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योग कोई विषय नहीं, बल्कि जीवन पद्घति: स्वामी चिदानंद

Mon, 04 Mar 2019 01:42 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 04 Mar 2019 01:42 AM IST
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योग कोई विषय नहीं, बल्कि जीवन पद्घति: स्वामी चिदानंद
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। योग और ध्यान एक वैज्ञानिक विधा है। योग, कोई एक विषय या ग्रंथ नहीं बल्कि यह जीवन पद्धति है। योग साधन तन, मन और जीवन को दिशा देती है। योग का आशय विश्वास से नहीं बल्कि सत्य से है। यह बात परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कही। रविवार को परमार्थ निकेतन में आयोजित 30वें अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के तीसरे दिन योगाचायों ने योग जिज्ञासुओं को योग, ध्यान, सेकेंड साउंड, संगीत, आध्यात्मिक जिज्ञासा समाधान सत्र, मंत्र जप, आरती, हवन और अन्य नवोदित विधाओं से अवगत कराया। वहीं सायंकालीन सत्र में मध्य अमरीका, दक्षिण अमरीका, यूरोप, उत्तर अमरीका, कोलंबिया, पेरु और विभिन्न देशों से आये जनजाति और आदिवासियों के प्रमुखों ने म्यूजिक फॉर पीस का अभ्यास कराया।
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अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि दुनिया का सबसे ताकतवर शब्द मां है। चाहे धर्म कोई भी हो, कोई भी सभ्यता हो या फिर आदिमयुग हो या वर्तमान, मां हर जगह पूजनीय है। मां हमेशा से शक्ति, प्राण, ऊर्जा, प्रेम, करुणा और ममता को अपने आंचल में समेटे अपने घर संसार का ताना बाना बुनती है, फिर उस मां की मातृ शक्ति की, नारी की पीड़ा को समझना, उसके भविष्य को समझना और उसके भविष्य के बारे में सोचना बहुत जरूरी है। हम दुनिया को बदलने की बात करते हैं, परंतु दुनिया को बदलने के लिए हमें बेटियों को जीवन देना उन्हें शिक्षित करना होगा। बेटियां शिक्षित होंगी तो समझो हमने दो पीढ़ियों को शिक्षित किया।
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विभिन्न योग मुद्राओं से अवगत हुए योग जिज्ञासु
अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के तीसरे दिन आदिवासी और जनजाति के प्रमुखों ने सुबह पांच बजे स्वेट लॉज साधना के माध्यम से शरीर के शुद्धिकरण समारोह में अपनी स्थानीय भाषा में प्रार्थना, गीत-संगीत और ध्यान की संयुक्त प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। मैसूर से आए योगाचार्य पट्टाभि जोइस और चिकित्सक परमगुरु शरथ जोइस ने योग घाट पर पारंपरिक अष्टांग योग का अभ्यास कराया। चीन से आए योगाचार्य युजिया ने ताओवादी योग, अमेरिका की योगाचार्य कीया मिलर ने योग का अभ्यास कराया। ऋषिकेश मूल के चीन के प्रमुख योग केंद्र के सह संस्थापक योगाचार्य मोहन भंडारी ने आसन संरेखण की कला, अमेरिका के योगाचार्य टॉमी रोजन ने ’द थ्री ज्वेल्स’, योगाचार्य डीन फ्लिन ने सोल स्वेट, अमेरिका की शॉन कॉर्न ने ‘योग का अनाहत प्रवाह’, योगाचार्य, हीलर और म्यूजिशियन सोल डेविड रॉय ने ‘द पॉवर ऑफ ओम’, कोलंबिया से आए स्वामी परमाद्वैति ने ‘इनबाउंड योग’, मां ज्ञान सुवेरा ने कॉस्मिक इंटेलिजेंस मेडिटेशन सिखाया।
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