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Rishikesh News: सीएचसी यमकेश्वर में हर माह आ रहे 3-4 रैबीज के मामले
Sun, 23 Aug 2026 07:06 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sun, 23 Aug 2026 07:06 PM IST
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सीएचसी यमकेश्वर में हर माह आ रहे 3-4 रैबीज के मामले- कुत्ता, बंदर और बिल्ली के काटने के पहुंच रहे मरीज
यमकेश्वर। पर्वतीय क्षेत्रों में आवारा कुत्तों और जंगली जानवरों का खतरा बढ़ता जा रहा है। सीएचसी यमकेश्वर में हर माह कुत्ते, बंदर और बिल्ली के काटने के 3-4 मामले सामने आ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार कुत्ते, बंदर, बिल्ली, गुलदार और भालू के काटने या नाखून लगने से रैबीज का खतरा रहता है, जो समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा हो सकता है।
गांवों में आवारा कुत्ते और कटखने बंदर राहगीरों व स्कूली बच्चों को निशाना बना रहे हैं। कई लोग लोगों को काटने वाले पालतू कुत्तों को बाजार या अन्य क्षेत्रों में छोड़ देते हैं, जिससे समस्या बढ़ती है। चिकित्सकों ने पालतू कुत्तों और बिल्लियों को हर साल रैबीज का टीका लगवाने, आसपास कचरा न फैलाने और बच्चों को जानवरों से दूर रखने की सलाह दी है। जंगल वाले रास्तों पर सुबह-शाम अकेले जाने से भी बचने को कहा गया है।
कुत्ते या अन्य जानवर के काटने पर घाव को तुरंत 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोएं, एंटीसेप्टिक जैसे डेटॉल लगाएं, घाव खुला रखें और जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। घाव को काटने, खून निचोड़ने, मिर्च, हल्दी, चूना, कॉफी या अन्य घरेलू नुस्खे लगाने और कसकर पट्टी बांधने से बचें।
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कोेट-
सीएचसी यमकेश्वर में एंटी रैबीज के पर्याप्त टीके उपलब्ध हैं, जानवरों के काटने के बाद घबराएं नहीं लेकिन लापरवाही बिल्कुल न करें। घाव को तुरंत धोकर सीधे अस्पताल आएं।
- डॉ. शुभम मुयाल, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी यमकेश्वर
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यमकेश्वर। पर्वतीय क्षेत्रों में आवारा कुत्तों और जंगली जानवरों का खतरा बढ़ता जा रहा है। सीएचसी यमकेश्वर में हर माह कुत्ते, बंदर और बिल्ली के काटने के 3-4 मामले सामने आ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार कुत्ते, बंदर, बिल्ली, गुलदार और भालू के काटने या नाखून लगने से रैबीज का खतरा रहता है, जो समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा हो सकता है।
गांवों में आवारा कुत्ते और कटखने बंदर राहगीरों व स्कूली बच्चों को निशाना बना रहे हैं। कई लोग लोगों को काटने वाले पालतू कुत्तों को बाजार या अन्य क्षेत्रों में छोड़ देते हैं, जिससे समस्या बढ़ती है। चिकित्सकों ने पालतू कुत्तों और बिल्लियों को हर साल रैबीज का टीका लगवाने, आसपास कचरा न फैलाने और बच्चों को जानवरों से दूर रखने की सलाह दी है। जंगल वाले रास्तों पर सुबह-शाम अकेले जाने से भी बचने को कहा गया है।
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कुत्ते या अन्य जानवर के काटने पर घाव को तुरंत 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोएं, एंटीसेप्टिक जैसे डेटॉल लगाएं, घाव खुला रखें और जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। घाव को काटने, खून निचोड़ने, मिर्च, हल्दी, चूना, कॉफी या अन्य घरेलू नुस्खे लगाने और कसकर पट्टी बांधने से बचें।
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सीएचसी यमकेश्वर में एंटी रैबीज के पर्याप्त टीके उपलब्ध हैं, जानवरों के काटने के बाद घबराएं नहीं लेकिन लापरवाही बिल्कुल न करें। घाव को तुरंत धोकर सीधे अस्पताल आएं।
- डॉ. शुभम मुयाल, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी यमकेश्वर