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड भी कहा जाता है। इस कार्ड के जरिए, पात्र परिवारों (सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स) को सालाना पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है। यह योजना साल 2018 में शुरू की गई थी। इस योजना का नाम अब बदलकर प्रधानमंत्री जन-आरोग्य योजना कर दिया गया है। इस योजना के तहत कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों समेत करीब 1500 बीमारियों का इलाज किया जा सकता है।
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- कुछ समस्याओं के चलते अभी गोल्डन कार्ड की कैशलेस सुविधा बंद है। - डाॅ. अनिल जुयाल, नोडल अधिकारी, गोल्डन कार्ड, हिमालयन अस्पताल
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हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में प्रतिदिन 2000 से अधिक मरीज ओपीडी के लिए आते हैं। जिनमें से कई मरीजों को भर्ती भी किया जाता है। इन मरीजों में गोल्डन कार्ड धारक मरीजों की संख्या काफी होती है। नियमानुसार गोल्डन कार्ड धारक मरीजों का पांच लाख रुपये तक के उपचार के खर्चे का भुगतान शासन की ओर से किया जाता है। लेकिन पिछले काफी समय से शासन ने हिमालयन अस्पताल का गोल्डन कार्ड धारकों के उपचार में व्यय राशि का भुगतान नहीं किया है। अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार यह राशि करीब 30 से 40 करोड़ रुपये की है। इतनी बड़ी राशि का भुगतान न होने पर अस्पताल प्रबंधन ने अब गोल्डन कार्ड धारकों के लिए कैशलेस व्यवस्था बंद कर दी है।
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कीमोथेरेपी करने से किया इंकार
पौड़ी जनपद से भुवनेश्वरी देवी यहां कीमोथेरेपी के लिए आई थी। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने गोल्डन कार्ड कैशलेस के तहत कीमोथेरेपी किए जाने से इंकार कर दिया। उनके साथ आए तीमारदारों ने बताया कि एक कीमोथेरेपी पर 90 हजार रुपये से अधिक खर्चा आ रहा है। गोल्डन कार्ड कैशलेस सुविधा बंद होने से उन्हें दिक्कतें आ रही हैं।
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क्या है गोल्डन कार्ड सुविधा
आयुष्मान भारत योजना के तहत जारी होने वाला डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड है। इसे आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड भी कहा जाता है। इस कार्ड के जरिए, पात्र परिवारों (सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स) को सालाना पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है। यह योजना साल 2018 में शुरू की गई थी। इस योजना का नाम अब बदलकर प्रधानमंत्री जन-आरोग्य योजना कर दिया गया है। इस योजना के तहत कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों समेत करीब 1500 बीमारियों का इलाज किया जा सकता है।
- कुछ समस्याओं के चलते अभी गोल्डन कार्ड की कैशलेस सुविधा बंद है। - डाॅ. अनिल जुयाल, नोडल अधिकारी, गोल्डन कार्ड, हिमालयन अस्पताल