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गंगा में बहा दिए जाते हैं अधजले शव

Tue, 03 May 2016 01:11 AM IST
हेमवती नंदन भ्ाट्ट /अमर उजाला, ऋषिकेश
हेमवती नंदन भ्ाट्ट /अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Tue, 03 May 2016 01:11 AM IST
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Half-burnt corpses in the Ganges are shedding
बचाव कार्य - फोटो : अमर उजाला

राज्य से लेकर केंद्र तक गंगा स्वच्छता को लेकर हो हल्ला है, लेकिन तीर्थनगरी और आसपास के क्षेत्रों में मोक्षदायिनी की स्वच्छता के लिए धरातलीय प्रयास कहीं नजर नहीं आता। श्मशान घाटों पर शवदाह की मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने से अधजले शवों को गंगा में बहा दिया जाता है।

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मृतकों के कपड़ों के ढेर गंगा तटों पर बने श्मशान घाटों पर जमा होने से गंगा मैली हो रही है। तीन विकास खंडों के दो सौ से अधिक गांवों के फूलचट्टी पैतृक श्मशान घाट की बदहाल स्थिति इसका सटीक उदाहरण है।
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हेंवल नदी और गंगा के संगम पर स्थित फूलचट्टी श्मशान घाट यमकेश्वर प्रखंड के लगभग शत प्रतिशत और द्वारीखाल और दुगड्डा प्रखंड के कुुछ गांवों का पैतृक श्मशान घाट है। यहां सदियों ने लोग मृत देह के संस्कार के लिए आते हैं। लेकिन यहां घाट के नाम पर कुछ नहीं है। लोगों को गंगा के किनारे पत्थरों के बीच में खुले में शवदाह करना पड़ता है।
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इंतजाम नहीं होने से खासकर बरसात के दिनों में अक्सर शव पूरी तरह से जल नहीं पाते और लोग अधजले शवों को गंगा में बहा देते हैं। इससे मोक्षदायिनी मैली हो रही है। यही स्थिति संगम पर हेंवल के किनारे बने एक अन्य श्मशानघाट की भी है। फूलचट्टी क्षेत्र में नदी के किनारे लोग मृतकों के कपड़े छोड़ देते हैं। इनके निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने से नदी किनारे कपड़े के ढेरों से भी गंगा मैली हो रही है।

श्मशान का रास्ता पथरीला, शव ले जाने में आती है दिक्कत
फूलचट्टी श्मशान घाट का मार्ग अत्यधिक जर्जर और पथरीला है। ढालदार पथरीले रास्ते से गंगा किनारे तक शव ले जाने में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कई बार लोग शव समेत गिरने की स्थिति में होते हैं। खासकर बरसात के समय ऐसी स्थिति अक्सर देखने को मिलती हैं।

सुस्ताने के लिए टीनशेड तक नहीं
पौड़ी जिले के तीन प्रखंडों के दो सौ से अधिक गांवों के पैतृक श्मशान घाट पर शव जलाने आने वालों के सुस्ताने के लिए तक कुछ नहीं किया गया है। लोगों को बरसात में खुले में भीगना पड़ता है और ग्रीष्मकाल में तपती धूप में खुले में घंटों शवदाह करना पड़ता है। लेकिन पीढ़ियों से परेशानी झेल रहे सैकड़ों गांवों की दिक्कतों का समाधान तो दूर, तमाम अव्यवस्थाओं के चलते गंगा में बढ़ रहे प्रदूषण की भी किसी को सुध नहीं है।   


समस्या लोगों की जुबानी  
रत्तापानी के सत्यपाल सिंह राणा, बैरागढ़ निवासी विनोद जुगलाण, घट्टूगाड़ के कलम सिंह, सुखवीर नेगी, दिनेश रावत, पसतोड़ा के वीरबल राणा, बचन सिंह, दिउली के उपेंद्र सिंह, फूलचट्टी के श्याम सिंह पटना के ग्रामीण पुष्कर भंडारी, यशपाल नेगी, बचन सिंह का कहना है कि फूलचट्टी में उनका पैतृक श्मशान घाट है। खुले आसमान के नीचे गर्मी और बारिश के दिनों में शवदाह करने में परेशानी आती है। कई बार बारिश के दिनों में शव ठीक से नहीं जल पाते। ऐसे में अधजले शवों को नदी में बहाना पड़ता है। 

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