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धर्म के अंदर बंधना आज की जरूरत नहीं : नौटियाल
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
वर्तमान में लोग मानवता को छोड़ धर्म के पीछे पड़े रहते हैं, लेकिन यह नहीं समझना चाहते कि धर्म को मानना ही इंसानियत को समझना है।
ये बातें ढ़ड़ी श्यामपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक शिव स्वरूप नौटियाल ने कहीं। नौटियाल ने कहा कि हम यह क्यों नहीं समझना चाहते कि धर्म के अंदर बंधना आज की जरूरत नहीं है। वर्तमान समय बंधनों से बाहर निकलकर सच्चाई समझने और स्वीकार करने से ही मनुष्य उन्नति के मार्ग पर बढ़ पाएगा। उन्होंने कहा कि बुद्ध, पैगंबर, गुरुनानक, ईसा मसीह सभी ने पहले खुद को पहचानकर इंसानियत का संदेश दिया है, लेकिन मनुष्य ने उनके नाम का धर्म बना दिया। जिसने यह सारा संसार बनाया है, वो शक्ति हमारे अंदर है, और उसको जानने की इच्छा बहुत कम लोगों के अंदर है। वास्तव में मनुष्य का अगर कोई धर्म है, तो अपने अंदर की शक्ति को पहचानना है। कथा के दौरान भजन भी प्रस्तुत किए गए। इस मौके पर समाजसेवक भगवती प्रसाद सेमवाल, ज्योति सेमवाल, दिनेश सेमवाल, आचार्य दीपक कोठियाल, अमित कोठारी, घनश्याम आदि मौजूद रहे।
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वर्तमान में लोग मानवता को छोड़ धर्म के पीछे पड़े रहते हैं, लेकिन यह नहीं समझना चाहते कि धर्म को मानना ही इंसानियत को समझना है।
ये बातें ढ़ड़ी श्यामपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक शिव स्वरूप नौटियाल ने कहीं। नौटियाल ने कहा कि हम यह क्यों नहीं समझना चाहते कि धर्म के अंदर बंधना आज की जरूरत नहीं है। वर्तमान समय बंधनों से बाहर निकलकर सच्चाई समझने और स्वीकार करने से ही मनुष्य उन्नति के मार्ग पर बढ़ पाएगा। उन्होंने कहा कि बुद्ध, पैगंबर, गुरुनानक, ईसा मसीह सभी ने पहले खुद को पहचानकर इंसानियत का संदेश दिया है, लेकिन मनुष्य ने उनके नाम का धर्म बना दिया। जिसने यह सारा संसार बनाया है, वो शक्ति हमारे अंदर है, और उसको जानने की इच्छा बहुत कम लोगों के अंदर है। वास्तव में मनुष्य का अगर कोई धर्म है, तो अपने अंदर की शक्ति को पहचानना है। कथा के दौरान भजन भी प्रस्तुत किए गए। इस मौके पर समाजसेवक भगवती प्रसाद सेमवाल, ज्योति सेमवाल, दिनेश सेमवाल, आचार्य दीपक कोठियाल, अमित कोठारी, घनश्याम आदि मौजूद रहे।