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कोरोना वायरस: तीर्थनगरी में जनता कर्फ्यू रहा सफल
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रविवार को सुनसान रहा ऋषिकेश हरिद्वार मार्ग।
- फोटो : RISHIKESH
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कोरोना के आतंक के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर तीर्थनगरी और आसपास के क्षेत्रों में जनता कर्फ्यू सफल नजर आया। इस दौरान सभी मार्गों पर सन्नाटा पसरा रहा। खास बात यह रही कि बिना पुलिस दबाव के लोग स्वत: ही घरों में ही रहे।
कोरोना के संक्रमण के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से रविवार 22 मार्च के दिन स्वत: जनता कर्फ्यू लगाने की अपील की थी। रविवार को इसी क्रम में तीर्थनगरी और आसपास के क्षेत्रों में लोगों ने सुबह सात से रात नौ बजे तक घरों में ही रहकर जनता कर्फ्यू को समर्थन दिया। इसके साथ सूमो यूनियन, ऑटो यूनियन, गढ़वाल टैक्सी एसोसिएशन, विक्रम यूनियन एवं परिवहन कंपनियों ने भी जनता कर्फ्यू को अपना समर्थन दिया और वाहनों के संचालन पूर्ण रूप से बंद रखा। इस कारण सुबह से ही हरिद्वार रोड, वीरभद्र मार्ग, आईडीपीएल, पुरानी चुंगी, बाईपास मार्ग, तिलक मार्ग, घाट रोड, रेलवे रोड, देहरादून रोड, क्षेत्र रोड, झंडा चौक, बनखंडी, चंद्रभागा, इंद्रमणि बडोनी चौक, लक्ष्मणझूला रोड, ढालवाला बाईपास मार्ग, तपोवन, चौदह बीघा मार्ग, शीशम झाड़ी मार्ग, रामझूला, स्वर्गाश्रम, लक्ष्मणझूला आदि जगहों पर सन्नाटा पसरा रहा। इस बीच शहर में कुछ आश्रमों व घरों मेें शाम पांच बजे लोगों ने बड़ी संख्या में थाली, घंटी और तालियां भी बजाई। कुछ जगहों पर आवश्यक कार्य पड़ने पर ही लोग अपने निजी वाहनों से जाते हुए नजर आए।
हर जगह चौकन्ना रहा प्रशासन
ऋषिकेश। जनता कर्फ्यू के बावजूद विभिन्न राज्यों से बीटीसी पहुंचे 19 लोगों को तहसीलदार ने थर्मल स्क्रीनिंग के लिए एम्स भेजा। जनता कर्फ्यू के दौरान ऋषिकेश में एक ओर जहां प्रशासन की टीम चौकस नजर आई, वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम अभी तक लापरवाह बनी हुई है। आलम यह है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों में अब तक कोई थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था नहीं की गई है। हालात यह रहे कि रविवार को बंस ट्रांजिट कंपाउंड में विभिन्न राज्यों से आये पहाड़ी मूल के 19 लोगों को थर्मल टेस्ट के लिए मजबूरन एम्स में भेजना पड़ा।
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19 युवकों का एम्स में स्क्रीनिंग टेस्ट कराकर भेजा गंतव्य
ऋषिकेश। रविवार को जनता कर्फ्यू के बावजूद पंजाब, नोएडा, दिल्ली, बैंगलोर, मुंबई में काम करने वाले पहाड़ी मूल के 19 युवक बीटीसी पहुंच गए। मगर परिवहन निगम और परिवहन कंपनियों की हड़ताल होने के कारण अपने गंतव्यों के लिए उन्हें बसें उपलब्ध नहीं हो पाई। इससे वह काफी परेशान हो गए। सूचना पाकर मौके पर पहुंची तहसीलदार रेखा आर्य ने सभी युवकों से पूछताछ की व परिवहन निगम के एजीएम पीके भारती को मौके पर बुलाया। इस दौरान युवकों ने बताया कि वह बाहरी राज्यों के होटलों में कार्यरत हैं। कोरोना की गंभीरता को देखते हुए सभी जगहों पर होटलों को बंद कर दिया या है। इस कारण उन्हें घर वापसी आना पड़ा है। इस दौरान तहसीलदार ने पाया कि बीटीसी समेत सरकारी अस्पताल में थर्मल स्क्रीनिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने सूमो यूनियन से वार्ता एक सूमो और सरकारी अस्पताल से वार्ता कर एक एंबुलेंस मौके पर बुलाई। इसके बाद सभी 19 युवकों को एम्स में थर्मल स्क्रीनिंग के लिए भेजा। इस दौरान तहसीलदार ने रोडवेज एजीएम को युवकों की स्क्रीनिंग के बाद उन्हें गंतव्यों तक पहुंचने के लिए बस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इस पर एजीएम ने बताया कि आपातकालीन स्थिति के लिए दो बसें रखी गई हैं।
