{"_id":"6813d19cba965513650068ee","slug":"brahmotsavam-concludes-with-the-marriage-of-lord-venugopal-rishikesh-news-c-5-1-drn1046-679338-2025-05-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rishikesh News: भगवान वेणुगोपाल के विवाह के साथ ब्रह्मोत्सव का समापन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rishikesh News: भगवान वेणुगोपाल के विवाह के साथ ब्रह्मोत्सव का समापन
Fri, 02 May 2025 01:25 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Fri, 02 May 2025 01:25 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
मायाकुंड स्थित श्रीकृष्ण कुंज में आयोजित पंच दिवसीय ब्रह्मोत्सव का समापन भगवान वेणुगोपाल के विवाह प्रसंग के साथ हुआ। देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने ब्रह्मोत्सव में शामिल होकर परिवार की सुख समृद्धि की प्रार्थना की।
बृहस्पतिवार को आयोजित ब्रह्मोत्सव में आश्रम के परमाध्यक्ष जगद्गुरु स्वामी कृष्णाचार्य महाराज ने कहा कि ब्रह्म का अर्थ है वर्धन करना। भगवान के ब्रह्मोत्सव में शामिल होने से मनुष्य के व्यक्तित्व का वर्धन होता है। भगवान नित्य हैं पर भक्तों के प्रेम से भगवान अवतार लेते हैं और उसी अवतार काल में भगवान का विवाह होता है। उसी प्रकार अर्चा विग्रह भी भगवान का अवतार है। भक्त अपने भगवान के अर्चा विग्रह का विवाह करके अपनी मनोरथ पूरी करते हैं।
उत्तराधिकारी स्वामी गोपालाचार्य महाराज ने कहा कि इस कार्यक्रम में हरिद्वार ऋषिकेश के वरिष्ठ संतों ने भक्तों को दर्शन दिए। विवाह से पूर्व जब भगवान वेणुगोपाल नगर भ्रमण पर निकले तो पूरा मार्ग जयघोषों से गुंजायमान हो गया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु वैवाहिक परिवेश में नजर आ रहे थे।
विज्ञापन
ब्रह्मोत्सव में स्थानीय विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य, लक्ष्मण मंदिर के महंत जगदीश प्रपन्नाचार्य, महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद महाराज, महंत ऋषिश्वरानंद, बाबा हठ योगी, स्वामी दामोदराचार्य आदि शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन महंत रवि प्रपन्नाचार्य महाराज ने किया।
बृहस्पतिवार को आयोजित ब्रह्मोत्सव में आश्रम के परमाध्यक्ष जगद्गुरु स्वामी कृष्णाचार्य महाराज ने कहा कि ब्रह्म का अर्थ है वर्धन करना। भगवान के ब्रह्मोत्सव में शामिल होने से मनुष्य के व्यक्तित्व का वर्धन होता है। भगवान नित्य हैं पर भक्तों के प्रेम से भगवान अवतार लेते हैं और उसी अवतार काल में भगवान का विवाह होता है। उसी प्रकार अर्चा विग्रह भी भगवान का अवतार है। भक्त अपने भगवान के अर्चा विग्रह का विवाह करके अपनी मनोरथ पूरी करते हैं।
विज्ञापन
उत्तराधिकारी स्वामी गोपालाचार्य महाराज ने कहा कि इस कार्यक्रम में हरिद्वार ऋषिकेश के वरिष्ठ संतों ने भक्तों को दर्शन दिए। विवाह से पूर्व जब भगवान वेणुगोपाल नगर भ्रमण पर निकले तो पूरा मार्ग जयघोषों से गुंजायमान हो गया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु वैवाहिक परिवेश में नजर आ रहे थे।
विज्ञापन
ब्रह्मोत्सव में स्थानीय विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य, लक्ष्मण मंदिर के महंत जगदीश प्रपन्नाचार्य, महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद महाराज, महंत ऋषिश्वरानंद, बाबा हठ योगी, स्वामी दामोदराचार्य आदि शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन महंत रवि प्रपन्नाचार्य महाराज ने किया।