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Rishikesh News: लू का खतरा बढ़ा
Tue, 28 Apr 2026 01:28 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Tue, 28 Apr 2026 01:28 AM IST
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इस साल बढ़ती गर्मी का असर बच्चों पर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। तापमान बढ़ने के साथ ही लू (हीट स्ट्रोक) का खतरा बढ़ गया है। बाल रोग विशेषज्ञों ने इसे बच्चों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती, जिससे वे गर्मी के प्रभाव को जल्दी झेल नहीं पाते। छोटे बच्चों को प्यास का एहसास भी कम होता है, जिसके कारण डिहाइड्रेशन का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।
भारतीय बाल अकादमी के उत्तराखंड सचिव व हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार कहते हैं कि उत्तराखंड के संदर्भ में विशेष सावधानी आवश्यक है। पारंपरिक रूप से ठंडे माने जाने वाले पहाड़ी क्षेत्रों में भी अब तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
दिन में तेज धूप और रात में अपेक्षाकृत ठंड का अंतर शरीर पर अतिरिक्त प्रभाव डाल सकता है। ट्रैकिंग, तीर्थयात्रा या पर्यटन के दौरान डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक होता है, इसलिए पर्याप्त पानी साथ रखना और धूप के समय यात्रा से बचना जरूरी है। बच्चों को कभी भी बंद गाड़ी या बंद कमरे में अकेला न छोड़ें। कुछ ही मिनटों में अंदर का तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है, जिससे बच्चे की जान को खतरा हो सकता है। बच्चे में हीट स्ट्रोक के लक्षण नजर आएं, तो उसे तुरंत ठंडी और छायादार जगह पर ले जाएं, शरीर को ठंडा करें और यदि बच्चा होश में है तो उसे तरल पदार्थ दें। साथ ही बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
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क्या हैं बच्चों में खतरे के संकेत
डॉ. राकेश कहते हैं कि यदि बच्चा सुस्त दिखाई दे, बार-बार उल्टी करे, अत्यधिक चिड़चिड़ा हो जाए, तेज बुखार आए या असामान्य रूप से उनींदा लगे, तो यह हीट स्ट्रोक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक बच्चों को धूप में बाहर खेलने से रोकें। उन्हें बार-बार पानी, ओआरएस, नींबू पानी या अन्य तरल पदार्थ देते रहें, भले ही वे खुद से न मांगें। बच्चों को हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनाएं और बाहर जाते समय सिर को ढकना न भूलें।
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कब होता है हीट स्ट्रोक
डॉ. राकेश बताते हैं कि हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है और शरीर की ठंडा करने की प्राकृतिक क्षमता (जैसे पसीना आना) काम करना बंद कर देती है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, चक्कर, त्वचा का लाल और सूखा होना, पसीना कम या बंद होना, उल्टी, तेज सांस, दिल की धड़कन बढ़ना और गंभीर स्थिति में भ्रम या बेहोशी शामिल हैं। यदि तुरंत उपचार न मिले, तो यह जानलेवा हो सकता है।
भारतीय बाल अकादमी के उत्तराखंड सचिव व हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार कहते हैं कि उत्तराखंड के संदर्भ में विशेष सावधानी आवश्यक है। पारंपरिक रूप से ठंडे माने जाने वाले पहाड़ी क्षेत्रों में भी अब तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
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दिन में तेज धूप और रात में अपेक्षाकृत ठंड का अंतर शरीर पर अतिरिक्त प्रभाव डाल सकता है। ट्रैकिंग, तीर्थयात्रा या पर्यटन के दौरान डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक होता है, इसलिए पर्याप्त पानी साथ रखना और धूप के समय यात्रा से बचना जरूरी है। बच्चों को कभी भी बंद गाड़ी या बंद कमरे में अकेला न छोड़ें। कुछ ही मिनटों में अंदर का तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है, जिससे बच्चे की जान को खतरा हो सकता है। बच्चे में हीट स्ट्रोक के लक्षण नजर आएं, तो उसे तुरंत ठंडी और छायादार जगह पर ले जाएं, शरीर को ठंडा करें और यदि बच्चा होश में है तो उसे तरल पदार्थ दें। साथ ही बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
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क्या हैं बच्चों में खतरे के संकेत
डॉ. राकेश कहते हैं कि यदि बच्चा सुस्त दिखाई दे, बार-बार उल्टी करे, अत्यधिक चिड़चिड़ा हो जाए, तेज बुखार आए या असामान्य रूप से उनींदा लगे, तो यह हीट स्ट्रोक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक बच्चों को धूप में बाहर खेलने से रोकें। उन्हें बार-बार पानी, ओआरएस, नींबू पानी या अन्य तरल पदार्थ देते रहें, भले ही वे खुद से न मांगें। बच्चों को हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनाएं और बाहर जाते समय सिर को ढकना न भूलें।
कब होता है हीट स्ट्रोक
डॉ. राकेश बताते हैं कि हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है और शरीर की ठंडा करने की प्राकृतिक क्षमता (जैसे पसीना आना) काम करना बंद कर देती है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, चक्कर, त्वचा का लाल और सूखा होना, पसीना कम या बंद होना, उल्टी, तेज सांस, दिल की धड़कन बढ़ना और गंभीर स्थिति में भ्रम या बेहोशी शामिल हैं। यदि तुरंत उपचार न मिले, तो यह जानलेवा हो सकता है।