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कोरोना के संक्रमण के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से रविवार 22 मार्च के दिन स्वत: जनता कर्फ्यू लगाने की अपील की थी। रविवार को इसी क्रम में तीर्थनगरी और आसपास के क्षेत्रों में लोगों ने सुबह सात से रात नौ बजे तक घरों में ही रहकर जनता कर्फ्यू को समर्थन दिया। इसके साथ सूमो यूनियन, ऑटो यूनियन, गढ़वाल टैक्सी एसोसिएशन, विक्रम यूनियन एवं परिवहन कंपनियों ने भी जनता कर्फ्यू को अपना समर्थन दिया और वाहनों के संचालन पूर्ण रूप से बंद रखा। इस कारण सुबह से ही हरिद्वार रोड, वीरभद्र मार्ग, आईडीपीएल, पुरानी चुंगी, बाईपास मार्ग, तिलक मार्ग, घाट रोड, रेलवे रोड, देहरादून रोड, क्षेत्र रोड, झंडा चौक, बनखंडी, चंद्रभागा, इंद्रमणि बडोनी चौक, लक्ष्मणझूला रोड, ढालवाला बाईपास मार्ग, तपोवन, चौदह बीघा मार्ग, शीशम झाड़ी मार्ग, रामझूला, स्वर्गाश्रम, लक्ष्मणझूला आदि जगहों पर सन्नाटा पसरा रहा। इस बीच शहर में कुछ आश्रमों व घरों मेें शाम पांच बजे लोगों ने बड़ी संख्या में थाली, घंटी और तालियां भी बजाई। कुछ जगहों पर आवश्यक कार्य पड़ने पर ही लोग अपने निजी वाहनों से जाते हुए नजर आए।
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हर जगह चौकन्ना रहा प्रशासन
ऋषिकेश। जनता कर्फ्यू के बावजूद विभिन्न राज्यों से बीटीसी पहुंचे 19 लोगों को तहसीलदार ने थर्मल स्क्रीनिंग के लिए एम्स भेजा। जनता कर्फ्यू के दौरान ऋषिकेश में एक ओर जहां प्रशासन की टीम चौकस नजर आई, वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम अभी तक लापरवाह बनी हुई है। आलम यह है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों में अब तक कोई थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था नहीं की गई है। हालात यह रहे कि रविवार को बंस ट्रांजिट कंपाउंड में विभिन्न राज्यों से आये पहाड़ी मूल के 19 लोगों को थर्मल टेस्ट के लिए मजबूरन एम्स में भेजना पड़ा।
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19 युवकों का एम्स में स्क्रीनिंग टेस्ट कराकर भेजा गंतव्य
ऋषिकेश। रविवार को जनता कर्फ्यू के बावजूद पंजाब, नोएडा, दिल्ली, बैंगलोर, मुंबई में काम करने वाले पहाड़ी मूल के 19 युवक बीटीसी पहुंच गए। मगर परिवहन निगम और परिवहन कंपनियों की हड़ताल होने के कारण अपने गंतव्यों के लिए उन्हें बसें उपलब्ध नहीं हो पाई। इससे वह काफी परेशान हो गए। सूचना पाकर मौके पर पहुंची तहसीलदार रेखा आर्य ने सभी युवकों से पूछताछ की व परिवहन निगम के एजीएम पीके भारती को मौके पर बुलाया। इस दौरान युवकों ने बताया कि वह बाहरी राज्यों के होटलों में कार्यरत हैं। कोरोना की गंभीरता को देखते हुए सभी जगहों पर होटलों को बंद कर दिया या है। इस कारण उन्हें घर वापसी आना पड़ा है। इस दौरान तहसीलदार ने पाया कि बीटीसी समेत सरकारी अस्पताल में थर्मल स्क्रीनिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने सूमो यूनियन से वार्ता एक सूमो और सरकारी अस्पताल से वार्ता कर एक एंबुलेंस मौके पर बुलाई। इसके बाद सभी 19 युवकों को एम्स में थर्मल स्क्रीनिंग के लिए भेजा। इस दौरान तहसीलदार ने रोडवेज एजीएम को युवकों की स्क्रीनिंग के बाद उन्हें गंतव्यों तक पहुंचने के लिए बस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इस पर एजीएम ने बताया कि आपातकालीन स्थिति के लिए दो बसें रखी गई हैं।

रविवार को सुनसान पड़ा डोईवाला चौक।- फोटो : RISHIKESH

ऋषिकेश में सुनसान पड़ा आईएसबीटी मार्ग।- फोटो : RISHIKESH

04 सुनसान रहा त्रिवेणी घाट रोड- फोटो : RISHIKESH