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योजना पर बहा दिए करोड़ों, गंगा में अब भी गिर रहे नाले
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त्रिवेणी घाट गंगा में इस तरह मिल रहा है गंदे नाले का पानी।
- फोटो : RISHIKESH
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ऋषिकेश। योगनगरी में पंपिंग स्टेशन और एसटीपी प्लांट केवल कागजों में गंगा को प्रदूषण मुक्त कर रहे हैं। त्रिवेणी घाट पंपिंग स्टेशन पर सरस्वती नाले को टेप किया गया है। लेकिन बारिश के दौरान गंगा का पानी और नाला एक लेवल पर आ जाते हैं। ऐसे में पपिंग स्टेशन और एसटीपी प्लांट के निर्माण और उच्चीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद गंदे नाले का पानी गंगा में मिल रहा है।
त्रिवेणी घाट के पास सरस्वती नाले की टेपिंग में खामी के चलते गंदा पानी गंगा में गिर रहा है। पंपिंग स्टेशन बिल्कुल गंगा के किनारे पर बना है। गंदे पानी को स्टेशन से पंप कर लक्कड़घाट एसटीपी भेजा जाता है। अधिकारियों को भी मालूम था कि यह डूब क्षेत्र है। इसके बावजूद नाले की टेपिंग वाले हिस्से को खुला रखा गया है। यहां तक की नाले के आसपास की दीवार की ऊंचाई को भी बढ़ाया नहीं गया। पहाड़ों में बारिश के दौरान जब गंगा का जलस्तर बढ़ जाता है तो गंगा का पानी नाले में दाखिल हो जाता है। जिसके बाद नाले का पानी सीधा गंगा में मिलना शुरू हो जाता है।
टेप नाले का निरीक्षण किया जाएगा। अगर नाले का पानी गंगा में गिर रहा है तो उसके आसपास की दीवार की ऊंचाई को बढ़ाया जाएगा।
आरके सिंह, सहायक अभियंता, नमामि गंगे योजना
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त्रिवेणी घाट के पास सरस्वती नाले की टेपिंग में खामी के चलते गंदा पानी गंगा में गिर रहा है। पंपिंग स्टेशन बिल्कुल गंगा के किनारे पर बना है। गंदे पानी को स्टेशन से पंप कर लक्कड़घाट एसटीपी भेजा जाता है। अधिकारियों को भी मालूम था कि यह डूब क्षेत्र है। इसके बावजूद नाले की टेपिंग वाले हिस्से को खुला रखा गया है। यहां तक की नाले के आसपास की दीवार की ऊंचाई को भी बढ़ाया नहीं गया। पहाड़ों में बारिश के दौरान जब गंगा का जलस्तर बढ़ जाता है तो गंगा का पानी नाले में दाखिल हो जाता है। जिसके बाद नाले का पानी सीधा गंगा में मिलना शुरू हो जाता है।
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टेप नाले का निरीक्षण किया जाएगा। अगर नाले का पानी गंगा में गिर रहा है तो उसके आसपास की दीवार की ऊंचाई को बढ़ाया जाएगा।
आरके सिंह, सहायक अभियंता, नमामि गंगे योजना