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आदर्श नगर सोसाइटी का विवादित भूखंड सील
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। आदर्श नगर स्थित विवादित भूमि को उप जिलाधिकारी के आदेश पर शुक्रवार को सील कर दिया गया है। लंबे समय से मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद में एसडीएम कोर्ट, ऋषिकेश के आदेश पर पुलिस ने ये कार्रवाई की है। ताजा आदेश के तहत एसडीएम ने आदेश दिया है कि विवाद निस्तारण तक उक्त संपत्ति कोतवाल ऋषिकेश की अभिरक्षा में रहेगी। भविष्य में जब मामला निस्तारित हो जाएगा उसके बाद नियमानुसार भूमि हस्तांतरित की जाएगी।
घटनाक्रम के मुताबिक नगर स्थित संपत्ति संख्या 56/78 आदर्श नगर कोआपरेटिव हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड की थी। 19 जनवरी 1979 को उक्त संपत्ति को गंगा गिरि स्मारक ट्रस्ट को बेच दी गई। इसी आधार पर तत्कालीन नगर पालिका के अभिलेखों में गंगा गिरि स्मारक ट्रस्ट के नाम दर्ज कर दी गई। बाद में हाउसिंग सोसायटी के कई सदस्यों ने स्वामी गंगा गिरि ट्रस्ट के खिलाफ फास्ट ट्रैक अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में मुकदमा दायर कर दिया।
इसी क्रम में कोर्ट ने ट्रस्ट के नाम की गई संपत्ति की रजिस्ट्री को अमान्य घोषित कर दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद उक्त संपत्ति को दोबारा हाउसिंग सोसायटी के नाम दर्ज करने के लिए पालिका में दस्तावेज पेश किए गए। नामांतरण प्रक्रिया में जमकर घालमेल किया गया।
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पुलिस ने सामान निकलवाकर गेट किया सील
आदर्श नगर स्थित उक्त संपत्ति पर महंत रत्नेश नामक व्यक्ति पिछले कई महीने से काबिज थे। शुक्रवार को आदेश जारी होने के बाद कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भूखंड को खाली करवाया और गेट को सील कर दिया है। सीलिंग के दौरान महंत रत्नेश मौके पर नहीं थे। फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो किसी अन्य साथी ने बताया कि वह कहीं गए हैं अभी बात नहीं हो पाएगी।
कोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर हुआ था नामांतरण
पूरे प्रकरण में नगर निगम का भी अहम किरदार सामने आया। इसके तहत 10 सितंबर 2007 को जारी हुए कोर्ट के आदेशों को नजरंदाज कर निगम प्रशासन के गृह कर विभाग ने गंगा गिरि ट्रस्ट के नाम पर संपत्ति दर्ज कर दी। इस मामले को लेकर मेयर अनिता ममगाईं ने भी कड़ा रुख अख्तियार किया था। नामांतरण की इस घालमेल के आरोपी अफसरों को फटकार भी लगाई गई थी। इतना ही नहीं गृहकर विभाग के बाबू ने भी अपनी रिपोर्ट में नामांतरण प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी को लिखित में दर्ज किया है। इसको लेकर गृहकर विभाग के दो अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है। फिलहाल इस मामले में नगर आयुक्त चतर सिंह चौहान अभी विधिक रायशुमारी ले रहे हैं।
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घटनाक्रम के मुताबिक नगर स्थित संपत्ति संख्या 56/78 आदर्श नगर कोआपरेटिव हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड की थी। 19 जनवरी 1979 को उक्त संपत्ति को गंगा गिरि स्मारक ट्रस्ट को बेच दी गई। इसी आधार पर तत्कालीन नगर पालिका के अभिलेखों में गंगा गिरि स्मारक ट्रस्ट के नाम दर्ज कर दी गई। बाद में हाउसिंग सोसायटी के कई सदस्यों ने स्वामी गंगा गिरि ट्रस्ट के खिलाफ फास्ट ट्रैक अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में मुकदमा दायर कर दिया।
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इसी क्रम में कोर्ट ने ट्रस्ट के नाम की गई संपत्ति की रजिस्ट्री को अमान्य घोषित कर दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद उक्त संपत्ति को दोबारा हाउसिंग सोसायटी के नाम दर्ज करने के लिए पालिका में दस्तावेज पेश किए गए। नामांतरण प्रक्रिया में जमकर घालमेल किया गया।
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पुलिस ने सामान निकलवाकर गेट किया सील
आदर्श नगर स्थित उक्त संपत्ति पर महंत रत्नेश नामक व्यक्ति पिछले कई महीने से काबिज थे। शुक्रवार को आदेश जारी होने के बाद कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भूखंड को खाली करवाया और गेट को सील कर दिया है। सीलिंग के दौरान महंत रत्नेश मौके पर नहीं थे। फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो किसी अन्य साथी ने बताया कि वह कहीं गए हैं अभी बात नहीं हो पाएगी।
कोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर हुआ था नामांतरण
पूरे प्रकरण में नगर निगम का भी अहम किरदार सामने आया। इसके तहत 10 सितंबर 2007 को जारी हुए कोर्ट के आदेशों को नजरंदाज कर निगम प्रशासन के गृह कर विभाग ने गंगा गिरि ट्रस्ट के नाम पर संपत्ति दर्ज कर दी। इस मामले को लेकर मेयर अनिता ममगाईं ने भी कड़ा रुख अख्तियार किया था। नामांतरण की इस घालमेल के आरोपी अफसरों को फटकार भी लगाई गई थी। इतना ही नहीं गृहकर विभाग के बाबू ने भी अपनी रिपोर्ट में नामांतरण प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी को लिखित में दर्ज किया है। इसको लेकर गृहकर विभाग के दो अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है। फिलहाल इस मामले में नगर आयुक्त चतर सिंह चौहान अभी विधिक रायशुमारी ले रहे हैं।