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Rishikesh News: लेखक गांव में वैश्विक सांस्कृतिक संवाद के आयामों पर हुआ मंथन

Mon, 26 Oct 2026 08:07 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Updated Mon, 26 Oct 2026 08:07 PM IST
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Deliberations on the Dimensions of Global Cultural Dialogue at Writer Village
जौलीग्रांट। लेखक गांव थानो में अंतरराष्ट्रीय महोत्सव के दूसरे दिन देश-विदेश से आए साहित्यकारों, विद्वानों और कलाकारों ने साहित्य, भारतीय ज्ञान परंपरा, मानवीय संवेदना और वैश्विक सांस्कृतिक संवाद के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया।
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परिवहन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा ने अंतरराष्ट्रीय महोत्सव के दूसरे दिन का शुभारंभ करते हुए कहा कि जीवन की सार्थकता दूसरों के लिए कुछ करने में है। लेखक में साहित्य और प्रकृति के सान्निध्य में व्यक्ति मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं और जीवन के गहरे अर्थों से जुड़ सकता है। जो लोगों को तनावमुक्त होकर जीवन का आनंद लेने और आत्मिक शांति का अनुभव करने का अवसर प्रदान करती है। मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन ने कहा कि लेखक गांव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव विभिन्न देशों के बीच साहित्य, कला और संस्कृति का सशक्त सेतु के रूप में काम करेगा।
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पुरातत्वविद् पद्मश्री डॉ यशोधर मठपाल ने कहा कि लेखक गांव का नालंदा पुस्तकालय ज्ञान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का महत्त्वपूर्ण केंद्र बनेगा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र सदस्य सचिव प्रो सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि साहित्यकार और कलाकार अपने अनुभवों, रचनाओं और संवाद के माध्यम से इस स्थल के सांस्कृतिक महत्त्व को शब्द देंगे। गुजरात साहित्य अकादमी अध्यक्ष डॉ भाग्येश झा ने रोबोटिक मशीनों की कार्यक्षमता और मानवीय चेतना के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा, विशेषकर श्रीमद्भगवद्गीता की प्रासंगिकता पर विचार रखे। वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष अनिल जोशी, उद्योगपति इंद्रजीत शर्मा आदि ने भी विचार रखे।
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वेद पुराणाें ने आध्यात्मिकता के गहरे सूत्र दिए
जौलीग्रांट। ऑस्ट्रेलियन लेखिका मृदुला कीर्ति ने भारतीय वेदों, पुराणों और श्रीमद्भागवत की ज्ञानपरंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ऋषियों की साधना और चिंतन ने मानवता को जीवन, प्रकृति, चेतना और आध्यात्मिकता के गहन सूत्र प्रदान किए हैं।

लेखक गांव निदेशक विदुषी निशंक ने कहा कि लेखक गांव का उद्देश्य विविध भाषाओं, विचारों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों को एक साझा मंच प्रदान करना है। वहीं डॉ रमेश पोखरियाल विभिन्न साहित्यकारों की पुस्तकों का लोकार्पण और विमोचन किया।
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