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पांच दुकानों के आवंटन में फर्जीवाड़ा
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। आपदा प्रभावितों को राहत प्रदान करने के लिए पर्यटन विभागों की ओर से आवंटियों को दी गई पांच दुकानों के आवंटन में फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां अनुबंध पत्र में पर्यटन विभाग की ओर से प्रथम पक्ष के रूप में किसी अधिकारी के हस्ताक्षर ही नहीं हैं। इसका खुलासा आरटीआई के तहत मांगे गए दस्तावेजों से हुआ है। मामला 2014 का है। आपदा प्रभावितों को राहत प्रदान करने के लिए पर्यटन विभाग की ओर से पांच दुकानों का आवंटन किया गया था। अनुबंध पत्र में पर्यटन विभाग की ओर से प्रथम पक्ष के रूप में किसी अधिकारी के हस्ताक्षर ही नहीं हैं।
इतना ही नहीं कई आवंटियों के नामों में भी साजिश सामने आई है। विभागीय अफसरों का तर्क है कि जितनी भी दुकानें आवंटित की गई हैं वे सभी आपदा प्रभावित हैं। विभागीय दस्तावेज कुछ और ही सच्चाई बयां कर रहे हैं। इनमें तीन लोग ऐसे हैं, जिनका नाम आपदा प्रभावितों की सूची मेें नाम ही नहीं है। लॉटरी के तहत ऋषिकेश में बस अड्डे के समीप पांच दुकानों का आवंटन किया गया है।
कई आवंटियों ने किराया तक नहीं दिया
पर्यटन विभाग ने आपदा राहत के लाभांवितों के साथ अनुबंध किया था। इसके तहत सभी आवंटियों से प्रति दुकान 1575 रुपये किराया वसूल किया जाएगा। इसके अलावा प्रति वर्ष किराए में पांच फीसदी वृद्धि का भी जिक्र है। अनुबंध शर्तों के मुताबिक इसका उल्लंघन करने पर आवंटन स्वत: रद्द माना जाएगा। मनमानी का आलम ये है कि पांच फीसदी वृद्धि तो दूर मूल किराया ही कई आवंटी पिछले तीन साल से अदा नहीं कर रहे हैं। इसके विरुद्घ पर्यटन विभाग रिमाइंडर की औपचारिकता निभाकर चुप्पी साधे बैठा है।
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कोट्स
आवंटन में गड़बड़ी और किराया अदा न करने का मामला संज्ञान में आया है। मैं खुद डेपुटेशन पर हूं। पूरा मामला संज्ञान में नहीं है। वैसे भी आवंटियों का अंतिम टेन्योर चल रहा है। इसके बाद स्वत: निरस्त हो जाएगा।
- पुरुषोत्तम, निदेशक प्लानिंग, पर्यटन विभाग
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इतना ही नहीं कई आवंटियों के नामों में भी साजिश सामने आई है। विभागीय अफसरों का तर्क है कि जितनी भी दुकानें आवंटित की गई हैं वे सभी आपदा प्रभावित हैं। विभागीय दस्तावेज कुछ और ही सच्चाई बयां कर रहे हैं। इनमें तीन लोग ऐसे हैं, जिनका नाम आपदा प्रभावितों की सूची मेें नाम ही नहीं है। लॉटरी के तहत ऋषिकेश में बस अड्डे के समीप पांच दुकानों का आवंटन किया गया है।
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कई आवंटियों ने किराया तक नहीं दिया
पर्यटन विभाग ने आपदा राहत के लाभांवितों के साथ अनुबंध किया था। इसके तहत सभी आवंटियों से प्रति दुकान 1575 रुपये किराया वसूल किया जाएगा। इसके अलावा प्रति वर्ष किराए में पांच फीसदी वृद्धि का भी जिक्र है। अनुबंध शर्तों के मुताबिक इसका उल्लंघन करने पर आवंटन स्वत: रद्द माना जाएगा। मनमानी का आलम ये है कि पांच फीसदी वृद्धि तो दूर मूल किराया ही कई आवंटी पिछले तीन साल से अदा नहीं कर रहे हैं। इसके विरुद्घ पर्यटन विभाग रिमाइंडर की औपचारिकता निभाकर चुप्पी साधे बैठा है।
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आवंटन में गड़बड़ी और किराया अदा न करने का मामला संज्ञान में आया है। मैं खुद डेपुटेशन पर हूं। पूरा मामला संज्ञान में नहीं है। वैसे भी आवंटियों का अंतिम टेन्योर चल रहा है। इसके बाद स्वत: निरस्त हो जाएगा।
- पुरुषोत्तम, निदेशक प्लानिंग, पर्यटन विभाग