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पर्याप्त बजट, फिर भी कष्टदायी सफर
हेमवती नंदन भ्ाट्ट /अमर उजाला, ऋषिकेश
Updated Mon, 02 May 2016 02:16 AM IST
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बदहाल सड़क
- फोटो : अमर उजाला
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पौड़ी जिला प्रशासन की अनदेखी और कमजोर मॉनिटरिंग का खामियाजा लक्ष्मणझूला-कांडी-धूमाकोट स्टेट हाईवे (अब राष्ट्रीय राजमार्ग) पर पड़ने वाले यमकेश्वर, दुगड्डा और द्वारीखाल के सैकड़ों गांवों के हजारों नागरिकों और नीलकंठ आने वाले श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ रहा है।
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वर्तमान में यह महत्वपूर्ण मार्ग लोक निर्माण विभाग के दो अलग-अलग डिवीजनों के सुपुर्द है। लेकिन दोनों में से कोई भी राजमार्ग की मेंटिनेंस की जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा पा रहा। योजना और बजट की पर्याप्त व्यवस्था के बावजूद पीडब्लूडी दुगड्डा डिवीजन और लोक निर्माण विभाग एडीबी आपदा खंड, पौड़ी हाईवे की देखरेख नहीं कर पा रहे हैं।
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पौड़ी प्रशासन की स्थिति यह है कि वह न तो दोनों महकमों के कार्यों, योजना प्रगति पर नजर रख रहा है और न ही सड़क के प्रति महकमों के उदासीन रवैये के जवाब तलब कर रहा है। लिहाजा लोगों को जान हथेली पर लेकर खस्ताहाल हाईवे पर हिचकोले खाकर सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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साल भर में उधड़ने लगा एक करोड़ का पैच
बैराज-कांडी हाईवे का पहला 18 किलोमीटर का पैच यानि बैराज से रत्तापानी तक लोक निर्माण विभाग दुगड्डा डिवीजन के अंतर्गत आता है। जिस पर विभाग ने लगभग सालभर पहले करीब एक करोड़ पांच लाख की धनराशि खर्च कर डामरीकरण कराया था। लेकिन एक साल के अंदर ही मार्ग के इस पैच पर जगह-जगह गड्ढे होने लगे हैं। गड्ढों को भरने के लिए महकमे ने विभिन्न स्थानों पर पैचवर्क का कार्य भी शुरू करा दिया है।
36 करोड़ का आपदा मरम्मत कार्य भगवान भरोसे
अगस्त 2014 की यमकेश्वर आपदा में क्षतिग्रस्त स्टेेट हाईवे का गूलरचट्टी (घट्टूगाड़) से दुगड्डा तक का करीब 80 किमी. पैच की मरम्मत और डामरीकरण का कार्य करीब साल भर से भगवान भरोसे चल रहा है। आपदा के दौरान बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए राजमार्ग के मरम्मत संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी देने में पहले शासन ने चार महीने लगा दिए।
जबकि दिसंबर 2014 में 36.36 करोड़ की स्वीकृति मिलने के बावजूद पीडब्लूडी एडीबी आपदा डिवीजन 16 महीने बाद भी इसे दुरुस्त नहीं करा पाया है। एक पखवाड़े पहले विभागीय अधिकारियों ने मार्ग पर डामरीकरण कार्य शुरू कराने का दावा किया था, मगर अभी ऐसा कुछ नहीं हो रहा। मार्ग पर डामरीकरण से पहले होने वाले कई महत्वपूर्ण कार्य अभी भी बाकी हैं। ऐसे में तकनीकी लिहाज से ऐसा करना संभव नहीं है।
इनका कहना है
साल भर पहले विभाग ने मार्ग पर डामरीकरण का कार्य कराया था। जिसमें कई स्थानों पर गड्ढे पड़ गए थे, जिन पर हाल में पैच वर्क कराया जा चुका है। इसका कारण लक्ष्मणझूला-नीलकंठ मार्ग पर अत्यधिक यातायात दबाव का होना और पानी की निकासी व्यवस्था नहीं होना है। जिसके कारण जगह-जगह बरसात में पानी रुक जाता है और सड़क को नुकसान होता है।
-केएस राणा, सहायक अभियंता, पीडब्लूडी दुगड्डा डिवीजन
साल भर पहले विभाग ने मार्ग पर डामरीकरण का कार्य कराया था। जिसमें कई स्थानों पर गड्ढे पड़ गए थे, जिन पर हाल में पैच वर्क कराया जा चुका है। इसका कारण लक्ष्मणझूला-नीलकंठ मार्ग पर अत्यधिक यातायात दबाव का होना और पानी की निकासी व्यवस्था नहीं होना है। जिसके कारण जगह-जगह बरसात में पानी रुक जाता है और सड़क को नुकसान होता है।
-केएस राणा, सहायक अभियंता, पीडब्लूडी दुगड्डा डिवीजन