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Rishikesh News: चेक बाउंस की आरोपी महिला को तीन माह का कारावास
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I-न्यायिक मजिस्ट्रेट नंदिता काला की अदालत ने सुनाया फैसला
I
I-तीन लाख 50 हजार का अर्थ दंड भी लगायाI
न्यायिक मजिस्ट्रेट नंदिता काला की अदालत ने चेक बाउंस मामले में महिला को दोषी सिद्ध पाते हुए तीन माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोषी महिला पर तीन लाख 50 हजार का अर्थदंड भी लगाया गया है। जिसमें से तीन लाख 48 हजार प्रतिकर के रूप में परिवादी को देय होंगे। जबकि 2 हजार की धनराशि अर्थदंड के तौर राजकोष में जमा करानी होगी।
चंद्रभागा चंद्रेश्वर नगर निवासी राजेश कुमार साहनी ने 24 अगस्त 2021 को न्यायालय में वाद दायर किया था। राजेश ने बताया था कि कमल अरोड़ा निवासी भैरव मंदिर लक्ष्मण झूला रोड से उनकी जान पहचान थी। 15 सितंबर 2020 को कमल अरोड़ा ने उससे निजी कार्य के लिए तीन लाख रुपये उधार लिए थे।
राजेश ने बताया कि जब उसने छह माह बाद कमल अरोड़ा से धनराशि मांगी तो उसने नकद धनराशि के बजाय तीन लाख का चेक दिया। 25 मार्च 2021 को जब चेक खाते में जमा कराया गया तो बैंक ने अपर्याप्त धनराशि का कारण बताते हुए चेक वापस कर दिया।
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इस बात की सूचना कमल अरोड़ा को भी दी गई। बावजूद इसके उसने धनराशि नहीं लौटाई। मजबूरन उसे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट नंदिता काला की अदालत ने फैसला सुनाया।
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I-तीन लाख 50 हजार का अर्थ दंड भी लगायाI
न्यायिक मजिस्ट्रेट नंदिता काला की अदालत ने चेक बाउंस मामले में महिला को दोषी सिद्ध पाते हुए तीन माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोषी महिला पर तीन लाख 50 हजार का अर्थदंड भी लगाया गया है। जिसमें से तीन लाख 48 हजार प्रतिकर के रूप में परिवादी को देय होंगे। जबकि 2 हजार की धनराशि अर्थदंड के तौर राजकोष में जमा करानी होगी।
चंद्रभागा चंद्रेश्वर नगर निवासी राजेश कुमार साहनी ने 24 अगस्त 2021 को न्यायालय में वाद दायर किया था। राजेश ने बताया था कि कमल अरोड़ा निवासी भैरव मंदिर लक्ष्मण झूला रोड से उनकी जान पहचान थी। 15 सितंबर 2020 को कमल अरोड़ा ने उससे निजी कार्य के लिए तीन लाख रुपये उधार लिए थे।
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राजेश ने बताया कि जब उसने छह माह बाद कमल अरोड़ा से धनराशि मांगी तो उसने नकद धनराशि के बजाय तीन लाख का चेक दिया। 25 मार्च 2021 को जब चेक खाते में जमा कराया गया तो बैंक ने अपर्याप्त धनराशि का कारण बताते हुए चेक वापस कर दिया।
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इस बात की सूचना कमल अरोड़ा को भी दी गई। बावजूद इसके उसने धनराशि नहीं लौटाई। मजबूरन उसे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट नंदिता काला की अदालत ने फैसला सुनाया।