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Rishikesh News: चारधाम यात्रियों के लिए एम्स ने जारी किया इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर
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एम्स ऋषिकेश ने चारधाम यात्रियों के लिए इमरजेंसी हेल्प लाइन नंबर जारी किया है। स्वास्थ्य कारणों के चलते आपात स्थिति में फंसे तीर्थयात्री इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर- 7060005829 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा यात्री एम्स की ऑनलाइन कंसल्टेंसी सेवा का लाभ भी उठा सकते हैं।
एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि पहाड़ चढ़ने वाले यात्री हाइपरटेंशन, ऑक्सीजन की कमी के चलते कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करते हैं। सांस लेने में परेशानी, कार्डियक अरेस्ट, घबराहट, चक्कर आना, उल्टी व दस्त, थकान, हाइपोथर्मिया, पैरों में सूजन और ब्लड प्रेशर जैसी परेशानियों की वजह से कई बार गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं।
संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि राज्य सरकार के अनुरोध पर इस बार चारधाम यात्रा मार्गों में तैनात किए गए डॉक्टरों को एम्स की ओर से विशेष तौर से प्रशिक्षित किया गया है। ताकि संकट में फंसे किसी भी तीर्थयात्री को अनुभवी चिकित्सकों के अभाव में जान न गंवानी पड़े।
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प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि यात्रा के दौरान गंभीर यात्री को हेली एम्बुलेंस द्वारा एम्स पहुंचाया जाता है तो तत्काल प्रभावकारी इलाज उपलब्ध कराने के लिए संस्थान के ट्रामा सेंटर में व्यापक इंतजाम किए गए हैं। यहां पहले से ही एक डिजास्टर वार्ड बना है, जिसमें आपदाग्रस्त लोगों का इलाज किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि संस्थान ई-संजीवनी (कंसल्टेंसी सेवा) के माध्यम से भी जरूरतमंदों को स्वास्थ्य लाभ उपलब्ध करा रहा है।
स्वास्थ्य संबंधी एडवाइजरी
एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि दुर्घटना के दौरान घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए पहले एक घंटे का समय गोल्डन ऑवर होता है। इसलिए जरूरी है कि दुर्घटनाग्रस्त किसी भी व्यक्ति की मदद के लिए तत्काल 108 सेवा, नजदीकी पीएचसी, सीएचसी, जिला चिकित्सालय अथवा मेडिकल कॉलेज को सूचित किया जाए। चारधाम यात्रा पर जाने वाले लोगों के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि अस्थमा रोगी, शुगर, हार्ट और ब्लड प्रेशर की समस्या वाले यात्रियों को अपनी दवा हमेशा साथ लेकर जाना चाहिए। साथ ही ऐसे लोगों को नियमित अंतराल पर अपना बीपी चेक कराते रहना चाहिए।
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एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि पहाड़ चढ़ने वाले यात्री हाइपरटेंशन, ऑक्सीजन की कमी के चलते कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करते हैं। सांस लेने में परेशानी, कार्डियक अरेस्ट, घबराहट, चक्कर आना, उल्टी व दस्त, थकान, हाइपोथर्मिया, पैरों में सूजन और ब्लड प्रेशर जैसी परेशानियों की वजह से कई बार गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं।
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संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि राज्य सरकार के अनुरोध पर इस बार चारधाम यात्रा मार्गों में तैनात किए गए डॉक्टरों को एम्स की ओर से विशेष तौर से प्रशिक्षित किया गया है। ताकि संकट में फंसे किसी भी तीर्थयात्री को अनुभवी चिकित्सकों के अभाव में जान न गंवानी पड़े।
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प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि यात्रा के दौरान गंभीर यात्री को हेली एम्बुलेंस द्वारा एम्स पहुंचाया जाता है तो तत्काल प्रभावकारी इलाज उपलब्ध कराने के लिए संस्थान के ट्रामा सेंटर में व्यापक इंतजाम किए गए हैं। यहां पहले से ही एक डिजास्टर वार्ड बना है, जिसमें आपदाग्रस्त लोगों का इलाज किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि संस्थान ई-संजीवनी (कंसल्टेंसी सेवा) के माध्यम से भी जरूरतमंदों को स्वास्थ्य लाभ उपलब्ध करा रहा है।
स्वास्थ्य संबंधी एडवाइजरी
एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि दुर्घटना के दौरान घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए पहले एक घंटे का समय गोल्डन ऑवर होता है। इसलिए जरूरी है कि दुर्घटनाग्रस्त किसी भी व्यक्ति की मदद के लिए तत्काल 108 सेवा, नजदीकी पीएचसी, सीएचसी, जिला चिकित्सालय अथवा मेडिकल कॉलेज को सूचित किया जाए। चारधाम यात्रा पर जाने वाले लोगों के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि अस्थमा रोगी, शुगर, हार्ट और ब्लड प्रेशर की समस्या वाले यात्रियों को अपनी दवा हमेशा साथ लेकर जाना चाहिए। साथ ही ऐसे लोगों को नियमित अंतराल पर अपना बीपी चेक कराते रहना चाहिए।