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काम से असंतुष्ट नमामि गंगे ने कंपनी पर ठोका जुर्माना
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। नमामि गंगे परियोजना के तहत नगर भर में भूमिगत सीवर लाइन बिछाने के कार्य पर लगातार लापरवाही बरती जा रही है। आए दिन अधूरे कार्य के चलते दुर्घटनाएं हो रही हैं। कंपनी के काम से असंतुष्ट होकर नमामि गंगे प्रोजेक्ट मैनेजर ने कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही प्रतिदिन 84 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के लिए उच्चाधिकारियों को संस्तुति भी भेज दी है।
नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप कश्यप ने बताया कि नमामि गंगे परियोजना के तहत कुल 72 करोड़ रुपये की लागत से लक्कड़घाट पर एक 26 एमएलडी का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, तीन पंपिंग स्टेशन (मायाकुंड, बापूग्राम, सर्वहारानगर) तथा करीब 15 किलोमीटर मार्ग पर भूमिगत सीवर लाइन बिछाने का काम चल रहा है। इस पूरे कार्य का जिम्मा दिल्ली की कंपनी जीडीसीएल को सौंपा गया है। उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से निर्माण कार्य में आए दिन लापरवाही के मामले सामने आ रहे है। इसी के चलते 24 अप्रैल को कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा उच्चाधिकारियों को और जुर्माना लगाने के लिए पत्राचार किया गया है।
60 की बजाए पूरा हुआ महज 42 प्रतिशत कार्य
नमामि गंगे ने दिल्ली की कंपनी जीडीसीएल को निर्माण का जिम्मा 31 मई 2018 को सौंपा था। इसे 18 माह यानी 30 नवंबर 2019 तक पूरा करने के निर्देश दिया गया है। प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप कश्यप के मुताबिक अभी तक 60 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो जाना था। हकीकत यह है कि लक्ष्य के विपरीत कंपनी ने 42 प्रतिशत काम ही पूरा किया है। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के कार्य में लेटलतीफी के विरुद्घ कंपनी पर प्रतिदिन 84 हजार रुपये का जुर्माना लगाने की संस्तुति पांच मई को भेज दी गई है।
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लोनिवि, निगम, एनएच को दिया मुआवजा
प्रोजेक्ट मैनेजर (नमामि गंगे) संदीप कश्यप ने बताया कि भूमिगत सीवर लाइन बिछाने के कार्य के लिए जिस विभाग की सड़क को उखाड़ा जा रहा है, उसे पिछले वर्ष ही धनराशि उपलब्ध करा दी गई है। इसमें लोक निर्माण विभाग को दो करोड़ 31 लाख, नेशनल हाईवे को 94 लाख, नगर निगम को 87 लाख रुपये दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि भूमिगत लाइन बिछाने का कार्य पूर्ण होने पर इसका टेस्टिंग कराया जाएगा। इस दौरान कहीं से भी लीकेज की समस्या आती है, तो दोबारा उसे दुरुस्त किया जाएगा। इसके बाद ही सड़क निर्माण हो सकेगा।
कोट्स
कंपनी की ओर से लगातार लापरवाही बरतने का मामले सामने आए है। मैं कंपनी के निर्माण कार्य के दौरान क्षेत्र में ही रहता हूं। एक बार कंपनी ने पांच गलत सीवर पाइप बिछा दिए थे। इसे मैंने स्वयं दोबारा निकलवा कर लगवाया।
- एके चतुर्वेदी, परियोजना अभियंता
लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कंपनी तय समय के भीतर निर्माण कार्य पूर्ण कर नहीं देती है, तो कंपनी पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा कंपनी के हर कार्य पर नजर रखी जा रही है।
- आरके सिंह, परियोजना अभियंता
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नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप कश्यप ने बताया कि नमामि गंगे परियोजना के तहत कुल 72 करोड़ रुपये की लागत से लक्कड़घाट पर एक 26 एमएलडी का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, तीन पंपिंग स्टेशन (मायाकुंड, बापूग्राम, सर्वहारानगर) तथा करीब 15 किलोमीटर मार्ग पर भूमिगत सीवर लाइन बिछाने का काम चल रहा है। इस पूरे कार्य का जिम्मा दिल्ली की कंपनी जीडीसीएल को सौंपा गया है। उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से निर्माण कार्य में आए दिन लापरवाही के मामले सामने आ रहे है। इसी के चलते 24 अप्रैल को कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा उच्चाधिकारियों को और जुर्माना लगाने के लिए पत्राचार किया गया है।
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60 की बजाए पूरा हुआ महज 42 प्रतिशत कार्य
नमामि गंगे ने दिल्ली की कंपनी जीडीसीएल को निर्माण का जिम्मा 31 मई 2018 को सौंपा था। इसे 18 माह यानी 30 नवंबर 2019 तक पूरा करने के निर्देश दिया गया है। प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप कश्यप के मुताबिक अभी तक 60 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो जाना था। हकीकत यह है कि लक्ष्य के विपरीत कंपनी ने 42 प्रतिशत काम ही पूरा किया है। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के कार्य में लेटलतीफी के विरुद्घ कंपनी पर प्रतिदिन 84 हजार रुपये का जुर्माना लगाने की संस्तुति पांच मई को भेज दी गई है।
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प्रोजेक्ट मैनेजर (नमामि गंगे) संदीप कश्यप ने बताया कि भूमिगत सीवर लाइन बिछाने के कार्य के लिए जिस विभाग की सड़क को उखाड़ा जा रहा है, उसे पिछले वर्ष ही धनराशि उपलब्ध करा दी गई है। इसमें लोक निर्माण विभाग को दो करोड़ 31 लाख, नेशनल हाईवे को 94 लाख, नगर निगम को 87 लाख रुपये दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि भूमिगत लाइन बिछाने का कार्य पूर्ण होने पर इसका टेस्टिंग कराया जाएगा। इस दौरान कहीं से भी लीकेज की समस्या आती है, तो दोबारा उसे दुरुस्त किया जाएगा। इसके बाद ही सड़क निर्माण हो सकेगा।
कोट्स
कंपनी की ओर से लगातार लापरवाही बरतने का मामले सामने आए है। मैं कंपनी के निर्माण कार्य के दौरान क्षेत्र में ही रहता हूं। एक बार कंपनी ने पांच गलत सीवर पाइप बिछा दिए थे। इसे मैंने स्वयं दोबारा निकलवा कर लगवाया।
- एके चतुर्वेदी, परियोजना अभियंता
लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कंपनी तय समय के भीतर निर्माण कार्य पूर्ण कर नहीं देती है, तो कंपनी पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा कंपनी के हर कार्य पर नजर रखी जा रही है।
- आरके सिंह, परियोजना अभियंता