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प्लास्टिक पृथ्वी के लिए खतरा : स्वामी चिदानंद
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
हमारे पास संसार के लिए प्लान ए या बी हो सकता है, लेकिन प्लानेट ‘पृथ्वी’ एक ही है और बढ़ती प्लास्टिक प्लानेट के लिए खतरा है। ईको-सिस्टम को बनाए रखना 21 सदी की वैश्विक जरूरत है। प्लास्टिक की समस्या केवल भारत की नहीं बल्कि पूरे विश्व की समस्या बन गयी है। ऐसे में उसका रिसाइकिलिंग, पुन:प्रयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है। तभी हम आने वाली पीढ़ी को बेहतर भविष्य दे सकते हैं।
यह बातें परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने बुधवार को परमार्थ निकेतन की ओर से आयोजित 30वें अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में कहीं। योग महोत्सव के छठे दिन योग फॉर अवर प्लेनेट-योग, जलवायु और पृथ्वी की सक्रियता विषय पर चर्चा की गई। स्वामी चिदानंद ने कहा कि आज दुनियाभर में प्रत्येक वर्ष पांच करोड़ टन इलेक्ट्रानिक और इलेक्ट्रिकल अपशिष्ट (ई-कचरा) का उत्पादन होता है और इसके केवल 20 प्रतिशत को ही औपचारिक रूप से रिसाइकिल किया जाता है। शेष 80 प्रतिशत या तो लैंडफिल में समाप्त होता है। इसके कारण धरा (भूमि) बंजर हो रही है।
योग में विश्व की सभी समस्याओं का समाधान : साध्वी भगवती
अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि पतंजलि का अष्टांग योग केवल शरीर और श्वास का योग नहीं है, बल्कि उसमें विश्व की सभी समस्याओं का समाधान समाहित है। उन्होंने कहा कि अगर हम पतंजलि के अष्टांग योग के केवल दो सूत्र यम और नियम को जीवन में धारण करें तो विलक्षण परिवर्तन हो सकता है। हम अहिंसा, सत्य और अस्तेय को जीवन में धारण करें तो दुनिया में व्याप्त आतंकवाद, पर्यावरण और अन्य सभी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।
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सामान्य जीवन शैली से नदी और पृथ्वी को कर सकते है संरक्षित
स्वामी परमाद्वैति ने कहा कि सामान्य जीवन शैली अपनाकर हम अपनी नदियों और पृथ्वी को संरक्षित कर सकते हैं। हम अगर सनातन धर्म को मानते हैं तो हमें अपनी जीवन पद्धति को भी सनातन पद्धति के अनुसार बदलनी होगी। अपनी जरूरतों को कम करना होगा और प्राकृतिक जीवन पद्धति अपनानी होगी। मां गंगा और विश्व की प्रदूषित नदियों को संरक्षित करना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि गंगा का अधिकार हमारा अधिकार है और हमारा अधिकार गंगा का अधिकार है।
परमार्थ निकेतन योग के लिए सर्वश्रेष्ठ
योग फॉर अवर प्लेनेट सत्र में अमरीका से पहुंचे योगाचार्य सोल डेविड ने कहा कि परमार्थ निकेतन योग के लिए सबसे श्रेष्ठ स्थान है। हमें हृदय से अपने प्लानेट से जुड़ना होगा। तभी हम उन समस्याओं को समझ पाएंगे और उनका समाधान कर सकेंगे।
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हमारे पास संसार के लिए प्लान ए या बी हो सकता है, लेकिन प्लानेट ‘पृथ्वी’ एक ही है और बढ़ती प्लास्टिक प्लानेट के लिए खतरा है। ईको-सिस्टम को बनाए रखना 21 सदी की वैश्विक जरूरत है। प्लास्टिक की समस्या केवल भारत की नहीं बल्कि पूरे विश्व की समस्या बन गयी है। ऐसे में उसका रिसाइकिलिंग, पुन:प्रयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है। तभी हम आने वाली पीढ़ी को बेहतर भविष्य दे सकते हैं।
यह बातें परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने बुधवार को परमार्थ निकेतन की ओर से आयोजित 30वें अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में कहीं। योग महोत्सव के छठे दिन योग फॉर अवर प्लेनेट-योग, जलवायु और पृथ्वी की सक्रियता विषय पर चर्चा की गई। स्वामी चिदानंद ने कहा कि आज दुनियाभर में प्रत्येक वर्ष पांच करोड़ टन इलेक्ट्रानिक और इलेक्ट्रिकल अपशिष्ट (ई-कचरा) का उत्पादन होता है और इसके केवल 20 प्रतिशत को ही औपचारिक रूप से रिसाइकिल किया जाता है। शेष 80 प्रतिशत या तो लैंडफिल में समाप्त होता है। इसके कारण धरा (भूमि) बंजर हो रही है।
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योग में विश्व की सभी समस्याओं का समाधान : साध्वी भगवती
अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि पतंजलि का अष्टांग योग केवल शरीर और श्वास का योग नहीं है, बल्कि उसमें विश्व की सभी समस्याओं का समाधान समाहित है। उन्होंने कहा कि अगर हम पतंजलि के अष्टांग योग के केवल दो सूत्र यम और नियम को जीवन में धारण करें तो विलक्षण परिवर्तन हो सकता है। हम अहिंसा, सत्य और अस्तेय को जीवन में धारण करें तो दुनिया में व्याप्त आतंकवाद, पर्यावरण और अन्य सभी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।
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सामान्य जीवन शैली से नदी और पृथ्वी को कर सकते है संरक्षित
स्वामी परमाद्वैति ने कहा कि सामान्य जीवन शैली अपनाकर हम अपनी नदियों और पृथ्वी को संरक्षित कर सकते हैं। हम अगर सनातन धर्म को मानते हैं तो हमें अपनी जीवन पद्धति को भी सनातन पद्धति के अनुसार बदलनी होगी। अपनी जरूरतों को कम करना होगा और प्राकृतिक जीवन पद्धति अपनानी होगी। मां गंगा और विश्व की प्रदूषित नदियों को संरक्षित करना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि गंगा का अधिकार हमारा अधिकार है और हमारा अधिकार गंगा का अधिकार है।
परमार्थ निकेतन योग के लिए सर्वश्रेष्ठ
योग फॉर अवर प्लेनेट सत्र में अमरीका से पहुंचे योगाचार्य सोल डेविड ने कहा कि परमार्थ निकेतन योग के लिए सबसे श्रेष्ठ स्थान है। हमें हृदय से अपने प्लानेट से जुड़ना होगा। तभी हम उन समस्याओं को समझ पाएंगे और उनका समाधान कर सकेंगे।