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जागरूकता की अलख जगाने निकला एम्स का ’ट्रॉमा रथ’
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एम्स में जागरुकता ट्रॉमा रथ को हरी झंडी दिखाती गायनी विभाग की प्रो.जया चतुर्वेदी व अन्य।
- फोटो : RISHIKESH
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ऋषिकेश। उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान होने वाली मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से एम्स की ओर से ट्रॉमा रथ को रवाना किया गया। यह रथ सप्ताहभर तक राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में जाकर हेल्थ केयर वर्करों को आघात चिकित्सा के प्रति जागरूक कर, दुर्घटनाओं में घायल लोगों के उपचार को लेकर उन्हें प्रशिक्षित भी करेगा।
मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, एम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रोफेसर अश्वनी कुमार दलाल, ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. कमर आजम और गायनी विभाग की हेड प्रो. जया चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर एम्स के ’ट्रॉमा रथ’ को रवाना किया। 17 अक्तूबर को ’वर्ल्ड ट्रॉमा डे’ है। प्रत्येक वर्ष विश्वस्तर पर मनाए जाने वाले इस दिवस पर दुर्घटनाओं को रोकने और आघात चिकित्सा के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है। विषम भौगोलिक परिस्थिति वाले पर्वतीय राज्य में आपदाओं के अलावा सड़क दुर्घटनाएं साल दर साल बढ़ रही हैं। इन सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में लोगों की जान चली जाती है। ट्रॉमा विशेषज्ञों के अनुसार सड़क दुर्घटना के दौरान घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए पहले तीन घंटे बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आम लोगों सहित हेल्थ केयर वर्करों को दुर्घटना के दौरान घायल व्यक्ति की जान बचाने और समय रहते उपचार की गहन तकनीक का पर्याप्त अनुभव होना चाहिए। इन्हीं उद्देश्यों को लेकर एम्स ऋषिकेश ने सप्ताहभर का एक राज्यस्तरीय वृहद कार्यक्रम आयोजित किया है।
ट्रॉमा रथ के प्रभारी और एम्स के ट्रॉमा सर्जन डॉ. अजय कुमार एवं डॉ. मधुर उनियाल ने बताया कि यह कार्यक्रम एम्स और राज्य सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से संयुक्त रूप से संचालित किया जा रहा है।
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मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, एम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रोफेसर अश्वनी कुमार दलाल, ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. कमर आजम और गायनी विभाग की हेड प्रो. जया चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर एम्स के ’ट्रॉमा रथ’ को रवाना किया। 17 अक्तूबर को ’वर्ल्ड ट्रॉमा डे’ है। प्रत्येक वर्ष विश्वस्तर पर मनाए जाने वाले इस दिवस पर दुर्घटनाओं को रोकने और आघात चिकित्सा के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है। विषम भौगोलिक परिस्थिति वाले पर्वतीय राज्य में आपदाओं के अलावा सड़क दुर्घटनाएं साल दर साल बढ़ रही हैं। इन सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में लोगों की जान चली जाती है। ट्रॉमा विशेषज्ञों के अनुसार सड़क दुर्घटना के दौरान घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए पहले तीन घंटे बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आम लोगों सहित हेल्थ केयर वर्करों को दुर्घटना के दौरान घायल व्यक्ति की जान बचाने और समय रहते उपचार की गहन तकनीक का पर्याप्त अनुभव होना चाहिए। इन्हीं उद्देश्यों को लेकर एम्स ऋषिकेश ने सप्ताहभर का एक राज्यस्तरीय वृहद कार्यक्रम आयोजित किया है।
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ट्रॉमा रथ के प्रभारी और एम्स के ट्रॉमा सर्जन डॉ. अजय कुमार एवं डॉ. मधुर उनियाल ने बताया कि यह कार्यक्रम एम्स और राज्य सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से संयुक्त रूप से संचालित किया जा रहा है।
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